अपनी बात

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एक कैंसर पीड़ित पत्रकार के साथ विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका ने किया घोर अन्याय

हाँ तो हम बात कर रहे थे, न्यायालय और न्याय प्रक्रिया की, जिसके अधिष्ठाता जज होते हैं। उनके कार्य की कोई आलोचना नहीं की जा सकती, लेकिन ये तो बताया जा सकता है कि कार्य उन्होंने क्या किया? कि ये भी बताया नहीं जा सकता। 23/24 अप्रैल 2012 को रांची शहर के राजमार्ग पर सहजानंद चौक के पास एक उम्रदराज गरीब आदिवासी महिला के साथ सरे शाम दुष्कर्म हुआ

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जब न्यायालय गलत करें, तो ‘गांधी’ और ‘तिलक’ की तरह उसका विरोध करें, सच दिखाएं

जमाने बाद मालूम हुआ आज, एडिटर्स गिल्ड जिन्दा है। उसने मुजफ्फरपुर मास-रेप की रिपोर्टिंग पर पटना हाई कोर्ट के प्रतिबन्ध की आलोचना की है। होना तो ये चाहिए कि भारत में न्यायपालिका और न्यायाधीशों को मिले विशेषाधिकारों की रिव्यू हो। अगर न्यायाधीश गलती करे तो आप उसके खिलाफ कुछ नहीं बोल सकते, भला क्यों? सवाल है अगर गलती करे तो?

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सच हो रही पीएम मोदी की बात, नाले की गैस से चाय बनानेवालों की संख्या बढ़ रही हैं…

याद करिये, कोई ज्यादा दिनों की बात नहीं, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व  जैव-ईंधन दिवस के दिन एक अपना संस्मरण सुनाया था, कि कैसे एक नाले के निकट बैठनेवाला चाय दुकानदार, नाले से निकलनेवाली गैस के माध्यम से अपना चुल्हा जलाता और चाय बनाकर लोगों को देता था, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ये बातें कहीं, ठीक उनके कहने के बाद ही, जैसा कि भारत में होता हैं,

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रक्षाबंधन के मर्म को समझिये, केवल इसे भाई-बहन तक सीमित मत रखिये

रक्षाबंधन प्रतिवर्ष आकर कुछ कहता हैं, पर हमारे देश के लोग आज तक कभी नहीं समझ पाये कि वह कहता क्या है? सच्चाई तो यह भी है कि विश्व में एकमात्र देश भारत ही है, जहां के 98 प्रतिशत लोग अपने देश से प्यार ही नहीं करते, अगर सही मायनों में वे देश से प्यार करते, तो आज देश की यह दुर्दशा ही नहीं होती, किसी भी देश को संवरनें या संवारने के लिए 70 वर्ष कम नहीं होते,

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अब डाक्टरों के सम्मान का भी ठेका अखबारों ने लिया, रांची में गलत परम्परा की शुूरुआत

अगर सम्मान की बात करें तो हमें कबीर की पंक्ति याद करनी होगी, जिन्होंने सम्मान की परिभाषा बहुत ही खुबसूरत ढंग से अपनी दो पंक्तियों में कह दी। वो पंक्तियां थी – ‘कबीरा हम पैदा हुए, हम रोए जग हंसे, ऐसी करनी कर चलो, कि हम हंसे जग रोए’ अर्थात् स्पष्ट हैं कि व्यक्ति का सम्मान उसके कर्मों से होता हैं, वह कर्म जनहित में हो, तभी वह सम्मान का हकदार होता हैं।

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नागरिक अभिनन्दन नहीं, अखबारी अभिनन्दन में सम्मानित हुए उप-सभापति हरिवंश

दो दिन पहले से रांची का अखबार प्रभात खबर एक विज्ञापन निकाल रहा था। विज्ञापन में लिखा था – नागरिक अभिनन्दन, हरिवंश, उप-सभापति, राज्यसभा, दिनांक – 24 अगस्त 2018, समय – अपराह्न 3.45 बजे से, स्थान – आर्यभट्ट सभागार, मोरहाबादी, रांची। आप सभी आमंत्रित हैं। निवेदक – प्रभात खबर, एवं पत्रकारिता विभाग, रांची विश्वविद्यालय, रांची

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‘बच्चा हुआ नहीं और सोहर गाना शुरु’, केरल को दिये जानेवाले मदद पर UAE का खुलासा

‘बच्चा हुआ नहीं और सोहर गाना शुरु’ हमारे देश में एक से एक नेता हैं, और उनके समर्थक तथा देश के पत्रकारों का तो क्या कहना, उधर नेता बोला नहीं, इधर नेताओं के समर्थक सड़कों पर उतरे नहीं, कि पत्रकारों का दल ढोंगी साधुओं की तरह प्रवचन देना शुरु कर दिये। यह मैं इसलिए कह रहा हूं कि कल ही यूएई के राजदूत अहमद अलबन्ना ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट कर दिया

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अटलजी की श्रद्धाजंलि सभा में भाजपा नेताओं की हंसी-ठिठोली देख, जनता हैरान

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 16 अगस्त को अपनी अटल अनन्त यात्रा पर चल दिये, जिस दिन अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हुआ, उस दिन पूरा देश उनके लिए रोया, दलों की सारी सीमाएं टूट गई, क्योंकि वे सर्वमान्य नेता थे, सभी के दिलों पर राज करते थे, पर जिस प्रकार से उनके निधन के बाद, उनकी श्रद्धांजलि सभा एवं अस्थि विसर्जन यात्रा में भाजपाइयों का चरित्र उजागर हो रहा हैं, उससे पूरा देश हैरान हैं।

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SC-ST झूठे केस में फंसे दुर्ग को मिला बेल, राजस्थान के पत्रकारों-बुद्धिजीवियों में हर्ष

राजस्थान के पत्रकारों के लिये और वहां के बुद्धिजीवियों के लिए आज का दिन बहुत खास हैं। बाड़मेर के पत्रकार दुर्ग सिंह राजपुरोहित को आज न्यायालय से जमानत मिल गई है, फिलहाल वे बिहार और राजस्थान पुलिस की कृपा से एससी-एसटी मामले के एक झूठे केस में जेल में बंद थे। आश्चर्य यह है कि इस इन्सान पर आरोप है कि उसने किसी बिहार के राकेश पासवान से काम कराए

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दुनिया में सर्वाधिक बुद्धिमान हैं न्यूज 18 में कार्यरत संवाददाता, बाकी सब…

दुनिया में सर्वाधिक बुद्धिमान अगर कोई संवाददाता है, तो वह हैं न्यूज 18 में कार्यरत संवाददाता, इनके जैसा बुद्धिमान संवाददाता, पूरे विश्व में नहीं हैं, ये कुछ भी लिखे, इनकी बातों पर विश्वास कर लीजिये, क्योंकि ये गलत लिख ही नहीं सकते, अगर ये कहते हैं कि 18 पुराणों में ‘शंख पुराण’ और ‘कर्म पुराण’ भी हैं तो बिना किसी संशय के स्वीकार कर लीजिये,

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