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बिना फार्म भरे रांची प्रेस क्लब के सदस्य बन गये पद्मश्री बलबीर, शरण, हरिनारायण और नीलू

अगर कोई लड़का बिना मैट्रिक का फार्म भरे, मैट्रिक की परीक्षा पास कर जाये, तो आपको कैसा लगेगा? आप आश्चर्य अवश्य करेंगे, कि भला बिना मैट्रिक का फार्म भरें, कोई मैट्रिक की परीक्षा कैसे पास कर सकता है? ठीक उसी तरह जैसे बिना मैट्रिक का फार्म भरे, कोई लड़का मैट्रिक की परीक्षा पास नहीं कर सकता, वैसे ही कोई भी पत्रकार बिना सदस्यता फार्म भरे, किसी भी संस्थान का सदस्य कैसे बन सकता है?

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जनाब झारखण्ड के CM दो बार सड़क जाम में क्या फंस गये, उन्हें दिव्य ज्ञान प्राप्त हो गया

कमाल है, जब अपने पर आई तो लगे बैठक करने, कानून का राज स्थापित करने, ट्रैफिककर्मियों को बर्खास्त करने और जब इन्हीं समस्याओं से जनता त्रस्त थी, तो इनको कोई लेना-देना नहीं था। झारखण्ड बनने के बाद कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों, यहां तक की नगर-विकास मंत्रालय तक संभाल चुके रघुवर दास, आज मुख्यमंत्री पद तक पहुंच गये, पर जरा देखिये, इनके क्रियाकलापों को, इनको जनता की कोई फिक्र नहीं, फिक्र सिर्फ अपनी है।

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बलबीर एंड कंपनी के हालत पस्त, ईंट से ईंट बजाने की तैयारी, रघुवर सरकार पर भी उठे सवाल

सूत्र बताते है कि चूंकि 881 सदस्यों में बलबीर एंड कंपनी के लोगों का नाम नहीं है, जिन्होंने सदस्यता हेतु आवेदन नहीं जमा किया, अब वे चाहते है कि बैकडोर से या नियमों में फेरबदल कर, सदस्यता प्राप्त कर लें, पर ऐसा संभव होता नहीं दीख रहा, क्योंकि जिन लोगों ने सदस्यता हेतु आंदोलन किया, और जिनकी बलबीर एंड कंपनी ने कभी सुनने का काम नहीं किया और न ही सम्मान दिया, अंतिम-अंतिम समय तक नाक रगड़वाने की कोशिश की।

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झारखण्ड में सड़क जाम करनेवाले ही, सड़क जाम होने का रोना रोते हैं

बेटे या बेटी की जब भी शादी होगी तो वह सड़कों पर ही संपन्न होती हैं, जरा देखिये बेटे या बेटी वाले बारात को सड़क पर उतारकर घंटों नंगा नाच करेंगे, यही नहीं अब तो इन बारातों में अपने घर की महिलाओं को नचवाना भी फैशन हो गया हैं, ऐसे में सड़क जाम होगी ही। सड़क पर ही नमाज पढ़ना और अपनी शक्ति प्रदर्शित करना, की हम भी एक बहुत बड़ी ताकत में हैं, हमसे पंगा मत लेना, यह भी सड़कों पर ही संपन्न होता है, ऐसे में सड़क जाम होगी ही।

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धिक्कार है, ऐसी सरकार और उसके उच्चाधिकारियों पर जो भ्रष्टाचारियों के आगे नाक रगड़ते हैं

जब झारखण्ड प्रशासनिक सेवा संघ के लोग एंटी करप्शन ब्यूरों के खिलाफ आंदोलन करके अपनी शर्ते मनवा सकते हैं, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को नाक रगड़ने पर मजबूर कर सकते हैं, तो अन्य संगठनों और संघों के पदाधिकारी ऐसा क्यों नहीं कर सकते? वे भी अपने विभागों के अंतर्गत भ्रष्टाचार में लिप्त और घूस लेते गिरफ्तार अधिकारियों/कर्मचारियों के समर्थन में आंदोलन पर उतरें तथा अपने लोगों को बाइज्जत बरी कराने के लिए अभी से जुट जाये।

