CM बताएं, क्या PM नरेन्द्र मोदी की तुलना भगवान बिरसा मुंडा से की जा सकती है?

हद हो गई, भला भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू या तिलका मांझी जैसे महापुरुषों से पीएम नरेन्द्र मोदी की तुलना की जा सकती हैं। उत्तर होगा – कभी नहीं, और न ही यहां का आदिवासी समुदाय या सामान्य जन, ऐसे वीर महापुरुषों से किसी भी वर्तमान राजनीतिक दलों के नेताओं से तुलना करना चाहेगा, पर झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास की नजरों में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बिल्कुल भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हु या तिलका मांझी जैसे महापुरुष हैं।

हद हो गई, भला भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू या तिलका मांझी जैसे महापुरुषों से पीएम नरेन्द्र मोदी की तुलना की जा सकती हैं। उत्तर होगा – कभी नहीं, और न ही यहां का आदिवासी समुदाय या सामान्य जन, ऐसे वीर महापुरुषों से किसी भी वर्तमान राजनीतिक दलों के नेताओं से तुलना करना चाहेगा, पर झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास की नजरों में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, बिल्कुल भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हु या तिलका मांझी जैसे महापुरुष हैं।

दरअसल कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री रांची के स्थानीय न्यूक्लियस मॉल में पीएम नरेन्द्र मोदी के जीवन पर बनी 35 मिनट की फिल्म ‘चलो जीते है’ देखने गये थे। फिल्म देखने के बाद जब वे मीडिया से मुखातिब हुए, तो वे बहुत ही भावुक हो गये, और कहा कि फिल्म हमें बताती है कि हमें अपने लिए नहीं, दूसरों के लिए जीना है।

पूरे देश में भाजपा के प्रति सॉफ्ट कार्नर रखनेवाली अखबार ‘दैनिक जागरण’ ने सीएम के बयान को विस्तार से छापा है, जिसमें सीएम रघुवर दास ने आगे कहा है कि झारखण्ड में भी कई ऐसे महापुरुष हुए हैं। भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, तिलका मांझी समेत अन्य ने भी अंग्रेजों से लोहा लिया। ऐसे अनेक महापुरुषों ने भारत में जन्म लिया। ऐसे ही महापुरुष नरेन्द्र मोदी है, जो अपने लिए नहीं, देश के करोड़ों गरीबों के लिए जीते हैं। उनकी प्रेरणा आत्मसात करनेवाली है।

कमाल है, आपके नेता, आप उनकी खुब बड़ाई करें, उनके चरणों में लोट जाये, कोई दिक्कत नहीं, पर भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, तिलका मांझी से नरेन्द्र मोदी की तुलना करना, उनके समक्ष बैठा देना, क्या ये गलत नहीं? क्या यहां का आदिवासी या सामान्य जन, मुख्यमंत्री रघुवर दास के बयान को स्वीकार करेगा? सवाल यह हैं।

आश्चर्य इस बात की है, कि एक समय था, जब भारतीय जनता पार्टी में चमचई का कोई स्थान नहीं था, जो लोग चमचागिरी करते थे, पार्टी उनको साइड लाइन थमा देती थी, पर अब एक नई परम्परा की शुरुआत भाजपा में हुई हैं, उपर से लेकर, नीचे तक ठकुरसोहाती प्रारम्भ हैं, ऐसे में जब पार्टी में जातिवाद की लहर चल पड़ी हो, तो पीएम नरेन्द्र मोदी को किसी से भी तुलना करने मे क्या जाता है, वह भी तब जब आप राज्य के सर्वोच्च सिंहासन पर बैठे हो, अब सवाल झारखण्ड की जनता से भी कि क्या आप मानते है कि आपके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू या तिलका मांझी के सदृश हैं।

Krishna Bihari Mishra

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