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आज ही के दिन दो साल पहले बलमदीना एक्का ने प्रभात खबर को धूल चटाया था

आज अमर शहीद परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की शहादत दिवस है। आज से दो साल पहले इनके शहादत दिवस पर रांची से प्रकाशित एक अखबार प्रभात खबर ने राजनीति करनी शुरु की थी, पर उसकी सारी राजनीति की हवा निकाल दी थी, परमवीर चक्र विजेता अलबर्ट एक्का की पत्नी बलमदीना एक्का ने, जब उन्होंने प्रभात खबर द्वारा दी जा रही कथित शहीदी मिट्टी को लेने से इनकार कर दिया था।

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एक साल हो गये, CM बताएं कि झारखण्ड देश का पहला कैशलेस राज्य किस दिन बना?

याद करिये, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा था, झारखण्ड को देश का पहला कैशलेस राज्य बनाना हैं, क्या मुख्यमंत्री रघुवर दास बता सकते है कि झारखण्ड देश का पहला कैशलेस राज्य कब और किस दिन बना? जनता जानना चाहती है। इन्हीं के एक मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा था कि कैशलेस योजना को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना उनका लक्ष्य है। क्या उन्होंने अपने लक्ष्य को पा लिया?  अगर लक्ष्य पा लिया तो वे दिन और तिथि बता दें, जनता जानना चाहती है।

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हेलिकॉप्टर नहीं मिलने के कारण जांच के लिए नहीं जानेवाली आराधना का विभाग बदला

हेलिकॉप्टर नहीं मिलने के कारण सीएम के आदेश का पालन नहीं करनेवाली आराधना पटनायक, सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को आज सचिव पेयजल एवं स्वच्छता विभाग झारखण्ड, रांची के पद पर योगदान करने का आदेश पारित कर दिया गया। आराधना पटनायक का स्थान अमरेन्द्र प्रताप सिंह लेंगे, उन्हें सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के पद पर योगदान करने को कहा गया है।

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अगर सिस्टम फेल है, तो कैसे सुधरेगा सिस्टम? कौन सुधारेगा सिस्टम?

संतोषी भूख से मर जाती है। किसान आत्महत्या कर रहे है। युवा भी आत्महत्या कर रहे है। आत्महत्या करनेवालों में युवतियां और महिलाएं भी शामिल है। एक पिता अपने छोटे से बच्चे के शव को कंधे पर लेकर ढोता हुआ श्मशान घाट तक पहुंच जाता है। एक लड़की का दुष्कर्म कर हत्या कर दी जाती है, बेचारा पिता मुख्यमंत्री से संवेदना के दो शब्द सुनने की इच्छा रखता है, पर उसे सीएम की डांट मिलती है।

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चेहरा देखकर आता है CM का बयान, पूरे राज्य में सिस्टम फेल, जनता सरकार से नाराज

याद करिये 31 अक्टूबर। एक फरियादी ने गुमला की छात्रा के अपहरण का मामला मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में सीएम के समक्ष सीधी बात कार्यक्रम में उठाया था। मुख्यमंत्री इस मामले में इतने आग बबूला हो गये, कि उन्होंने सीधे गुमला के एसपी से पूछ दिया कि आपको किसने आइपीएस बना दिया?  यहीं नहीं सुबह उसे खरी-खोटी सुनाई और शाम होते-होते सजा भी सुना दिया और उसे गुमला एसपी से हटाकर सीआइडी का एसपी बना दिया।

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रांची में सड़क जाम के नाम पर दहशत फैलाने की कोशिश, जनाक्रोश फैलने की संभावना

नाच न जाने आंगन टेढ़ा। जी हां, ये लोकोक्ति आप बचपन से सुनते आये होंगे। शायद इस लोकोक्ति को जमीन पर उतारने का फैसला झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अक्षरशः ले लिया हैं। उन्हें, उनके उच्चाधिकारियों और रांची के एक-दो अखबारों ने अपने दिव्य ज्ञान से ऐसे माया-जाल में फंसा लिया हैं, जैसे लगता हो, कि वे मुख्यमंत्री के सबसे बड़े शुभचिन्तक हैं।

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सड़क जाम – सीएम के इमेज को नष्ट करने की कहीं कोई सुनियोजित साजिश तो नहीं

रांची का अरगोरा चौक, दिन के 10 बजे, जहां जाम होने का सवाल ही नहीं उठता और वहां सड़क जाम हो जाय, ये बात कुछ पचती नहीं, जहां जाम होना चाहिए जैसे कर्बला चौक और वहां से गाड़ियां बिना किसी दिक्कत के आराम से निकलती चली जाये, ये भी बात कुछ पचती नहीं। सीएम का काफिला, एक नहीं, कई बार सड़क जाम में फंस जाये, ये बात कुछ पचती नहीं। आज हम जान-बूझकर दो से तीन बार रांची की सड़कों पर निकले,

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रांची प्रेस क्लब कोर कमेटी के मेंम्बरों की मनमानी के विरुद्ध मुकेश कल जायेंगे कोर्ट

रांची प्रेस क्लब की सदस्यता का विवाद थमता नहीं दीख रहा। राजनामा.कॉम के संपादक मुकेश भारतीय ने कहा है कि उन्होंने द रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष बलबीर दत्त तथा कोर कमेटी के सदस्य रजत कुमार गुप्ता को लिखित तौर पर सूचना दे दी है कि उन्हें रांची प्रेस क्लब का सदस्य न बनाकर उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित किया गया है, जो गलत है, ऐसे हालत में उनके पास अब एक ही विकल्प बचा है कि वे न्यायालय की शरण में जाये।

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यहां पे सब जाम-जाम हैं, झारखण्ड के सीएम हैरान हैं, रांची की सड़क जाम-जाम हैं

जब घर में लगी आग, तो चलो आग बुझाने के लिए कुएँ खोदे। पूरी राजधानी की जनता सड़क जाम से तबाह है। सड़क जाम से मुक्ति पाने के लिए, प्रतिदिन नये-नये तरीके ईजाद हो रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही। जब से मुख्यमंत्री स्वयं रोड जाम में फंसने लगे हैं, तो उनके अंदर दिव्यज्ञान का प्रार्दुभाव हुआ। प्रतिदिन सड़क जाम को लेकर बैठकों का जो दौर प्रारंभ हुआ।

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गांव न हो गया बच्चा हो गया, जिसको देखो वह उसे गोद लेने की ही बात कर रहा

गांव न हो गया कि एक बच्चा हो गया, जिसको देखों वह गांव गोद लेने को कह रहा हैं। जी हां, एक बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सासंदों को एक – एक गांव गोद लेने को क्या कह दिया, अब सीएम रघुवर दास भी ये कहने लगे कि हर अधिकारी एक गांव को गोद ले लें। भाई, क्या अधिकारियों को अब कोई काम नहीं रह गया, अब वे एक गांव गोद लेंगे, तब जाकर गांव का विकास होगा?

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