जिन्हें सुनने के लिए लाखों आते हैं, कल उन्हें सुनने के लिए रिम्स सभागार में मात्र 20-25 थें

जिन्हें सुनने और जिनके संगीत में डूबने के लिए सारी दुनिया लालायित रहती है, उन्हें सुनने के लिए रिम्स सभागार में मात्र 20 से 25 लोग थे, इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है?  झारखण्ड के कला संस्कृति विभाग ने पूरे देश के सामने झारखण्ड का नाम डूबा दिया, जरा सोचिये राज्य के बाहर के लोगों को जब यह समाचार मिलेगा तो वे क्या सोचेंगे?

जिन्हें सुनने और जिनके संगीत में डूबने के लिए सारी दुनिया लालायित रहती है, उन्हें सुनने के लिए रिम्स सभागार में मात्र 20 से 25 लोग थे, इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है?  झारखण्ड के कला संस्कृति विभाग ने पूरे देश के सामने झारखण्ड का नाम डूबा दिया, जरा सोचिये राज्य के बाहर के लोगों को जब यह समाचार मिलेगा तो वे क्या सोचेंगे? जो झारखण्ड अपनी समृद्ध कला-संस्कृति के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है, वहां कला और कलाकारों की यह दुर्दशा। क्या मुख्यमंत्री रघुवर दास, ऐसे अधिकारियों को दंडित करेंगे, जिन्होंने झारखण्ड के सम्मान से खेलने की कोशिश की।

कल की ही घटना है, रिम्स सभागार में झारखण्ड के कला संस्कृति विभाग ने भारतीय शास्त्रीय संगीत उत्सव का आयोजन किया था। इसमें अपनी प्रस्तुति देने के लिए विश्वस्तरीय संगीतज्ञ पंडित हरि प्रसाद चौरसिया, पंडित छन्नू लाल मिश्र, पंडित राम कुमार मिश्र, केडिया ब्रदर्स, नवल किशोर मल्लिक जैसे कलाकार रांची आये हुए थे। जब ये रिम्स सभागार पहुंचे तब वहां श्रोता के रुप में गिने-चुने मात्र 20 से 25 लोग जुटे थे।

बताया जाता है कि इतने बड़े कार्यक्रम की सूचना कला संस्कृति विभाग ने किसी को नहीं दी थी। जिसके कारण लोग कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच सकें और इसका परिणाम यह हुआ कि 500 सीटों वाला सभागार पूरी तरह खाली रह गया, जबकि सच्चाई यह है कि रांची में इनके कद्रदानों की कोई कमी नहीं, केवल पता चल जाये तो हजारों नहीं, बल्कि लाखों में लोग इनके कार्यक्रम को देखने-सुनने के लिए पहुंच जाये। कई बार, कई अखबारों के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भी इन्होंने आकर अपनी कला का प्रदर्शन किया है, जिसका साक्षी रांची रहा हैं, पर कल के कार्यक्रम में श्रोताओं की अनुपस्थिति इन महान कलाकारों को खल गई, उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा होगा, कि एक दिन ऐसा भी समय देखने को मिलेगा, कि वे होंगे पर उनके कद्रदान सभागार में नहीं होंगे, और ये निकृष्टतम कार्य किया झारखण्ड के कला संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने।

सभागार में श्रोताओँ की अनुपस्थिति के कारण, स्थिति यह हो गई कि सभागार खाली देख, पं. हरि प्रसाद चौरसिया ने कार्यक्रम पेश करने से ही मना कर दिया, जिसके कारण कार्यक्रम करीब आधे घंटे तक रुका रहा। इसी बीच कला संस्कृति विभाग के अधिकारियों का दल उन्हें मान-मनोव्वल में लगा रहा, तब जाकर पं. हरि प्रसाद चौरसिया अपना कार्यक्रम पेश करने को तैयार हुए। क्या रांची की जनता रघुवर सरकार पर विश्वास करें कि जिन्होंने झारखण्ड के सम्मान के साथ खेलने की कोशिश की, उन्हें दंडित किया जायेगा?

Krishna Bihari Mishra

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