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घोर आश्चर्य, एक गवाह का दावा उसे मिल रहा मजीठिया, दूसरे ने कहा उसे मालूम नहीं

झारखण्ड के रांची से प्रकाशित सन्मार्ग के प्रसार प्रबंधक अनिल कुमार ने श्रम न्यायालय में 26 अक्टूबर 2016 को बयान दिया है कि वे 15 दिसम्बर 2010 से सन्मार्ग में काम कर रहे है, तथा उन्हें मजीठिया बेज बोर्ड के आलोक में वेतन मिल रहा हैं। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्हें वर्तमान में सभी प्रकार के भत्तों के साथ कुल 42 हजार रुपये वेतन महीना मिल रहा हैं। मूल वेतन 15,800 रुपये और गृह भत्ता 5,600 रुपये हैं।

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CM रघुवर दास ने आखिरकार कल देर रात ‘धर्म’ का परित्याग कर ही दिया

जी हां, सीएम रघुवर दास ने आखिरकार कल देर रात ‘धर्म’ का परित्याग कर ही दिया। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मुख्यमंत्री कार्यालय हो या मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय। मुझे सीएम रघुवर दास के साथ एक ही व्यक्ति, एक ही भारतीय प्रशासनिक सेवा का व्यक्ति ऐसा नजर आया, जिसके पास धर्म था, मानवीय मूल्य थे और उस व्यक्ति का नाम हैं – संजय कुमार, बाकी तो जो उनके साथ हैं, वो क्या हैं? वो खुद ही समझ लें।

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भाजपाइयों द्वारा दिये जा रहे फूलों के हार और शॉल के चक्कर में फंसते जा रहे पत्रकार

लोकसभा व विधानसभा चुनाव को नजदीक आता देख, भाजपाइयों ने नाना प्रकार के तिकड़म शुरु कर दिये हैं। इन्हीं तिकड़मों में से एक तिकड़म हैं – छोटे मंझौले पत्रकारों या प्रेस क्लब से जुड़े पत्रकारों को सम्मान समारोह आयोजित कर उनको माला पहनाना, छोटे-मोटे गिफ्ट देकर, उनके दिलों में अपना जगह बनाना, ताकि लोकसभा-विधानसभा चुनावों के दौरान ये उनकी बेहतर ढंग से मदद तथा उनके लिए विशेष रुप से काम आ सकें।

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शर्मनाक, कल बिल्डर ने तो आज रांची प्रेस क्लब ने सरकारी लोगो का इस्तेमाल किया

कुछ दिन पहले की बात है कि रांची के एक बिल्डर ने अपने एक कार्यक्रम के लिए राज्य सरकार के लोगो का इस्तेमाल किया था, जिसको लेकर राज्य सरकार की काफी किरकिरी हुई थी, इसे अखबारों और कुछ चैनलों ने मुद्दा भी बनाया था, लेकिन जब रांची प्रेस क्लब की बात आई तो सभी ने चुप्पी साध ली। आखिर क्यों? क्या रांची प्रेस क्लब को अपने कार्यक्रमों के लिए राज्य सरकार के लोगो का इस्तेमाल करने का कानूनी हक है?

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लक्षण ठीक नहीं दीख रहे रांची प्रेस क्लब के, खरमास की समाप्ति का इंतजार ठीक नहीं

रांची प्रेस क्लब का चुनाव हो गया, परिणाम आ गये, पर अभी तक जीते प्रत्याशियों ने शपथ ग्रहण नहीं किये हैं। सूत्र बताते हैं कि जीते हुए प्रत्याशी खरमास समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं। अब सवाल उठता है कि जब आपने शपथ ग्रहण ही नहीं किया, तो आपने निर्णय लेना कैसे शुरु कर दिया? क्या बिना शपथ लिये बैठक कर आपको निर्णय लेने का अधिकार है? क्या ऐसी निर्णयों को मान्यता दी जा सकती हैं?

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बस पांच से छः हजार रुपये की नौकरी युवाओं को दिलवाकर खुब उछल रही सरकार

पूरे राजधानी की सड़कों पर अपना होर्डिंग लगवाना, पूरे देश के अखबारों में अपने नाम का विज्ञापन छपवाना तथा बिरदावली गानेवाले समूहों को बुलाकर अपनी जय-जयकार कराना अलग बात है, पर जिन युवाओं को नौकरी देने की बात हो रही हैं, उनके दर्द को जानना अलग बात है। वे राजनेता है, वह हर प्रकार की तिकड़म खेलेंगे, वे अपने इर्द-गिर्द परिक्रमा करनेवाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से वह हर प्रकार का काम करायेंगे।

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जनता के साथ धोखा, एफडीआई प्रकरण पर पीएम मोदी ने अपना असली चेहरा दिखाया

याद करिये, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वह चेहरा, जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, थोड़ा अपने मस्तिष्क पर जोर दीजिये, जब केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने एफडीआई लाने की बात की थी, तब उन्होंने ट्विट कर क्या कहा था – Congress is giving nation to foreigners. Most parties opposed FDI but due to sword of CBI, some didn’t vote & Cong won through back door!  

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बहुत वर्षों बाद दीखे लाल बहादुर शास्त्री केन्द्र सरकार के विज्ञापनों में अपने पुण्य तिथि पर

11 जनवरी 1966, आज ही के दिन हमारे देश के प्रिय पूर्व प्रधानमंत्री, भारत मां के लाल, सही मायनों  में भारत रत्न, लाल बहादुर शास्त्री का निधन रुस के ताशकंद में हो गया था। उनकी सादगी, उनकी देशभक्ति, उनकी गांधीवादी मनोवृत्ति पर भला कौन दल अंगूली उठा सकता है। मैं इक्यावन साल में हूं। कई अखबारों व चैनलों में काम किया हूं।

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शिल्पा शेट्टी को सबसे पहले रांची नगर निगम का इज्जत का कचड़ा निकालना चाहिए

रांची के चुटिया स्थित पावर हाउस से आलू गोदाम जाने का रास्ता। रांची नगर निगम ने जहां कुड़ा फेंका जाता है, वहीं पर दो होर्डिंग लगाये हैं। एक होर्डिंग में लिखा है – लेट्स मेक द राइट च्वाइस एंड यूज डस्टबिन। इसी होर्डिंग में हिंदी में लिखा है – अपना शहर को स्वच्छ रखने और स्वच्छ भारत के सपने को पूरा करने में अपना योगदान दें, स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 और दूसरे होर्डिंग में दो-दो डस्टबिन दिखाये गये है – एक सूखा कचड़ा और दूसरा गीला कचड़ा के लिए।

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पर वे लोकतंत्र में बर्दाश्त करने को तैयार नहीं, न ही सुप्रीम कोर्ट से सीख लेने को तैयार

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि मीडिया को अभिव्यक्ति की आजादी देना आवश्यक है। सर्वोच्च न्यायालय ने एक टीवी पत्रकार के खिलाफ दायर मानहानि के मामले पर सुनवाई करते हुए कहा  “आपको लोकंतंत्र में बर्दाश्त करना सीखना चाहिए। यह संभव है कि अदालत ने मानहानि कानून को सही ठहराया हो पर इसका मतलब यह नहीं कि हर मामला मानहानि का हो जाये”  

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