CM रघुवर दास ने आखिरकार कल देर रात ‘धर्म’ का परित्याग कर ही दिया

जी हां, सीएम रघुवर दास ने आखिरकार कल देर रात ‘धर्म’ का परित्याग कर ही दिया। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मुख्यमंत्री कार्यालय हो या मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय। मुझे सीएम रघुवर दास के साथ एक ही व्यक्ति, एक ही भारतीय प्रशासनिक सेवा का व्यक्ति ऐसा नजर आया, जिसके पास धर्म था, मानवीय मूल्य थे और उस व्यक्ति का नाम हैं – संजय कुमार, बाकी तो जो उनके साथ हैं, वो क्या हैं? वो खुद ही समझ लें।

जी हां, सीएम रघुवर दास ने आखिरकार कल देर रात ‘धर्म’ का परित्याग कर ही दिया। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि मुख्यमंत्री कार्यालय हो या मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय। मुझे सीएम रघुवर दास के साथ एक ही व्यक्ति, एक ही भारतीय प्रशासनिक सेवा का व्यक्ति ऐसा नजर आया, जिसके पास धर्म था, मानवीय मूल्य थे और उस व्यक्ति का नाम हैं – संजय कुमार, बाकी तो जो उनके साथ हैं, वो क्या हैं? वो खुद ही समझ लें।

हमारी पहली मुलाकात संजय कुमार से तब हुई, जब में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में कार्यरत था। तत्कालीन निदेशक अवधेश कुमार पांडेय के माध्यम से 5 जनवरी 2016 को मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में, मैं उनसे मिला था और तब से लेकर आज तक जो संबंध बने, वो आज भी कायम है, कोई इसे तोड़ भी नहीं सकता, क्योंकि ये संबंध किसी के द्वारा बनाये नहीं गये, ईश्वरीय थे।

मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि झारखण्ड में दो ही भारतीय प्रशासनिक सेवा के लोग हैं, जिनको मैं सम्मान देता हूं, क्योंकि उनमें मानवीय मूल्य  व नैतिकता हैं, उनमें ईमानदारी कूट-कूट कर भरी हैं, और उन्हें राज्य का कोई मुख्यमंत्री अथवा देश के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति डिगा नहीं सकता। वह पहले है – सुखदेव सिंह और दूसरे संजय कुमार।

यहां तो एक से एक आईएएस हैं जो चरित्रवान होने का लबादा ओढ़े हैं, पर वो कितने चरित्रवान हैं, मैं उन्हें बखूबी जानता हूं। एक दो बार उनसे मुलाकात भी हुई पर मेरी आत्मा ने उन्हें चरित्रवान अथवा ईमानदार मानने से इनकार कर दिया, आजकल ये व्यक्ति सीएम रघुवर के ज्यादा करीब हैं, हो सकता हैं, उसे महत्वपूर्ण पद भी मिल जाये।

कमाल है, हमारे सीएम रघुवर दास भी। उनसे अपने ही विधायक और मंत्री नाराज हैं, उनसे राज्य का एक-एक ईमानदार अधिकारी-कर्मचारी नाराज हैं, पर क्या मजाल अपने मुख्यमंत्री उस ओर ध्यान दे दें, इनका तो ज्यादा ध्यान इस बात को लेकर होता है कि कहीं अपनी मुख्य सचिव न नाराज हो जाये। सीएम की इतनी हिम्मत भी नहीं कि वे सीएस पर कार्रवाई कर दें, वह भी तब, जब उनके ही मंत्रिमंडल के एक सदस्य सरयू राय ने सीएस को लेकर गंभीर टिप्पणी करते हुए, सीएम से सीएस के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग पिछले दिनों कर दी थी।

राज्य में स्थिति ऐसी है कि भ्रष्टाचार चरम पर हैं, सामान्य व्यक्ति को आय प्रमाण पत्र बनाने, चरित्र प्रमाण पत्र बनाने, आवासीय प्रमाण पत्र बनाने, स्थानीय प्रमाण पत्र बनाने, जाति प्रमाण पत्र बनाने में पसीने छूट रहे हैं, बिना रिश्वत के काम नहीं हो पा रहे, इन्हीं बात को लेकर भाजपा के ही वरिष्ठ नेता करिया मुंडा तक नाराज चल रहे हैं, पर सीएम के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। उन्हें तो पीएम नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से झारखण्ड सेवा के लिए विशेष आजीवन सीएम बने रहने का प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। ऐसे में उन्हें किस बात का डर?

कल देर रात जैसे ही संजय कुमार की प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने की खबर आई, राज्य में भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों में हर्ष की लहर दौड़ गई। इन्हें ऐसा लगा कि ईश्वर ने इन्हें मुंहमांगी मुरादे पूरी कर दी, क्योंकि मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में एक ही व्यक्ति संजय कुमार बैठे थे, जो नियम और कानून के तहत, अंत-अंत तक सीएम को अपनी बातें पहुंचा देते थे, जिससे उन भ्रष्ट अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगते थे, उनकी मुंहमांगी मुरादें पूरी नहीं हो पाती थी, जिसको लेकर सीएस और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव में टकराव बरबस हो जाया करती थी।

हालांकि सूत्र बताते हैं कि इन्हीं सभी कारणों से इन्हें कई बार संजय कुमार को अपमान के घूंट भी सहने पड़े, इसलिए उन्होंने कई बार यहां से जाने का मन भी बनाया, यहीं कारण था कि दिसम्बर 2016 में ही, इन्होंने यहां नही रहने का मन बनाया था, पर बाद में सीएम के कहने पर रुक गये, पर इस बार इन्होंने संकल्प कर लिया कि नहीं रहना हैं, ऐसे भी प्रतिनियुक्ति की सीमा समाप्त होने में कुछ ही दिन बचे हैं, कल सीएम ने इन्हें रीलिज भी कर दिया है, अब वे ज्यादा दिनों तक झारखण्ड में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव पद पर नहीं दिखेंगे।

इसी बीच राज्य के कई प्रबुद्ध एवं गण्यमान्य व्यक्तियों तथा सामाजिक संगठनों से जुड़े व्यक्तियों ने विद्रोही 24.कॉम को बताया कि संजय कुमार का झारखण्ड से जाना दुर्भाग्यपूर्ण हैं, ऐसे भी जब सुखदेव सिंह वित्त सचिव पद से स्वयं को अलग कर सकते हैं, और अब संजय कुमार भी प्रतिनियुक्ति की अवधि को बढ़ाने से इनकार करने पर आमदा है, तो मुख्यमंत्री रघुवर दास बताये कि जिस पर भ्रष्टाचार का आरोप है, जिस पर सीबीआई भी अपना दृष्टिकोण स्पष्ट कर चुकी है, जिसको लेकर सरकार के अंदर और सरकार के बाहर तक खुला विरोध है, उसके खिलाफ कार्रवाई करने में सीएम को दिक्कत क्यों आ रही है? क्या सीएम को लगता है कि राज्य की जनता एकदम बेवकूफ है?

अगर राज्य में यहीं हाल रहा, तो ऐसे में कोई भी ईमानदारी आदमी, जिसके अंदर थोड़ी सी भी मानवीय मूल्य एवं नैतिकता बची हैं, वह ऐसे राज्य में क्यों रहना चाहेगा?  जहां का मुख्यमंत्री सत्य को अथवा धर्म को प्रतिष्ठित न कर, भ्रष्टाचार को प्रतिष्ठित करता है।

Krishna Bihari Mishra

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