अपनी बात

CM रघुवर बताएं कि, ये झारखण्ड स्थापना दिवस के नाम पर उत्सव किसके लिए?

ये झारखण्ड स्थापना दिवस के नाम पर उत्सव किसके लिए?

  • क्या संतोषी और उसके परिवार जैसों के लिए, जो आज भी भरपेट अनाज नहीं मिल पाने के कारण, भात-भात कहकर चिल्लाते हुए मर जाते हैं?
  • क्या उन पिता के लिए, जिनकी बेटी बलात्कारियों की शिकार हो जाती हैं, और जिसका पिता जब सीएम के पास फरियाद लेकर जाता हैं तो उसके पिता की भरी सभा में सीएम रघुवर दास द्वारा बेइज्जत कर दी जाती है?
  • क्या उस पिता के लिए, जो अपने बेटे का शव कंधे पर लेकर श्मशान पहुंचता हैं?
  • क्या उस मां के लिए, जो सड़क पर ही अपनी संतान को जन्म दे देती है?
  • क्या उन युवकों के लिए, जो अपनी सारी पूंजी लगाकर, रक्षाशक्ति विश्वविद्यालय से डिग्री लेकर, उन्हें सब्जबाग दिखाकर, सुपरवाइजर के नाम पर नौकरी का दिखावा देकर, गार्ड की नौकरी करने के लिए कहा जाता हैं?
  • क्या उन लड़कियों के लिए, जो मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में काम करती हैं, पर उनकी बातों को अनसुनी कर दी जाती है?
  • क्या उन किसानों और उन परिवारों के लिए जो आत्महत्या के लिए मजबूर हो गये?
  • क्या उन झारखण्ड के मूलवासियों और आदिवासियों के जमीन लूटने के लिए सीएनटी-एसपीटी में संशोधन के खिलाफ लड़ रहे झारखण्ड के नागरिकों के लिए, जिनके आगे सरकार को झूकना ही पड़ा?

या

  • उनके लिए, जो फर्जी विश्वविद्यालय चलाकर, राज्य सरकार के साथ एमओयू कर, झारखण्ड को लूटने का सपना देख रहे हैं?
  • उनके लिए, जो कौशल विकास के नाम पर दुकान खोलकर, भारतीय प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े अधिकारियों और मंत्रियों के साथ झारखण्ड को लूट रहे हैं?
  • उन आईएएस के बेटे-बेटियों के लिए जो ठेकेदारों के साथ मिलकर विभिन्न सरकारी योजनाओं में अपना कमीशन उठा रहे हैं?
  • उन अखबारों व चैनल मालिकों व संपादकों के लिए, जो सरकार की आरती उतारने में स्वयं के नीचता का सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं?
  • उन अखबारों के लिए, जो छपते ही नहीं है, फिर भी उन्हें मुंहमांगी विज्ञापन उपलब्ध करा दी जाती है, उन चैनलों के लिए जो झारखण्ड में अवैध रुप से चलते हैं, और उन्हें सरकार ही नहीं, बल्कि विधानसभा के द्वारा भी हर प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाती हैं?
  • उन नेताओं व मंत्रियों के लिए जो चुनाव के समय किसी अन्य पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतते हैं और बाद में अपनी सुविधा के अनुसार, सत्ताधारी दलों से चिपक कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में लग जाते हैं?
  • उन ठेकेदारों के लिए, जो सड़क निर्माण, स्टेडियम निर्माण, विद्यालय निर्माण, विधानसभा भवन निर्माण, न्यायिक भवन निर्माण में लगकर, अधिकारियों और संबंधित मंत्रियों को उनका हिस्सा पहुंचा रहे हैं?
  • उन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए जो मोमेंटम झारखण्ड और झारखण्ड माइनिंग शो के नाम पर झारखण्ड को लूट रहे और दिग्भ्रमित कर रहे हैं?
  • उन लोगों के लिए, जिन्हें आप विभिन्न योजनाओं के नाम पर, उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए, मनोनयन के आधार पर, जिम्मेवारी सौंप रहे हैं?

अगर ये सब इन्हीं लोगों के लिए हैं तो आपको ये झारखण्ड स्थापना दिवस मुबारक, पर हम तो झारखण्ड स्थापना दिवस उसी दिन मनायेंगे। जब एक ईमानदार, पारदर्शी सरकार, जनहित में कदम उठायेंगी। जब जनता को लगेगा कि सचमुच उनकी बातों पर चलनेवाली सरकार बनी हैं, जिसकी कथनी और करनी में अंतर नहीं। जो उद्योगपतियों के हितों का ध्यान तो रखती ही हैं, पर आम जनता का हित, उसे सर्वोपरि दिखाई पड़ता है।

आज पूरा रांची सजा है, राष्ट्रपति आ रहे हैं। हालांकि राष्ट्रपति आज आनेवाले नहीं थे। ये तो 27 नवम्बर को योगदा आश्रम के कार्यक्रम में आनेवाले थे, पर योगदा आश्रम के संन्यासियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा बार-बार किये गये अनुरोध को स्वीकारते हुए, अपने कार्यक्रम में बदलाव किया तब जाकर राष्ट्रपति भवन ने राज्य सरकार के आमंत्रण को स्वीकार किया और आज भारतीय राष्ट्रपति रामनाथ कोंविद झारखण्ड स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं।

ऐसे भी हमारे देश में राष्ट्रपति और राज्यपाल को कोई विशेषाधिकार प्राप्त नहीं हैं, वे इसी प्रकार के आयोजनों में शरीक होने के लिए बने हैं। जहां सरकार और सरकार के अधिकारी बड़े ताम-झाम से भाग लेते हैं, भाग वे भी लेते हैं, जो इस कार्यक्रम से जुड़े होते हैं, जिन्हें इन कार्यक्रमों से एक बड़ी धनराशि प्राप्त होने की संभावना रहती हैं। इसमें वे लोग भी शामिल होते है, जिनका काम भीड़ को लाना होता हैं, ये काम जिला के वरीय प्रशासनिक अधिकारी, ठेकेदारों से मिलकर कराते हैं, जिसका मुनाफा जिला के वरीय अधिकारी, उन्हें योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी देकर पूरा करते हैं, पर आम जनता इन सबसे दूर अपने गांवों में अपने किस्मत पर रो रही होती है। वह कहती है, कि सोचा था नई सरकार बनाउंगी तो आराम मिलेगा, पर यहां तो आराम दूर, नींद हराम हो गई। ऐसा रघुवर का दास, यानी स्वयं को हनुमान कहनेवाला मुख्यमंत्री ईश्वर किसी राज्य को न दें, जो अपना नाम चमकाने के लिए, प्रचार-प्रसार पर करोड़ों फूंक देता हैं, पर आम जनता के हितों पर उसका ध्यान हीं नहीं रहता, अगर ध्यान रहता तो लोग भूखों क्यों मरते?  किसान आत्महत्या क्यों करते?  हमारे बेटों से कोई नौकरी के नाम पर चीटिंग क्यों करता?