अपनी बात

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विजय पाठक का फतवा 2100 दीजिये, प्रेस क्लब का सदस्य बनिये, पत्रकारों ने जताया कड़ा विरोध

प्रभात खबर के स्थानीय संपादक और रांची प्रेस क्लब के मनोनीत सदस्य विजय पाठक ने कल फतवा जारी किया, कि जो 2100 रुपये जमा करेगा, वहीं रांची प्रेस क्लब का सदस्य बनेगा, जो 2100 रुपये जमा नहीं करेंगे, वे सदस्य नहीं बन पायेंगे और न ही उन्हें वोट देने का अधिकार मिलेगा। आज विजय पाठक का फतवा सभी अखबारों में छपा हैं। विजय पाठक ने कहा है कि पत्रकार अपनी सुविधानुसार इस राशि को दो चरणों में दे सकते है,

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PM महाशय, विकास का असली चेहरा, उड़ता हाथी, भूख से हो रही मौत देखने हेतु झारखण्ड पधारें…

धीरे-धीरे झारखण्ड में हो रहे विकास का पोल खुलता जा रहा है। हाथी उडानेवाले मुख्यमंत्री रघुवर दास और उनकी टीम हाल ही में जापान, चेक गणराज्य का दौरा कर के लौटी है, और इधर झारखण्ड में भूख से बेहाल लोग, फेल हो रही सिस्टम के शिकार हो रहे हैं, तथा अनाज नहीं मिलने के कारण भूख से दम तोड़ रहे हैं। कभी उत्तर प्रदेश में चुनाव के दौरान इलाहाबाद की एक चुनावी सभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि विकास देखना हो, तो झारखण्ड जाइये।

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रांची से प्रकाशित अखबारों ने सीएम के इमेजमेकर के रुप में काम करना शुरु किया

दीपावली की छुट्टी के बाद, आज रांची के अखबारों के दर्शन हुए हैं। सभी ने खुलकर झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के इमेज को चमकाने में अपना समय लगा दिया है। किसी ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के कानून तोड़ने की बात को समाचार में प्रमुखता नहीं दी है। फोटो छापे हैं, पर उस फोटो को इस प्रकार जगह दिया है, जैसे लगता है, कि कुछ हुआ ही नहीं। शायद हो सकता है, इन अखबारों को अपने मुख्यमंत्री रघुवर दास में रब दीखता हो।

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थोड़ा अपने गिरेबां मे भी झांक कर देखे भाजपा

लोग भूख से मर रहे हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री और उनके साथ रहनेवाले कनफूंकवों का दल अमरीका और जापान की सैर कर रहा है अर्थात सरकार ऐश-मौज करें और विपक्षी दल इनके कुकर्मों पर अंगूली न उठाएं, राजनीति न करें तो फिर ये विपक्षी दल बने हैं किसलिए?  सत्तारुढ़ दल और उनके कनफूंकवों की आरती उतारने के लिए।

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वाह रे CM, जिस पर आरोप उसे ही जांच करने के आदेश, ऐसे में संतोषी मरेगी नहीं तो क्या करेगी?

वाह रे झारखण्ड के CM  रघुवर दास, जो इस घटना का जिम्मेवार है, उसी को जांच करने का जिम्मा सौंप दिया। भारत में एक राज्य है, जिसका नाम है – झारखण्ड। यहां के मुख्यमंत्री है – रघुवर दास। ये क्या बोलते है? क्या करते है? इन्हें खुद ही नहीं पता होता।  जरा देखिये इन्होंने सिमडेगा के उपायुक्त को संतोषी की मौत की जांच का जिम्मा सौंपा है।

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सरयू राय ने मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के साथ-साथ रघुवर सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल

खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने राज्य की मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के साथ – साथ राज्य सरकार की कार्यशैली पर भी सवाल उठा दिया है। सरयू राय ने सीधे सवाल किया कि संतोषी की मौत कैसे हुई?  कोई कहता है कि उसकी मौत भूख के कारण हुई और कोई कहता है कि बीमारी से हुई है, इस पर फैसला करना मुश्किल है, मगर इतना निश्चित है कि उक्त लड़की जिसकी मृत्यु हुई है, उसका नाम पूर्व में जिस राशन कार्ड में था, वह डिलीट हो चुका था।

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लौट के बुद्धु घर को आये…

जनाब झारखण्ड के शहंशाह रघुवर दास चेक और जापान की अपनी साप्ताहिक विदेश यात्रा पूरी कर रांची लौट आये है। शहंशाह के चहेते अमित खरे, सुनील बर्णवाल, राजबाला वर्मा और अन्य अधिकारी भी रांची लौट कर, अपनी थकान मिटाने में लगे हैं। भारतीय परंपराओं में जैसे कोई व्यक्ति तीर्थयात्रा करके लौटता हैं तो अपने घर में भंडारा कराकर, ब्राह्मणों को यथोचित दान-दक्षिणा देकर, अपनी तीर्थयात्रा का समापन करता है।

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सावधान छठव्रतियों, खतरनाक है चुटिया पावर हाउस तालाब, यहां हमेशा आग लग जाया करती हैं…

कल्पना करिये, आप पूरे परिवार के साथ छठ पर्व के सुअवसर पर भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए, रांची स्थित चुटिया के पावर हाउस तालाब के पास पहुंचे हो, और उसी वक्त पूजा के क्रम में, जैसा कि प्रायः देखा जाता हैं कि लोग दीप-दान करते हैं, और उस दीप से तालाब में आग लग गई हो, और वह आग की लपटे देखते-देखते पूरे तालाब को अपने चपेट में ले ली हो, तो क्या होगा?

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झूठे सम्मान समारोह आयोजित करिये, करोड़ों कमाइये, अपना भविष्य सुरक्षित रखिये…

हमारे झारखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में झूठ का बोलबाला हो चला है। पूर्व में जहां लोग झूठ से स्वयं को दूर रखते थे, अब झूठ के संग चलना फैशन हो गया है। बस झूठ को कैसे परोसा जाये? इसका हुनर आपको होना चाहिए, फिर आप घर बैठे ही बैठे  स्वयं को समाज में प्रतिष्ठित भी कर लेंगे और स्वयं को करोड़ों का मालिक भी बना बैठेंगे। आज इस प्रकार के झूठे सम्मान समारोह आयोजित कर कई संस्थान लाखों नहीं, करोड़ों-अरबों में खेल रहे हैं।

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एक पत्रकार की मौत पर रोनेवाला कोई नहीं, इससे बड़ा दु्र्भाग्य और क्या हो सकता है?

कमाल की बात है, यह पत्रकार दुनिया से संघर्ष करते हुए, अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते दम तोड़ दिया पर कोई उसका साथ देने नहीं आया। जो लोग पत्रकारों की लड़ाई लड़ने की बात करते हैं, जो लाखों-करोड़ों में खेलते है, जो गौरी लंकेश के लिए आसमान हाथों में उठा लेते है, वे रवीन्द्र ठाकुर के इस संघर्ष पर आंखे मूंद लेते हैं, उसकी मौत पर आंसू तक नहीं बहाते, उनके लिए ऐसे लोगों के लिए शब्द नहीं है।

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