धनबादः पहले ट्रेनें छीनीं, अब बिजली-पानी भी छीन ली, जनता ने कहा, क्या हम जीना छोड़ दें?

जब सरकार बेशर्म होती हैं, तो लोग बिजली एवं पानी के लिए इसी तरह तरसते हैं। पूरा कोयलाचंल बिजली और पानी के लिए छटपटा रहा हैं, पर रघुवर सरकार को शायद इनकी व्यथा सुनाई नहीं दे रही। जनता और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर गये, पर राज्य सरकार को इसकी कोई सुध नहीं, भाजपा और उनके स्थानीय नेता-कार्यकर्ता घरों में दुबके हैं,

जब सरकार बेशर्म होती हैं, तो लोग बिजली एवं पानी के लिए इसी तरह तरसते हैं। पूरा कोयलाचंल बिजली और पानी के लिए छटपटा रहा हैं, पर रघुवर सरकार को शायद इनकी व्यथा सुनाई नहीं दे रही। जनता और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर गये, पर राज्य सरकार को इसकी कोई सुध नहीं, भाजपा और उनके स्थानीय नेता-कार्यकर्ता घरों में दुबके हैं, क्योंकि उन्हें पता हैं कि जनता क्या पूछेगी?

इधर भाजपा को छोड़कर सारे राजनीतिक दलों में उबाल हैं, पर बिजली रानी कब आयेगी? इसका कोई जवाब नहीं दे रहा। जो बिजली से संबंधित अधिकारी हैं, उनसे जब विद्रोही 24.कॉम सवाल पुछता हैं तो वे संतोषजनक जवाब नहीं देते, ऐसे में फिलहाल हमें नहीं लगता कि धनबाद व बोकारो की जनता को कोई राहत मिलने जा रहा।

हालांकि मुख्यमंत्री रघुवर दास के पुतला दहन का कार्यक्रम अनवरत् चल रहा हैं, और ये चलता भी रहेगा, और इसका खामियाजा भी भाजपा को 2019 में भुगतना पड़ेगा, क्योंकि भाजपा के आने से सर्वाधिक अगर झारखण्ड में किसी जिले का नुकसान हुआ तो वह धनबाद और बोकारो ही रहा। सबसे पहले भूमिगत आग के बहाने, धनबाद से चन्द्रपुरा रेललाइन पर चलनेवाली सभी यात्री गाड़ियों को बंद करा दिया गया और रही-सही कसर बिजली और पानी ने ले ली।

जो भाजपा के बड़े नेता व कार्यकर्ता हैं, जो प्रशासनिक अधिकारी हैं, जैसे उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक आदि, उनकी तो कोई बात नहीं, वे तो जेनरेटर का खूब फायदा उठा रहे हैं, पर आम जनता अपने घर में जेनरेटर वाली सुविधा कहां से लाये। सवाल यहीं हैं।

कमाल की बात हैं, धनबाद में मेयर भाजपा का, विधायक भाजपा का, सांसद भाजपा का, राज्य में सरकार भाजपा की, केन्द्र में सरकार भाजपा की और सर्वाधिक शोषण का शिकार धनबाद की जनता। लोग तो अब सीधे पूछने लगे है कि रघुवर दास बताये कि क्या धनबाद की जनता ने उन्हें इसलिए वोट दिया था कि वे उनकी छाती पर मूंग दले, इससे तो अच्छा रहता कि हमलोग अपने घरों से बिजली कनेक्शन ही हटा दें, पहले ट्रेन छीनी, और अब बिजली और पानी भी छीन ली। ये कैसा अन्याय  हैं?

लोग कह रहे हैं कि ये कोई पहली बार ऐसा नहीं हुआ, यहां रोज की घटना हैं, बिजली नहीं रहने के कारण पानी नहीं मिल रही, उद्योग धंधे चौपट, कोई काम-धंधा नहीं हो रहा, नेताओं और अधिकारियों के पास जाओ तो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिल रहा, ऐसे में लोग क्या करें?

धनबाद में जिस तरह बिजली और पानी को लेकर लोग उद्वेलित हैं, अगर ये मसला जल्दी नहीं निबटा तो ये आक्रोश राज्य सरकार के सेहत के लिए ठीक नहीं, हालांकि रघुवर दास चीन की दौरे पर चल दिये हैं, चीन से वे क्या सीखेंगे और झारखण्ड का क्या भला करेंगे, वो तो उनके अमरीका यात्रा और मोमेंटम झारखण्ड देखकर लोग पता लगा चुके हैं, अब चीन यात्रा क्या गुल खिलायेगा, वह सभी को मालूम हैं, फिलहाल देखिये धनबाद की जनता का आक्रोश कब ठंडा होता हैं तथा उन्हें बिजली और पानी कब मुहैया होती हैं?

Krishna Bihari Mishra

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