जय गुरु। पहली बार रांची मेरा पदार्पण 4 जून 1985 को हुआ था, क्योंकि 5 जून को मेरी शादी रांची में थी। मेरी पत्नी उस वक्त योगदा सत्संग विद्यालय की नौंवी कक्षा की छात्रा थी, उनके हाथों में कई बार योगी कथामृत मैंने देखा था, पर कभी पढ़ नहीं सका। उसी समय से कभी कभार योगदा सत्संग आश्रम में आना – जाना लगा रहा, कभी योगदा सत्संग द्वारा चलाये जा रहे औषधालय गया तो कभी योगदा सत्संग द्वारा चलाये जा रहे मोतियाबिंद के आपरेशन में शामिल हुआ।

बहुत दिनों के बाद खिलौने बेचनेवाला, बहुत सारे गुब्बारों और उससे बने कई आकृतियों को लेकर अपने मुहल्ले में आया था। उसकी निगाहें सिर्फ और सिर्फ बच्चों को ढूंढ रही थी, क्योंकि उसका व्यापार बच्चों की चाहत पर ही तो टिका था। वह एक बांसुरी अपने होठों में लिए कुछ ध्वनि निकाल रहा था, संदेश साफ था कि बच्चे उसके बांसुरी से निकले ध्वनियों को सुने और घर के बाहर निकले।

जहां भी रहो, जैसे भी रहो। देश की सेवा करते रहो। वे लोग बहुत भाग्यशाली है। जो जिस हाल में हैं, पर देश-सेवा से कभी विमुख नहीं होते हैं। देश-सेवा भाग्यशालियों को ही प्राप्त होता हैं, सभी को यह मौका नहीं मिलता। अब आओ कुछ बात करें। बहुत दिनों से तुम लोगों से बातचीत नहीं हो पा रही थी। सोचा, आज मन भर बात करुंगा। एक बात और मेरी बातों को ध्यान से पढ़ना, ये जरुरी भी है। आज मैं तुम्हें ‘आशीर्वाद’ की ताकत के बारे में बताउंगा।

तुम जो चाहते हो, वह प्राप्त होता है, पर ये तुम्हें निश्चय करना हैं कि वह चीज जो तुम प्राप्त करना चाहते हो, कैसे प्राप्त करना चाहते हो? असत्य का मार्ग अपनाकर, या सत्य का मार्ग अपनाकर, अगर तुम्हे कोई कष्ट होता है या दर्द का अनुभव होता है तो समझो तुम पर ईश्वर बहुत प्यार लूटा रहा है, वह तुम्हारे साथ है, क्योंकि जिन्हें ईश्वर सुख प्रदान करता है, उससे ईश्वर बहुत दूर चला जाता है।

जरा सोचिये, आप या आपके परिवार का कोई सदस्य गंभीर बीमारी से ग्रस्त हो, और उसकी बीमारी को ठीक करने के लिए ऑपरेशन की तुरंत आवश्यकता हो, और डाक्टर ऑपरेशन की तारीख पांच साल बाद की सुनिश्चित करें, तो आपको कैसा लगेगा? यह मैं इसलिए लिख रहा हूं कि ठीक इसी प्रकार का एक मामला दिल्ली एम्स में मिला है, जहां एक बच्ची के ऑपरेशन की तिथि 2023 में दे दी गई है।

बहुत दिन हो गये, तुमलोगों से खुलकर बात नहीं हुई, आज मैंने सोचा कि तुमलोगों से बातचीत की जाय। तुम जहां भी हो, और जिस प्रकार ईमानदारी से अपने कार्य के प्रति समर्पित हो, यह देखकर हमें बड़ी प्रसन्नता होती हैं। प्रसन्नता इस बात को लेकर भी होती है, कि तुमलोग जहां भी रहते हो, एक दिन भी ऐसा नहीं हुआ कि जिस दिन तुमलोग हमें याद नहीं किये हो, यह मेरे लिए ईश्वरीय कृपा है।

बहुत दिनों की बात हैं, चंपक नामक लोकतांत्रिक वन में एक लुप्तेन्द्र नामक सियार रहा करता था, उसकी दिली इच्छा थी कि वह चंपक वन का राजा बने तथा वर्षों तक शासन करता रहे। लुप्तेन्द्र में वाकपटुता थी ही, वह जहां भी भाषण देता।

बहुत दिनों से तुमलोगों से किसी गंभीर विषय को लेकर बात नहीं हुई, सोचता हूं समय भी है और हमारे देश के एक महान आध्यात्मिक पुरुष स्वामी विवेकानन्द का जन्मदिवस भी है, ऐसे में क्यों न तुमलोगों से अपने मन की बात कह दूं। स्वामी विवेकानन्द ने कहा था क्या भारत समाप्त हो जायेगा?  अगर हां तो, दुनिया से आध्यात्मिकता समाप्त हो जायेगी, सब नैतिक पूर्णताओं का अवसान हो जायेगा।

मेरे प्यारे बच्चों,
तुम लोगों से मोबाइल पर बातचीत हो जाती है, तो आनन्द आ जाता है। मैं जानता हूं कि तुम विपरीत परिस्थितियों में सीमा पर तैनात हो, फिर भी हमें हंसाने और खुश रखने के लिए हंसकर-मुस्कुराकर बातें करते हो।

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