बस पांच से छः हजार रुपये की नौकरी युवाओं को दिलवाकर खुब उछल रही सरकार

पूरे राजधानी की सड़कों पर अपना होर्डिंग लगवाना, पूरे देश के अखबारों में अपने नाम का विज्ञापन छपवाना तथा बिरदावली गानेवाले समूहों को बुलाकर अपनी जय-जयकार कराना अलग बात है, पर जिन युवाओं को नौकरी देने की बात हो रही हैं, उनके दर्द को जानना अलग बात है। वे राजनेता है, वह हर प्रकार की तिकड़म खेलेंगे, वे अपने इर्द-गिर्द परिक्रमा करनेवाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से वह हर प्रकार का काम करायेंगे।

पूरे राजधानी की सड़कों पर अपना होर्डिंग लगवाना, पूरे देश के अखबारों में अपने नाम का विज्ञापन छपवाना तथा बिरदावली गानेवाले समूहों को बुलाकर अपनी जय-जयकार कराना अलग बात है, पर जिन युवाओं को नौकरी देने की बात हो रही हैं, उनके दर्द को जानना अलग बात हैं। वे राजनेता हैं, वह हर प्रकार की तिकड़म खेलेंगे, वे अपने इर्द-गिर्द परिक्रमा करनेवाले भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से वह हर प्रकार का काम करायेंगे, जो उन्हें अच्छा लगता हैं, पर वे जानने की कोशिश नहीं करेंगे कि जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को इस रोजगार मेले में भेजे हैं, उनके सपने क्या हैं?

क्या कोई बतायेगा कि रांची में आयोजित इस बहुचर्चित मेले में कितने मुख्यमंत्री, कितने मंत्री, कितने आईएएस, कितने आईपीएस, कितने पुलिसकर्मियों, कितने राज्यसरकार के कर्मियों या केन्द्रीय सरकार के कर्मियों के बेटे-बेटियों ने इस रोजगार मेले में आकर अपना भविष्य सुधारने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया था?

क्या कोई बतायेगा कि अब तक इसके पूर्व जो कौशल विकास के नाम पर राज्य सरकार ने जो धंधे चलाये हैं, उन धंधों के अंतर्गत कितने युवाओं ने नौकरियों के लिए रजिस्ट्रेशन कराई और नौकरी पर जाने के बाद कुछ महीनों में ही घर लौट आये और अपने सारे सपने दो पैसों की लालच में आकर, नौकरी के नाम पर सदा के लिए धो दिये।

हमारे देश में कौशल विकास के नाम पर एक बहुत बड़ा धंधा चल रहा है। इस धंधे में नेता, प्रशासनिक अधिकारी और दलालों की चल पड़ी हैं। ये कौशल विकास के नाम पर फर्जी कंपनियों से कांट्रेक्ट करते हैं, और उन्हें जमकर मुंहमांगी रकम दिलवाते हैं, उसके बाद ये इनसे अपने-अपने कमीशन प्राप्त करते हैं, तथा बेरोजगार युवाओं को नौकरी के नाम पर रजिस्ट्रेशन करवाकर कुछ महीनों के लिए नौकरी पर रखते हैं, और फिर करोड़ों रुपये डकार जाते हैं, जैसे ही करोड़ों रुपये का यह कारोबार खत्म होता हैं, नौकरी कर रहे युवाओं को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता हैं, बस इतनी सी हरकतों के लिए नाना प्रकार के ढोंग भी रचे जाते हैं, जिनके शिकार ये आज के युवा आसानी से हो जाते हैं, और अपना भविष्य खराब कर लेते हैं।

राज्य के कई विपक्षी नेताओं ने आज के कौशल विकास पर जो अपनी प्रतिक्रिया दी हैं, उन प्रतिक्रियाओं में दम भी हैं, अगर सही में जांच हो जाये, तो निश्चित मानिये कि इस कौशल विकास में जो भी लोग शामिल हैं, वे आनेवाले समय में जेल की शोभा बढ़ायेंगे, कोई इन्हें रोक भी नहीं सकता।

सरकार खुश है, उनके लोग खुश हैं, वह कह रही है कि इस मेले में 60 हजार लोगों ने निबंधन कराया, जिसमें 27842 लोगों को 31 सेक्टर की कंपनियों में नौकरी मिल गई, पर सच्चाई यह भी है कि जिन्होंने बहुत बड़ा या छोटा सा भी सपना देखा था, उनके सपने टूटते नजर आये। खुद झारखण्ड स्किल डेवलेपमेंट मिशन सोसाइटी का वेब पोर्टल हुनर कह रहा है कि 27,842 लोगों में से 21,021 लोगों को दस हजार रुपये से कम वेतन मिलेंगे।

अगर रांची में देखे तो यहां 5927 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया, जिनमें मात्र 1636 युवा ही ऐसे मिले, जिन्हें दस हजार से ज्यादा वेतन है, जबकि ज्यादातर लोग पांच हजार से छःहजार की वेतन में सिमट गये, अगर दूसरे जिलों की बात करें, तो वहां की स्थिति और बदतर हैं। उसमें भी इनकी नौकरी की कोई गारंटी भी नहीं कि कितने दिनों तक रहेंगी, हो सकता है कि इन्हें जल्द ही वापस का रास्ता भी दिखा दी जाये। सवाल उठता है कि कौशल विकास के नाम पर मुख्यमंत्री, मंत्री, आईएएस, आईपीएस, राज्यकर्मी, केन्द्रीयकर्मियों के बच्चे या उनके रिश्तेदारों के बच्चे ऐसी नौकरी लेने के लिए रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं कराई, जब सरकार ताल ठोक रही हैं कि उसने 27,000 से ज्यादा लोगों को नौकरी दे दी, तो इन नौकरियों में शामिल होने के लिए उनके परिवार के लोग क्यों नहीं तैयार थे, क्या उन्हें पांच-छः हजार का वेतन कम लग रहा था, या परिस्थितियों को वे समझ रहे थे।

सच्चाई यह है कि जो भी युवा जो यहां लगे रोजगार मेले के नाम पर आये थे, उसमें तो कई का यह भी कहना था कि यहां रजिस्ट्रेशन कराने या नौकरी की आशा करने या जिस प्रकार के यहां वेतन के कान्सेप्ट है, उससे अच्छा तो वे अचार बेचकर अपना जीविकोपार्जन कर लेंगे। ऐसी नौकरी से उनका भविष्य थोड़े ही बनेगा, जिंदगी भर कुली-मजदूर बने रहेंगे, जो हम नहीं चाहते, हमारे सपने है, हम युवा है, बेहतर करेंगे, और बेहतर दुनिया बनायेंगे, पर सरकार के झांसे में नहीं आयेंगे।

Krishna Bihari Mishra

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1980 में डेढ़ हजार वेतन पानेवाला कभी भी गरीब नहीं हो सकता CM साहेब

Sat Jan 13 , 2018
कल की ही बात है, मुख्यमंत्री रघुवर दास कौशल विकास को लेकर खेलगांव में एक बड़ी भीड़ को संबोधित करने के दौरान दिये जा रहे थे। उन्होंने भाषण के दौरान कहा कि गरीबी क्या होती है? वे जानते है। वे इसका प्रमाण देते हुए कहते है कि उन्होंने खुद मजदूरी की है। वे बताते है कि 1977 में जब उनके पिता टाटा कंपनी से सेवानिवृत्त हुए, तब उन्होंने 1980 में टाटा कंपनी में 1500 रुपये में अस्थायी मजदूर के रुप में नौकरी शुरु की। ये सीएम का बयान है।

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