अपनी बात

अपनी बात

ड्राइवर की सुझबूझ से धनबाद के पास तूफान एक्सप्रेस बर्निंग ट्रेन होने से बची

ड्राइवर विद्युत मंडल सह चालक अंकित कुमार की सुझबूझ के कारण धनबाद रेल मंडल में एक बहुत बड़ी दुर्घटना होते-होते बच गई। दरअसल हावड़ा-श्रीगंगानगर उद्यानआभा तूफान एक्सप्रेस की एसएलआर बॉगी में आग लग गई, जब वह थापरनगर केबिन से आगे की ओर निकली, चालक को जैसे ही आग लगने की सूचना मिली। उसने शीघ्रता से ट्रेन को रोककर, एसएलआर बॉगी को अलग किया और इस प्रकार तूफान एक्सप्रेस बर्निंग ट्रेन होने से बच गई

Read More
अपनी बात

कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के नाम पर कम से कम ईमानदारी बरतना जरुरी

अगर आज का प्रभात खबर आप देखें तो आपको प्रथम पृष्ठ देखते ही लगेगा कि प्रभात खबर ने क्रांति कर दी है, इस क्रांति में महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज्य की अवधारणा और डा. राम मनोहर लोहिया के अंतिम वंचित तबके को गांव में ही विकास की अवधारणा में परिभाषित करने के विचार को प्रवेश करा दिया गया हैं। बात सीएसआर इनिशिएटिव की हो रही है, सीएसआर इनिशिएटिव मतलब –

Read More
अपनी बात

प्रेस क्लब को जनसामान्य के बेटे-बेटियों की शादी के लिए भी अपना द्वार खोल देना चाहिए

जिन्हें भी अपने बेटे या बेटियों की शादी-विवाह समारोह संपन्न कराने के लिए स्थल की दिक्कतें आ रही हैं, वे रांची प्रेस क्लब में अपने बेटे या बेटियों की शादी संपन्न करा सकते हैं, शादी ही क्यों? मुंडन, चूड़ाकरण, बेटे-बेटी का इंगेजमेंट, डीजे का आनन्द या कोई पार्टी के लिए भी आप रांची प्रेस क्लब का इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि इसकी शुरुआत कल एक शादी समारोह से प्रारंभ हो चुकी हैं,

Read More
अपनी बात

अगर आप धनबाद जा रहे हैं, तो धनबाद जं. की बाहरी दिवारों पर नजर दौड़ाना मत भूलिये

धनबाद जंक्शन, जगमग कर रहा है। इसकी खुबसुरती इन दिनों बढ़ सी गई है, अगर आप धनबाद में हैं, तो धनबाद जंक्शन पर उकेरी गई, कलाकृतियों को देख, आप ये कहना नहीं भूलेंगे – अरे वाह धनबाद। धनबाद जंक्शन की इस खुबसुरती पर चार चांद लगा हैं, उसके बाहरी दीवारों पर की गई सोहराई पेंटिंग से और इस सोहराई पेंटिंग को मूर्त्तरुप दे रही हैं जयश्री इंदवार और उनकी टीम ने।

Read More
अपनी बात

सरकार और शिक्षकों के किये पाप, गरीब बच्चे भुगतेंगे, 9000 स्कूलों में लटकेगा ताला

एक समय था, सरकार स्कूल खोलती थी और आज सरकार स्कूल खोलती नहीं, बंद कराती हैं, क्योंकि देश में काफी बदलाव आया हैं। सरकार ने अब नई योजना बनाई हैं, जितना जल्द हो सके, स्कूलों को बंद करो, जो स्कूल बंद हो रहे हैं, वहां काम कर रहे लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट करो और स्कूलों में ताला लटका दो। ये कार्यक्रम जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां बड़ी तेजी से किया जा रहा हैं।

Read More
अपनी बात

काश मैं भी नीरव मोदी या विजय माल्या होता और इसका लाभ उठाता!

काश मैं भी नीरव मोदी या विजय माल्या होता, देश में ऐश करते हुए, अपने देश के लोगों को लूटता और फिर देश को चूना लगाकर विदेश में जाकर बसकर ऐश-मौज करता, पर क्या करुं, मेरे मां-बाप ने ऐसा करना नहीं सिखाया, इसमें मैं अपने मां-बाप को ही दोषी ठहराउंगा, आखिर उन्होंने ऐसा क्यों नहीं करना सिखाया? अगर सिखाया होता तो हम भी बम-बम हो गये होते।

Read More
अपनी बात

एक ही वर्ष में CM रघुवर दास के ‘मोमेंटम झारखण्ड’ की हवा निकल गई

17 फरवरी 2017, मुख्यमंत्री रघुवर दास का मोमेंटम झारखण्ड का अंतिम दिन। मुख्यमंत्री आह्लादित है, मुख्यमंत्री के हां में हां मिलानेवाले एक मंत्री को छोड़कर सारे मंत्री, अधिकारियों का दल, कनफूंकवों का समूह गद्गद हैं, उसे लग रहा है कि उन्होंने ऐसा काम कर दिया हैं, जो आज तक किसी ने किया ही नहीं, अब झारखण्ड में बेकारी, पलायन, भूखमरी, अशिक्षा, स्वास्थ्य की समस्या खत्म हो जायेगी।

Read More
अपनी बात

अहंकार में चूर CM ने भगवान शिव पर जलार्पण करने से किया इनकार

दुनिया में बहुत कम ही लोग हुए, जो सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने के बाद खुद को संभाल सकें, नहीं तो ज्यादातर लोग ऐसे निकले, जो सत्ता पाते ही, उसके मद में ऐसे चूर हुए, कि उन्हें सड़कों पर चलनेवाले सामान्य नागरिक कीड़े-मकोड़े की तरह नजर आने लगे और लगे हाथों ऐसे लोगों ने भगवान और उनके भक्तों का भी मजाक उड़ाना शुरु कर दिया।

Read More
अपनी बात

क्या झारखण्ड के CM 50 किलोमीटर की दूरी तय कर मैट्रिक परीक्षा देने गये थे?

क्या राज्य के मुख्यमंत्री या मानव संसाधन मंत्री या शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव या झारखण्ड एकेडमिक कौंसिल के उच्चाधिकारी मैट्रिक की परीक्षा देने के लिए पचास किलोमीटर की दूरी तय किये थे? या उनके बेटे-बेटियां या पोते-पोतियां या उनके रिश्तेदार पचास किलोमीटर की दूरी तय कर मैट्रिक की परीक्षा देने को तैयार हैं अगर नहीं तो फिर राजकीयकृत उच्च विद्यालय टाटीसिलवे के गरीब छात्र-छात्राओं पर इतना बड़ा जुल्म क्यों?

Read More
अपनी बात

गुंजन सिन्हा ने पत्रकारिता में लंबी लकीरें ही नहीं, इतिहास भी बनाया है

आज जो ईटीवी के बिहार या झारखण्ड कार्यालय में कार्यरत है, उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि गुंजन सिन्हा के कार्यकाल तक इस ईटीवी पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं था, साथ ही गुंजन सिन्हा का कार्यकाल स्वर्णिम काल था, उनके जाने के बाद जो लोग नये आये और उन्होंने कैसे ईटीवी को कबाड़ा बनाया और आज ईटीवी की क्या स्थिति है, यह किसी से छुपा नहीं हैं।

Read More