अपनी बात

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दिल्ली से प्रकाशित अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने भी अब स्वीकार किया कि कश्मीर पाकिस्तान का अंग

आप अगर भारतीय है, भारत के किसी भी नगर में हैं या भारत से बाहर। आप आज का ‘हिन्दुस्तान’ अखबार उठाइये, संपादकीय पृष्ठ पर नजर दौड़ाइये। उस संपादकीय पृष्ठ पर वरिष्ठ साहित्यकार रामचंद्र गुहा का एक आर्टिकल है, जिसका हेडिंग है – पाकिस्तान से पहले के जिन्ना और इसी आर्टिकल पर एक नीचे में जिन्ना और पाकिस्तान के मानचित्र को किसी नितेश चौधरी ने चित्रांकित किया है।

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लानत है, आपकी सोच पर निशिकांत दूबे, आप पहले कृष्ण को समझे, तब उनका दृष्टांत दें

गोड्डा के सांसद निशिकांत दूबे, आप किसको लानत भेज रहे हो, लानत तो आपको आनी चाहिए, पहले आप बताओ कि अगर आप सही थे, तो बार-बार अपना पोस्ट क्यों अपडेट करते रहे? इसका मतलब है कि आपको लगा कि कहीं न कहीं गड़बड़ियां हुई हैं? आप कहते हो कि ‘पैर धोना तो झारखण्ड में अतिथि के लिए होता है’, सही है यह अतिथि के लिए होता है, पर आप बताओ,

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अटल जी के नाम पर काव्यांजलि, नहीं जूटे भाजपा कार्यकर्ता, खाली-खाली रहा रिम्स ऑडिटोरियम

झारखण्ड भाजपा ने आज कुछ विधानसभा क्षेत्रों में आज के दिन एक बार फिर दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी को भुनाने की कोशिश की। नाम रखा था – काव्याजंलि, यानी कविताओं के माध्यम से अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने की कवायद। भाजपा के लोग बताते है कि यह कार्यक्रम तीन विधानसभा क्षेत्रों में रखा गया था। एक हटिया, दूसरी रांची और तीसरी कांके विधानसभा में।

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शर्मनाक, भाजपा कार्यकर्ता निशिकांत का पैर धोकर, जल पी गया, पर सांसद ने उसे रोका नहीं

ये निशिकांत दूबे है, ये गोड्डा से सांसद है, इन्हें हाल ही में सर्वश्रेष्ठ सांसद का खिताब भी मिलनेवाला हैं, क्योंकि घोषणा हो चुकी है, जरा देखिये इस व्यक्ति को कैसे अपने फेसबुक पर गर्व से फोटो डालकर ये घोषणा कर रहा है कि ‘आज मैं अपने आप को बहुत छोटा कार्यकर्ता समझ रहा हूं, भाजपा के महान कार्यकर्ता पवन साह जी ने पुल की खुशी में हजारों के सामने पैर धोया व उसको अपने वादे पुल की खुशी में पिया।’

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महिला शिक्षक के साथ प्राचार्य का आपत्तिजनक फोटो, छात्र गुस्से में, प्रभात खबर ने छात्रों के आंदोलन पर लगाया प्रश्नचिह्न

देवघर में इन दिनों छात्र आंदोलन पर उतारु है। ये आंदोलन उन्होंने शुरु किया है, एक फोटो के वायरल होने के बाद। आखिर फोटो में क्या है? फोटो में एएस कॉलेज के प्राचार्य डा. फणिभूषण यादव को बीएड कॉलेज की एक शिक्षिका के साथ आपत्तिजनक में देखा गया है। इस आपत्तिजनक फोटो को देखने के बाद छात्रों का कहना है कि इससे कॉलेज की मर्यादा व उसके सम्मान को गहरा ठेस पहुंचा है।

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कोई भी देश अपने देश को बाजार बनाना नहीं चाहता, पर अपने CM भारत को बाजार कह गर्व महसूस करते हैं

धिक्कार, इस राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास को जो भारत देश को बाजार कहने में गर्व महसूस करता है। भारत जैसे देश को उद्यमिता प्रधान देश न कहकर, उसे उपभोक्तावादी देश कहने में खुद को गर्व महसूस करनेवाला व्यक्ति की यह सोच बताता है कि वह अपने देश के सम्मान को कैसे प्रभावित कर रहा है, वह भी एक प्रतिष्ठित राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर, वह भी उस मंच से जहां हिन्दी को प्रतिष्ठित करने की बात हो रही है।

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जनता को उल्लू बनाने का काम जारी, CM ने सफाई अभियान वहां चलाया, जहां गंदगी थी ही नहीं

जब कोई मुख्यमंत्री सूट-बुट पहनकर, अपने मंत्रियों, इलेक्ट्रानिक मीडिया व प्रिंट मीडिया के संवाददाताओं व अपने कार्यकर्ताओं के लाव लश्कर के साथ किसी मुहल्ले में सफाई अभियान के लिए निकल पड़े तो समझ लीजिये, वह राज्य की जनता को उल्लू बनाने के लिए निकल पड़ा है, दरअसल उसे स्वच्छता व सफाई से कोई लेना-देना नहीं है, वह फोटो खींचवाने के लिए उस स्थल पर पहुंचा हैं,

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धन्य हैं रघुवर, धन्य हैं उनकी सरकार, धन्य हैं उनके अधिकारी, जो अपराधियों को बेदाग बचा लते हैं

भाई देश में किसी राज्य का मुख्यमंत्री हो, तो वह रघुवर दास जैसा हो, अगर सरकार हो तो रघुवर सरकार जैसी हो, अगर कोई अधिकारी हो, तो झारखण्ड के अधिकारियों जैसा हो, जिसे जांच करने को कुछ मिले तो बस वहीं चीजें लिखे, जो राज्य सरकार को हृदय से पसंद हो, जो अपराधियों को बेदाग बचा लें, वह सरकार के इशारे पर ऐसी रिपोर्ट तैयार कर दें,

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आओ हल्ला करें, शोर करें, चीखे-चिल्लाये यह कहकर कि आज ‘हिन्दी दिवस’ है

दरअसल हमारे देश में, जो खुद को शिखर पर मानते हैं, उनमें से 99 प्रतिशत लोग दोहरे चरित्र के है, जब वे जमीन पर होते हैं, तो उन्हें हिन्दी नजर आती हैं, और जैसे ही ये अपने क्षेत्र में शिखर पर होते हैं, उन्हें अंग्रेजी की व्यापकता, उसकी विशालता, उसके समृद्ध इतिहास पर उनकी नजरें जाकर टिक जाती हैं। उसका उदाहरण आप देखिये, भारत के न्यायालयों चाहे वह सुप्रीम कोर्ट हो

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साल भर के अंदर राजधानी की सूरत बदलनेवाले, रांची को तो नहीं बदल सकें, पर…

पहले विधायक थे, चलो मान लिया, एक विधायक की क्या औकात? बाद में झारखण्ड विधानसभा के अध्यक्ष बने, चलो यह भी मान लिया एक विधानसभाध्यक्ष भी क्या कर सकता है? लेकिन अब तो आप नगर विकास मंत्रालय संभाल रहे हैं, अब आप ये कहेंगे कि हमें करने नहीं दिया गया, तो लोग कभी इस बात को नहीं स्वीकार करेंगे?

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