अपने ही बच्चों के हत्यारे मत बनिए, नवजात शिशुओं को फेंकिए नहीं, सौंप दीजिए…
14 नवंबर को जब एक और बाल दिवस बीत रहा होगा, हम उल्लास के लम्हों को बांट रहे होंगे, मगर उन आधी-अधूरी सांसों में बसी जिंदगियों को एक बार फिर भूल जाएंगे, जिन्हें पाला जा सकता था, नहीं पाला गया, बचाया जा सकता था, नहीं बचाया गया, जिन्हें दफनाया जा सकता था, नहीं दफनाया गया और अब जिन्हें याद किया जा सकता है, लेकिन उन्हें भुला दिया जाएगा।
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