समस्त शाकद्वीपीय समाज को दिल्ली-एनसीआर भास्कर ग्रुप से सीख लेनी चाहिए
शहर एक पर संगठन अनेक, कभी मिलकर कोई काम नहीं करेंगे, एक छोटे से पद को पाने के लिए जी-जान लगा देंगे, यो कहिये कि मर मिटेंगे पर पद की मर्यादा को नहीं रखेंगे, अगर कोई बढ़िया काम करना चाहे तो उसमें ऐसा मीन-मेख निकालेंगे कि अच्छा काम करनेवाले लोगों की नानी-दादी याद आ जाये, खुद को बनाये रखेंगे संत, ऐसा संत जो शंकराचार्य को भी मात दे दें,
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