बिहारी बाबू तो सिर्फ बिहारी है और मैं तो नहीं टलनेवाला बिहारी यानी अटल बिहारी हूं

वो ऐसा बिहारी था, जो टलता ही नहीं था, जहां खड़ा हो गया, अटल रहता था, तभी तो लोग उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी कहकर पुकारा करते, देश में जब भी भाषण की बात आयेगी, अटल बिहारी वाजपेयी देश के अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों में शीर्ष पर होंगे, क्योंकि उनके जैसी भाषण कला में निपुणता, किसी को हासिल नहीं थी,

वो ऐसा बिहारी था, जो टलता ही नहीं था, जहां खड़ा हो गया, अटल रहता था, तभी तो लोग उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी कहकर पुकारा करते, देश में जब भी भाषण की बात आयेगी, अटल बिहारी वाजपेयी देश के अब तक के सभी प्रधानमंत्रियों में शीर्ष पर होंगे, क्योंकि उनके जैसी भाषण कला में निपुणता, किसी को हासिल नहीं थी, कभी देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु भी उनके भाषण कला के मुरीद थे, तभी तो उन्होंने कभी कहा था कि आनेवाले समय में अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री होंगे, और उनकी बात अक्षरशः साबित भी हुई।

देश में अटल बिहारी वाजपेयी ही एकमात्र नेता हुए जो घोर सांप्रदायिक पार्टी कही जानेवाली भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के बावजूद, विपक्षी पार्टियों में भी उतने ही लोकप्रिय थे, जितने भाजपा में। उनकी भाषण देने की कला ऐसी थी, कि जो भी उनकी एक बार भाषण सुन लेता, बस उनका मुरीद हो जाता, और जहां भी उसे पता चलता कि अटल बिहारी वाजपेयी का भाषण होने जा रहा हैं, लोग बिना उनके भाषण सुने नहीं रह पाते।

उनकी भाषण की विशेषता यह रहती कि वे किसी भी बातों को कहानी और कविताओं के माध्यम से जनता के बीच रख दिया करते, और जनता उनकी इसी कला के आगे नतमस्तक हो जाया करती। उनकी देशभक्ति पर तो कोई सवाल ही नहीं उठा सकता था, एक समय जब कोई विपक्षी दल का नेता, अपने देश की समस्याओं को लेकर, देश का पक्ष रखने को संयुक्त राष्ट्र संघ में तैयार नहीं होता था, अटल बिहारी वाजपेयी ने यह भी स्वीकार किया और संयुक्त राष्ट्र संघ में देश का प्रतिनिधित्व कर पाकिस्तान की धज्जियां उड़ा दी, और कश्मीर पर भारत का मजबूती से पक्ष रखा, ये अटल बिहारी वाजपेयी के जादूई भाषण का कमाल था।

हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि देश के प्रथम व्यक्ति अटल बिहारी वाजपेयी हुए, जिन्होंने हिन्दी में संयुक्त राष्ट्र संघ में भाषण देकर हिन्दी और भारतीयों का मान बढ़ाया। पहली बार जब विदेश मंत्री बने तब उन्होंने पाकिस्तान और चीन के साथ बेहतर संबंध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जब प्रधानमंत्री बने तब पहली बार विभिन्न दलों के गठबंधन सरकार को चलाकर देश को एक नया संदेश दिया कि विभिन्न विचारधाराओं वाली पार्टियों को एक साथ ले चलकर भी देश को एक नई दिशा दी जा सकती है।

हमें याद हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी तो ऐसे देश में सर्वाधिक लोकप्रिय थे और लोकप्रिय रहेंगे, पर बिहार की राजधानी पटना में उनका एक बार दिया गया भाषण, बिहारवासियों को हमेशा याद रहेगा, जब उन्होंने खुद को अन्य बिहारियों से बेहतर बिहारी यानी अटल बिहारी बताया था। दरअसल लोकसभा चुनाव का समय था। पटना से भाजपा के टिकट पर स्व. शैलेन्द्र नाथ श्रीवास्तव चुनाव लड़ रहे थे, गांधी मैदान में पहली बार सुप्रसिद्ध अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा यानी बिहारी बाबू मंच पर पहुंच चुके थे, उनके चाहनेवाले एक झलक देखने के लिए बेकाबू हो रहे थे, तभी एनाउँस हुआ कि अटल बिहारी वाजपेयी मंच पर आ चुके है। मंच पर आते ही, अटल जी ने सभी जनमानस का अभिनन्दन किया और फिर उन्होंने भाषण प्रारम्भ किया।

इसी भाषण के दौरान उन्होंने जो बाते कहीं, वह यादगार साबित हुई, उन्होंने कहा कि ‘मैं देख रहा हूं, पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जो यहां भारी जनसैलाब उमड़ी हैं, वो बिहारी बाबू की एक झलक पाने के लिए उमड़ी हैं, पर बिहारी बाबू ये नहीं समझ ले कि केवल उन्हें ही देखने के लिए ये जनसैलाब उमड़ी हैं, भीड़ आई है, क्योंकि वे तो सिर्फ ‘बिहारी’ हैं और यहां तो ‘अटल बिहारी’ खड़ा है।’ अटल बिहारी वाजपेयी का यह संवाद आज भी बिहारियों के कानों में गूंजता हैं तो प्रत्येक बिहारी खुद को अटल बिहारी वाजपेयी से जोड़कर गौरवान्वित महसूस करता है।

Krishna Bihari Mishra

Next Post

65 साल की मित्रता, प्रिय मित्र अटल को भूल पाना, आडवाणी के लिए इतना आसां नहीं

Fri Aug 17 , 2018
अटल बिहारी वाजपेयी के महाप्रयाण के बाद, ऐसे तो पूरा देश गमगीन है, पर भाजपा के वरिष्ठतम नेता लालकृष्ण आडवाणी शायद ही ये गहरा सदमा झेल पाएं, क्योंकि दुनिया जानती है कि लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच कैसी मित्रता थी? 65 साल पुरानी आडवाणी और वाजपेयी की मित्रता, अटल जी के महाप्रयाण की खबर आते ही सदा के लिए टूट चुकी है,

You May Like

Breaking News