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65 साल की मित्रता, प्रिय मित्र अटल को भूल पाना, आडवाणी के लिए इतना आसां नहीं

अटल बिहारी वाजपेयी के महाप्रयाण के बाद, ऐसे तो पूरा देश गमगीन है, पर भाजपा के वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवाणी शायद ही ये गहरा सदमा झेल पाएं, क्योंकि दुनिया जानती है कि लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच कैसी मित्रता थी? 65 साल पुरानी आडवाणी और वाजपेयी की मित्रता, अटल जी के महाप्रयाण की खबर आते ही सदा के लिए टूट चुकी है,

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बिहारी बाबू तो सिर्फ बिहारी है और मैं तो नहीं टलनेवाला बिहारी यानी अटल बिहारी हूं

वो ऐसा बिहारी था, जो टलता ही नहीं था, जहां खड़ा हो गया, अटल रहता था, तभी तो लोग उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी कहकर पुकारा करते, देश में जब भी भाषण की बात आयेगी, अटल बिहारी वाजपेयी देश के अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों में शीर्ष पर होंगे, क्योंकि उनके जैसी भाषण कला में निपुणता, किसी को हासिल नहीं थी,

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जैसे-जैसे साल बदलता चला गया, आजादी के जश्न मनाने का जोश भी काफूर होता…

बात उन दिनों की है, जब मैं आकाशवाणी पटना के युववाणी एकांश में आकस्मिक उद्घोषक के रुप में कार्यरत था। उस वक्त हमारे कार्यक्रम अधिशाषी रमा शंकर थे। उन्होंने ‘घूमता माइक्रोफोन’ के लिए भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर लोगों की राय मंगवाई, जो स्वतंत्रता दिवस को लेकर, लोगों के बदलते दृष्टिकोण से संबंधित था।

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बेहतर जिंदगी मामले में झारखण्ड के शहर टॉप 10 तो दूर, टॉप 50 में भी नहीं…

शर्मनाक, देश में बेहतर ढंग से जीवन जीने के लिहाज से सबसे अच्छे 111 शहरों में झारखण्ड के शहर टॉप 10 तो दूर, टॉप 50 में भी नहीं हैं। केन्द्रीय शहरी मामलों के मंत्रालय ने जीवन सुगमता सूचकांक की सूची आज जारी करते हुए बताया है कि रांची का इस लिस्ट में 68 वां स्थान है, जबकि धनबाद 71वें स्थान पर हैं।

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धूर्त देश चला रहा, पत्रकार-नेता बेटियों की इज्जत लूट रहा, अपना देश बदल रहा…

अपना देश बदल रहा है… धूर्तों का समूह देश चला रहे… पत्रकार-नेता, बेटियों की इज्जत लूट रहे… नीरव-चौकसी-माल्या जैसों का चल पड़ा हैं… अपना देश बदल रहा है… देश की जनता भूख-भूख चिल्ला रही… पीएम धन-कूबेरों की सिर्फ सुन रहा है… कौन कहता है कि देश नहीं बदल रहा है… अपना देश बदल रहा है…

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CM बताएं, क्या PM नरेन्द्र मोदी की तुलना भगवान बिरसा मुंडा से की जा सकती है?

हद हो गई, भला भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू या तिलका मांझी जैसे महापुरुषों से पीएम नरेन्द्र मोदी की तुलना की जा सकती हैं। उत्तर होगा – कभी नहीं, और न ही यहां का आदिवासी समुदाय या सामान्य जन, ऐसे वीर महापुरुषों से किसी भी वर्तमान राजनीतिक दलों के नेताओं से तुलना करना चाहेगा, पर झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास की नजरों में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बिल्कुल भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हु या तिलका मांझी जैसे महापुरुष हैं।

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ऐसे-ऐसे कई उप सभापति आए और गये, लोग उन्हें जानते तक नहीं, समझे भाई लोग

भाई, एक अखबार में कभी प्रधान संपादक के रुप में काम करनेवाला व्यक्ति राज्यसभा का उपसभापति बनता है तो वह अखबार बिहार और झारखण्ड से निकलनेवाले अपने सभी अखबारों में प्रथम पृष्ठ पर लिखता है कि ‘प्रभात खबर के हरिवंश बने उपसभापति बिहार व झारखण्ड को गर्व’ और बंगाल में लिखता है

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झारखण्ड में विकास का पोल खुला, उड़ता हाथी जमीन पर धड़ाम से आ गिरा

झारखण्ड में एक-एक कर विकास की पोल खुल रही है, खुद भाजपा सांसद उनके द्वारा उठाए जा रहे कदमों की कड़ी आलोचना कर रहे हैं, पर अब भी सीएम रघुवर दास के कानों पर जूं नहीं रेंग रही हैं, वे आज भी अपने रंग-बिरंगे हाथी को उड़ाने से बाज नहीं आ रहे, सच्चाई यह है कि उनका ये रंग-बिरंगा हाथी कब का ‘टे’ बोल चुका है, फिर भी विकास की हवाबाजी कम होने का नाम यहां नहीं ले रहा।

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हम नहीं सुधरेंगे के तर्ज पर काम कर रहे हैं धनबाद के आरपीएफ के जवान

ये है पूर्व मध्य रेलवे का सर्वोत्तम और सर्वाधिक राजस्व देनेवाला धनबाद जंक्शन, जरा देखिये यहां रेलवे सुरक्षा बल किस प्रकार अपनी ड्यूटी पर तैनात है, यहीं नहीं, आप यह भी देखिये कि रेलवे सुरक्षा बल द्वारा बनाया गया महिला सहायता बूथ का क्या हाल हैं? धनबाद के वरिष्ठ समाजसेवी महेन्द्र भगानिया ने अपने मोबाइल से इस दृश्य को कैद किया है, दिन आज ही का हैं

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विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासियों को ही भूल गये CM रघुवर दास और राज्यपाल

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखण्ड के आदिवासियों का अपमान कर दिया, वे राज्य के आदिवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देना पूरी तरह भूल गये, जबकि प्रत्येक साल उनकी ओर से विभिन्न अखबारों व चैनलों के माध्यम से राज्य के आदिवासियों को, बधाई और शुभकामनाएं विशेष तौर पर दिया जाता था,

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