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पहली बार झारखण्ड के किसी नेता ने वर्तमान पत्रकारों और उनकी पत्रकारिता की खूलेआम धज्जियां उड़ाई

पहली बार राज्य के किसी प्रमुख नेता ने देश व राज्य में चल रही पत्रकारिता पर अपना पक्ष रखा है। ये कोई सामान्य नेता नहीं, बल्कि झारखण्ड के ऐतिहासिक पुरुष यानी प्रथम मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी है, उन्होंने अपने सोशल साइट के माध्यम से जोरदार शब्दों में अपनी बात रखी है, जो किसी नेता में हिम्मत नहीं कि आज की स्थितियों को देखकर कह दें।

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‘आजसू’ मतलब दूल्हों के भी तरफ से चाची और दुल्हिनियों के भी तरफ से भी चाची

आजसू के नेता पता नहीं खुद को क्या समझते है, उन्हें लगता है कि झारखण्ड की जनता महाबेवकूफ है, वे उन्हें जैसे चाहे वैसे नचा देंगे, हालांकि इसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ रहा है। हाल ही में हुए विधानसभा उप चुनाव में ये गोमिया से भी हारे और सिल्ली से उनके सुप्रीमो यानी सुदेश महतो भी दुबारा विधानसभा का चुनाव हार गये,

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वाह री भाजपा, अटल के नाम पर यात्रा और विज्ञापन से अटल ही गायब…

छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह ने अटल विकास यात्रा की शुरुआत कर दी है। इस यात्रा का शुभारम्भ 5 सितम्बर को डोंगरगढ़ के कुर्रुभाट के प्रज्ञागिरी मैदान से हुआ। जहां की सभा में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी पधारें। इस कार्यक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई ने सभी अखबारों में एक-एक पृष्ठ का मुखपृष्ठ पर विज्ञापन छपवाया,

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भाजपा के हिन्दुत्व को ठिकाने लगाने में लगे कांग्रेसी, राहुल को बताया असली ब्राह्मण एवं शिवभक्त

इधर पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस पार्टी के लोगों को हिन्दुत्व खुब रास आने लगा  हैं। पूर्व में कहीं अल्पसंख्यक न बिदक जाये, तुष्टिकरण को ही सब कुछ मानकर चलनेवाली, कांग्रेस को आजकल ब्राह्मण बहुत प्रिय लगने लगे हैं, उनके दिलों में गोभक्ति भी उड़ेल मार रही हैं और रही बात कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की कैलाश मानसरोवर यात्रा की,

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सभी के दिलों पर राज करनेवाले भाजपा कार्यकर्ता गामा सिंह सभी को छोड़कर चल दिये

आज रांची का एक-एक भाजपा कार्यकर्ता दुखी हैं, भाजपा कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि वे लोग भी दुखी हैं, जो गामा सिंह को जानते थे। गामा सिंह भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता थे, चाहे वे महत्वपूर्ण पद पर रहे या न रहे, दोनों अवस्थाओं में पार्टी के लिए व पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए समर्पित रहनेवाले व्यक्तित्व का नाम था – गामा सिंह।

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क्या झारखण्ड इसीलिए बना था कि आदिवासी महिलाएं किसी के पैरों पर गिरकर आंसू बहांयेगी?

साहेब चीन गये हैं। वहां जाकर शंघाई टावर देखेंगे और रांची में वैसा ही टावर आकर बनवायेंगे, जिसके बनते ही सारा समस्या छू मंतर हो जायेगा। इधर झारखण्ड के अखबारों व अन्य मीडिया को लंद-फंद न्यूज चलाने/छापने से फुर्सत नहीं हैं, ऐसे में इन्हें फुर्सत कहां कि वे गोड्डा के माली गंगटी गांवों के आदिवासियों के दर्द को अपने चैनल या अखबारों में जगह दे पाये।

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रांची को रहनेलायक नहीं छोड़ा, और जनाब शंघाई टावर के तर्ज पर टावर बनायेंगे?

एक लोकोक्ति हैं,  हसुआं के ब्याह में खुरपी के गीत। लोगों को जरुरत हैं मकान की, लोगों को जरुरत हैं सड़क जाम से मुक्ति की, लोगों को जरुरत हैं बिजली की, पानी की, लोगों को जरुरत हैं बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की, बेहतर शिक्षा की और जनाब ये सारा कुछ छोड़कर रांची में शंघाई टावर के तर्ज पर एक टावर बनाने की सोच रहे हैं?

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धनबादः पहले ट्रेनें छीनीं, अब बिजली-पानी भी छीन ली, जनता ने कहा, क्या हम जीना छोड़ दें?

जब सरकार बेशर्म होती हैं, तो लोग बिजली एवं पानी के लिए इसी तरह तरसते हैं। पूरा कोयलाचंल बिजली और पानी के लिए छटपटा रहा हैं, पर रघुवर सरकार को शायद इनकी व्यथा सुनाई नहीं दे रही। जनता और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर गये, पर राज्य सरकार को इसकी कोई सुध नहीं, भाजपा और उनके स्थानीय नेता-कार्यकर्ता घरों में दुबके हैं,

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रांची रेलवे कॉलोनी की सड़कें बदहाल, रेलवे के वरीय अधिकारियों को इससे कोई मतलब नहीं

रांची जंक्शन के दक्षिण में हैं रेलवे कॉलोनी, जहां बड़ी संख्या में रेलवे में कार्य करनेवाले टीटीई, स्टेशन मास्टर, गार्ड, व फोर्थ ग्रेड के रेलवे कर्मचारियों का परिवार रहता हैं, पर सच्चाई यह है कि ये सारे रेलवे कर्मचारियों के परिवारों की जिन्दगी नरकमय बनी हुई हैं, उनकी ओर देखने की फुर्सत किसी को भी नहीं।

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पत्रकार या नमूना, ईटीवी भारत के प्रवीण बागी ने एक हत्या को प्राकृतिक न्याय बता दिया

जब नमूना ‘पत्रकार’ बनता है, तो ऐसे ही विचार आते हैं। कल उत्तर बिहार में एक बहुत बड़ी घटना घट गई। सीतामढ़ी कोर्ट में एक कुख्यात अपराधी संतोष झा की, कुछ अपराधियों ने मिलकर हत्या कर दी। इस हत्या का समाचार सुनते ही समाज के कई वर्गों ने राहत की सांस ली। बताया जाता है कि संतोष झा उत्तर बिहार में आतंक का पर्याय बन चुका था।

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