झारखण्ड में सड़क जाम करनेवाले ही, सड़क जाम होने का रोना रोते हैं

बेटे या बेटी की जब भी शादी होगी तो वह सड़कों पर ही संपन्न होती हैं, जरा देखिये बेटे या बेटी वाले बारात को सड़क पर उतारकर घंटों नंगा नाच करेंगे, यही नहीं अब तो इन बारातों में अपने घर की महिलाओं को नचवाना भी फैशन हो गया हैं, ऐसे में सड़क जाम होगी ही। सड़क पर ही नमाज पढ़ना और अपनी शक्ति प्रदर्शित करना, की हम भी एक बहुत बड़ी ताकत में हैं, हमसे पंगा मत लेना, यह भी सड़कों पर ही संपन्न होता है, ऐसे में सड़क जाम होगी ही।

जिस राज्य में या जिस देश में बेवकूफों और गधों की संख्या अधिक हो जाती हैं, वहां सड़क जाम और सड़क दुर्घटना आम बात हो जाती हैं।

हमारे देश व राज्य में…

  • बेटे या बेटी की जब भी शादी होगी तो वह सड़कों पर ही संपन्न होती हैं, जरा देखिये बेटे या बेटी वाले बारात को सड़क पर उतारकर घंटों नंगा नाच करेंगे, यही नहीं अब तो इन बारातों में अपने घर की महिलाओं को नचवाना भी फैशन हो गया हैं, ऐसे में सड़क जाम होगी ही।
  • सड़क पर ही नमाज पढ़ना और अपनी शक्ति प्रदर्शित करना, की हम भी एक बहुत बड़ी ताकत में हैं, हमसे पंगा मत लेना, यह भी सड़कों पर ही संपन्न होता है, ऐसे में सड़क जाम होगी ही।
  • सड़क पर ही मंदिर, मजार, गिरजाघर बना देंगे, तो ऐसे में सड़क जाम होगी ही।
  • खाये या मत खाये, खाने की औकात रहे या न रहे पर चार चक्का लेकर रहेंगे, ऐसे में सड़क जाम होगी ही।
  • घर में खुद की रहने की जगह नहीं हो, पर चार चक्का खरीदेंगे और उसे सड़क पर ही रखेंगे, ऐसे में सड़क जाम होगी ही।
  • अगर किन्हीं कारणों से लाइन लंबी हो गई तो हम पंक्तिबद्ध नहीं होंगे, क्योंकि हमारी शान खराब हो जायेगी, इसलिए हम लंबी लाइन को छोड़ शार्ट कट का रास्ता अपनायेंगे और दूसरी ओर से आनेवाली सड़कों पर अपनी गाड़ी घुसा देंगे, ऐसे में सड़क जाम होगी ही।
  • अगर हम मोटरसाइकिल पर हैं, या कार ड्राइव कर रहे हैं या भाड़े की टैक्सी चला रहे हैं, पर यातायात नियमों को किसी भी हालत में नहीं मानेंगे, ऐसे में सड़क जाम होगी ही।
  • अगर हम पुलिस में हैं, प्रेस में हैं, आइएएस हैं, आइपीएस हैं, नेता हैं, मंत्री हैं, मुख्यमंत्री हैं तो कानून हमारी मुट्ठी में हैं, हम कानून से उपर हैं, हम कुछ भी कर सकते हैं, यातायात नियमों की धज्जियां उड़ायेंगे, ऐसे में सड़क जाम होगी ही।
  • हम नगर निगम में हैं, हम नगर विकास विभाग संभाल रहे हैं, पर आनेवाले भविष्य में सड़कों पर वाहन की वृद्धि कितनी होगी? जनसंख्या का दबाव सड़क पर कितना होगा? इस पर हम कार्य करेंगे नहीं, और बैठकर कुर्सी तोड़ेंगे, माल कमायेंगे, तो ऐसे में सड़क जाम होगी ही।

और जब ऐसे में सड़क जाम होगी तो कभी कोई, कभी कोई और उसके बाद हम भी कभी, इसी लाइन में सड़क पर ही इलाज कराते-कराते मरने को बाध्य होंगे।

इसमें किया ही क्या जा सकता है?  कहने का तात्पर्य है कि गड़बड़ियां करेंगे हम, तो भुगतना तो हमें ही पड़ेगा न।

Krishna Bihari Mishra

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