अपनी बात

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सर्वत्र जागरण की हो रही थू-थू, रांची के अखिलेश की प्रतिज्ञा, वह जागरण में कभी काम नहीं करेगा

वरिष्ठ पत्रकार गुंजन सिन्हा ने एक पत्रकार को संबोधित करते हुए लिखा है कि  जागरण के अपराध के लिए पीसीआई या कोर्ट से कोई लाभ नहीं, जनता को इसका बहिष्कार करना चाहिए। अखबारों पर नियंत्रण जनता का होना चाहिए, विज्ञापन का पैसा हो या कीमत, चुकाती जनता है, लेकिन कंटेंट पर उसका कोई अधिकार नहीं, आप जो चाहें जैसे चाहें उसे ही ठगें वाह, और इस अखबारी निरंकुश ऐय्याशी के खिलाफ,

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भाजपा के लिए इससे बड़ा सुखद समाचार दूसरा कोई हो ही नहीं सकता, यशवंत ने भाजपा छोड़ दी

यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे लोग जब देश-समाज सेवा के बारे में बोलते हैं, तो ऐसा लगता है कि ये सच्चे देशभक्तों और समाजसेवियों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। कल सुनने को मिला कि यशवंत सिन्हा ने खुद को भाजपा से अलग कर लिया, जबकि उनका बेटा आज भी भाजपा में है, और मंत्री पद का परम आनन्द प्राप्त कर रहा है। आप कहेंगे कि इसमें क्या हुआ? उनका बेटा न भाजपा में है, यशवंत सिन्हा नहीं न है।

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वार्ड 46 की जनता ने सामान्य महिलाओं की घोषित वार्ड से एक आदिवासी महिला को जीत दिला दी

पिछले दिनों नगर निकाय के चुनाव में रांची नगर निगम के वार्ड नं. 46 के मतदाताओं ने गजब का निर्णय लिया, जो पूरे रांची शहर में चर्चा का विषय बन गया। दरअसल सामान्य महिलाओं के लिए आरक्षित इस वार्ड में यहां के मतदाताओं ने यहां से चुनाव लड़ रही आदिवासी महिला रीता मुंडा को जीता दिया, जो आश्चर्य का केन्द्र रहा। हम आपको बता दें कि यह वार्ड भाजपा समर्थक वार्ड हैं, यहां से ज्यादातर वोट भाजपा को ही मिलते है,

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विपक्ष को ये समझना होगा कि उनकी लड़ाई आडवाणी-वाजपेयी जैसे भाजपाइयों से नहीं बल्कि…

झारखण्ड के नगर निकाय चुनाव परिणाम आ गये। भाजपा की दसों अगूंलियां, पैर, माथे, यानी सब कुछ घी के डब्बे में हैं। सभी प्रसन्न हैं। मुख्यमंत्री, मंत्री से लेकर कार्यकर्ता, संतरी तक, क्योंकि रिजल्ट ऐसा आया है, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती, उनके द्वारा किया गया साम-दाम-दंड-भेद की राजनीति आज सफल हो गई, ईवीएम ने वहीं उगला, जो उसने निगला था,

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भाजपा के परंपरागत वोटों में झामुमो ने सेंध लगाई, ब्राह्मणों ने बड़े पैमाने पर झामुमो को दिया वोट

भाजपा के परंपरागत वोटों में झामुमो ने सेंध लगा दी है। इस बार नगर निकाय के चुनाव में झामुमो ने भाजपा के परंपरागत वोट माने जानेवाले ब्राह्मणों और अन्य सवर्णों के वोटों पर अपना कब्जा जमाने में सफलता प्राप्त कर ली है। झारखण्ड के कई इलाकों में ब्राह्मणों ने इस बार भारी संख्या में झामुमो के पक्ष में मतदान कर भाजपा की नींद उड़ा दी।

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नगर निकाय चुनाव में भाजपा को शिकस्त मिलना तय, झामुमो-कांग्रेस की बल्ले-बल्ले

पूरे प्रदेश में आज नगर निकाय का चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। पहली बार राज्य की मतदाताओं ने राज्य निर्वाचन आयोग की कड़ी आलोचना की तथा अपना आक्रोश व्यक्त किया। यहीं नहीं रांची में तो यहां के उपायुक्त पर विभिन्न मतदान केन्द्र के मतदाताओं ने अपना गुस्सा निकाला। कई मतदान केन्द्रों पर जब मतदाता पहुंचे तो उन्हें पता चला कि उनका मतदान केन्द्र बदला जा चुका है।

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EC द्वारा मतदाताओं को जागरुक करने के उद्देश्य से चलाये गये अभियान पर पत्रकारों का कब्जा

बहुत सारे पत्रकार, उनके परिवार और इसे पेशे से जुड़े लोग प्रथम मतदाता का सर्टिफिकेट लेकर इतरा रहे हैं, और उसके साथ फोटो खींचाकर फेसबुक पर डाल रहे हैं, शायद वे नहीं जान रहे कि उन्होंने मतदाताओं का हक छीना है। इस बार पहली बार, राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं में जागरुकता लाने के लिए यह सुंदर प्रयास प्रारंभ किया था, ताकि वह आम मतदाता, जो अपने वोट देने के अधिकार को, उसके महत्व को नहीं समझता,

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अपने जमीर को बेचियेगा और कहियेगा कि हमारा शहर गंदा है, यह ठीक नहीं

आप युवा है न। मतदाता है न। …और जब मतदान का समय आयेगा, या किसी दल के लिए आपको पोलिंग एजेंट बनने की बात आयेगी या उसके प्रचार-प्रसार में उतरने की बात आयेगी, तो आप उक्त दल या प्रत्याशी से खुलकर एक दिन के हिसाब से दो हजार रुपये का डिमांड करेंगे, बिना दो हजार का नोट लिये आप टस से मस नहीं होंगे और चुनाव संपन्न हो जाने के बाद, जब उक्त दल या प्रत्याशी जीत जायेगा

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सतुआनी यानी बचपन में “टुइयां” खरीदने और  “नाच बगइचां” जाने की जिद करने का दिन

पटना से 12 किलोमीटर की दूरी पर है – दानापुर कैंट। दानापुर कैंट से करीब तीन से चार किलोमीटर दूर पर है – नासिरीगंज। ऐसे यह नासिरीगंज, दानापुर कैंट और गांधी मैदान पटना मार्ग पर पड़ता हैं। इसी नासिरीगंज इलाके करीब 40 वर्ष पूर्व तक एक बहुत बड़ा खुला खेत हुआ करता था, जिसे लोग “नाच बगइचां” कहा करते थे। ये “नाच बगइचां” कैसे नाम पड़ा? मैं नहीं जानता और न ही किसी बाग-बगइचां को नाचते देखा, पर चूंकि नाम था – “नाच बगइचां”

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एक ब्राह्मण ने जमशेदपुर साकची में स्थित अम्बेदकर प्रतिमा को अपने हाथों से साफ किया

आम तौर पर विभिन्न दलित तथा विभिन्न तथाकथित स्वयंसेवी संगठनों, पिछड़ों तथा अतिपिछड़ों के नाम पर राजनीति करनेवाले विभिन्न संगठनों और उनके नेताओं की ये धारणा रहती है कि ब्राह्मण वर्ग दलितों को सम्मान नहीं देता अथवा उनके महापुरुषों को सम्मान नहीं करता, पर सच्चाई देखा जाय, तो इस तरह का भेदभाव अब आधुनिक समाज में नहीं देखने को मिलता।

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