विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासियों को ही भूल गये CM रघुवर दास और राज्यपाल

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखण्ड के आदिवासियों का अपमान कर दिया, वे राज्य के आदिवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देना पूरी तरह भूल गये, जबकि प्रत्येक साल उनकी ओर से विभिन्न अखबारों व चैनलों के माध्यम से राज्य के आदिवासियों को, बधाई और शुभकामनाएं विशेष तौर पर दिया जाता था,

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखण्ड के आदिवासियों का अपमान कर दिया, वे राज्य के आदिवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देना पूरी तरह भूल गये, जबकि प्रत्येक साल उनकी ओर से विभिन्न अखबारों व चैनलों के माध्यम से राज्य के आदिवासियों को, बधाई और शुभकामनाएं विशेष तौर पर दिया जाता था, साथ ही सरकार की ओर से विशेष कार्यक्रम भी कभी-कभार आयोजित किये जाते थे, जिससे लोगों को लगता था कि राज्य सरकार उनके साथ हैं, पर इस बार न तो अखबारों में और न ही चैनलों में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखण्ड के आदिवासियों को मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा बधाई संदेश दिया गया।

आश्चर्य इस बात की भी हैं कि राज्यपाल द्रोपदी मुर्मू की ओर से भी इस अवसर पर बधाई व शुभकामनाएं संदेश नहीं देखा गया, चूंकि पू्र्व मेें एक-दो बार देखा गया कि जो भी बधाई व शुभकामनाएं संदेश अखबारों-चैनलों में प्रसारित-प्रकाशित किये जाते थे, वे संयुक्त रुप से हुआ करते थे, पर चूंकि इस बार कल्याण विभाग ने विश्व आदिवासी दिवस पर विज्ञापन ही प्रसारित नहीं किया, ऐसे में द्रौपदी मुर्मू भी राज्य के आदिवासियों को बधाई व शुभकामनाएं देने से वंचित रह गई, हालांकि 2017 में कल्याण विभाग ने राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को स्थान ही नहीं दिया था।

हम आपको बता दें कि इस राज्य का गठन ही आदिवासियों के कल्याण और उनके सम्मान को लेकर हुआ था, पर जब राज्य का मुख्यमंत्री ही, ऐसे मौके पर आदिवासियों को बधाई-संदेश देना भूल जाये तो आदिवासियों की ओर से अंगूली उठना लाजिमी है, जिसका जवाब सरकार के पास नहीं हैं, हम आपको बता दें कि ऐसे कई प्रमाण है कि यह सरकार प्रतिवर्ष विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर अखबारों व चैनलों के माध्यम से आदिवासियों को बधाई व शुभकामनाएं देती थी, पर इस बार ऐसा नहीं किया, ऐसा क्यों नहीं किया? इसका जवाब सरकार के पास नहीं हैं।

राज्य के आदिवासियों को लगता है कि यह आदिवासियों को चित्त से हटाने की एक सुनियोजित साजिश चल रही है, जिसका रहस्योद्घाटन आज हो गया, सरकार और उसके लोग, आदिवासियों को बधाई-शुभकामनाएं देना भूल गये, जबकि राज्य के कई अखबारों ने विश्व आदिवासी दिवस की महत्ता को समझा हैं तथा आज के दिन किसी ने दो तो किसी ने एक ही पृष्ठ आदिवासियों को समर्पित कर, आदिवासियों को सम्मान देने की कोशिश की।

इधर आज झारखण्ड की राजधानी रांची में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय की ओर से पदयात्रा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये, जिसमें रांची के प्रबुद्ध नागरिकों ने भाग लिया और राज्य के सभी आदिवासियों को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं प्रदान की, हम आपको बता दें कि पूरे राज्य में आदिवासियों का समूह, विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से आज के दिन को, विशेष दिन के रुप में मना रहा है, जबकि कई गण्यमान्यों ने सरकार के इस हरकत की कड़ी आलोचना की हैं।

Krishna Bihari Mishra

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