ऐसे होते हैं शिक्षक, ऐसे होते हैं न्यायाधीश और ऐसी होती हैं IAS की पत्नियां, जो दूसरों के…
शनिवार की रात कोई आभास नहीं था। बस मन उचाट था। क्यों, पता नहीं। तब मैंने अपनी प्रकृति के विपरीत लिखा था – ‘जी में है पतवार अब लहरों में डाल दूँ।’ लेकिन शायद उसके पीछे एक खबर थी जो मुझ तक पहुंची नहीं थी। आज पहुंची – मेरे अभिन्न मित्र श्री रंजन खान की पत्नी पुष्पा उस रात चिरंतन लहरों में चली गईं। मैं महसूस कर रहा हूँ, जीवन-वृक्ष के वे पत्ते जो कभी हरे थे, जिनसे मेरी पुरानी पहचान थी, एक एक कर पीले हो रहे हैं,
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