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रांची के पत्रकार भूल गये, राष्ट्रीय प्रेस दिवस को, नये पत्रकारों ने याद दिलाया फिर भी…

और अब सवाल उनलोगों से, जो स्वयं को पत्रकारिता का धुरंधर मानते हैं, जिन्हें लोग आजकल पत्रकारिता के भीष्म पितामह कहने लगे हैं, जो पत्रकारिता के ही क्षेत्र में पद्मश्री प्राप्त कर चुके हैं, जो रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष हैं, क्या उन्हें आज के दिन को लेकर सजग नहीं होना था, क्या एक कार्यक्रम आयोजित नहीं करा सकते थे। पहले तो बात थी कि जगह नहीं हैं, अब तो जगह भी हैं, अब क्या दिक्कत हैं? किसका इंतजार था।

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प्रभात खबर ने झारखण्ड स्थापना दिवस में जुटी भीड़ से पर्दा उठाया, भीड़ आई नहीं, लाई गई

झारखण्ड स्थापना दिवस के अवसर पर रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित विशेष सरकारी कार्यक्रम में आम जनता ने अपनी दूरी पूर्व की तरह बनाये रखा, इस कार्यक्रम में वे ही लोग आये, जो विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं या उससे जुड़े हैं। प्रभात खबर ने इस बात को बहुत ही शानदार ढंग से उठाया है। आप प्रभात खबर के पृष्ठ संख्या 8 को देखें। शीर्षक है – नौ बजते ही हर कदम बढ़ चले थे, मोरहाबादी की ओर।

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CM रघुवर बताएं कि, ये झारखण्ड स्थापना दिवस के नाम पर उत्सव किसके लिए?

इसमें वे लोग भी शामिल होते है, जिनका काम भीड़ को लाना होता हैं, ये काम जिला के वरीय प्रशासनिक अधिकारी, ठेकेदारों से मिलकर कराते हैं, जिसका मुनाफा जिला के वरीय अधिकारी, उन्हें योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी देकर पूरा करते हैं, पर आम जनता इन सबसे दूरे अपने गांवों में अपने किस्मत पर रो रही होती है। वह कहती है, कि सोचा था नई सरकार बनाउंगी तो आराम मिलेगा, पर यहां तो आराम दूर, नींद हराम हो गई।

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पं. जवाहरलाल नेहरु को आम जनता की नजरों से ओझल करने की गलत परंपरा की शुरुआत

जो देश अपने महापुरुषों को याद नहीं करता, उनके जन्मदिन अथवा पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धा सुमन नहीं अर्पित करता, वो कालांतराल में स्वयं नष्ट हो जाता हैं, इसे स्वीकार करना चाहिए। राष्ट्र को अपने महापुरुषों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। कल तक अपने महापुरुषों को लोग जातीयता में बांटते थे, अब तो हद हो गई, लोग उन्हें अनादर भी करने लगे हैं, उनकी योगदान पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं,

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दानापुर में बांगलादेशी सैनिकों को भारतीय सेना आंतकवाद से निबटने के लिए दे रही विशेष ट्रेनिंग

चूंकि दोनों राष्ट्र आतंकवाद और विद्रोही गतिविधियों को समान रुप से झेल रहे हैं। दोनों देशों के सिद्धांत और रणनीति आतंकवाद और विद्रोही गतिविधियों के खिलाफ मिलती-जुलती है। इसलिए ये प्रशिक्षण एक दूसरे के लिए भी लाभदायक हैं। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बांगलादेश के सैनिकों को विद्रोह और आतंकवाद से निपटने के लिए सक्षम बनाना है। भारतीय सेना अपने अनुभवों और प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने की गतिविधियों को साझा करेंगे।

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