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अहंकार में चूर CM ने भगवान शिव पर जलार्पण करने से किया इनकार

दुनिया में बहुत कम ही लोग हुए, जो सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने के बाद खुद को संभाल सकें, नहीं तो ज्यादातर लोग ऐसे निकले, जो सत्ता पाते ही, उसके मद में ऐसे चूर हुए, कि उन्हें सड़कों पर चलनेवाले सामान्य नागरिक कीड़े-मकोड़े की तरह नजर आने लगे और लगे हाथों ऐसे लोगों ने भगवान और उनके भक्तों का भी मजाक उड़ाना शुरु कर दिया।

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क्या झारखण्ड के CM 50 किलोमीटर की दूरी तय कर मैट्रिक परीक्षा देने गये थे?

क्या राज्य के मुख्यमंत्री या मानव संसाधन मंत्री या शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव या झारखण्ड एकेडमिक कौंसिल के उच्चाधिकारी मैट्रिक की परीक्षा देने के लिए पचास किलोमीटर की दूरी तय किये थे? या उनके बेटे-बेटियां या पोते-पोतियां या उनके रिश्तेदार पचास किलोमीटर की दूरी तय कर मैट्रिक की परीक्षा देने को तैयार हैं अगर नहीं तो फिर राजकीयकृत उच्च विद्यालय टाटीसिलवे के गरीब छात्र-छात्राओं पर इतना बड़ा जुल्म क्यों?

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गुंजन सिन्हा ने पत्रकारिता में लंबी लकीरें ही नहीं, इतिहास भी बनाया है

आज जो ईटीवी के बिहार या झारखण्ड कार्यालय में कार्यरत है, उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि गुंजन सिन्हा के कार्यकाल तक इस ईटीवी पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं था, साथ ही गुंजन सिन्हा का कार्यकाल स्वर्णिम काल था, उनके जाने के बाद जो लोग नये आये और उन्होंने कैसे ईटीवी को कबाड़ा बनाया और आज ईटीवी की क्या स्थिति है, यह किसी से छुपा नहीं हैं।

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झारखण्ड सरकार की शिकायत संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत तक पहुंची

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत इन दिनों अपने दस दिवसीय प्रवास पर बिहार दौरे पर हैं। सरसंघचालक के बिहार दौरे को लेकर, झारखण्ड के स्वयंसेवकों का दल भी इन दिनों बिहार प्रवास पर है, तथा सरसंघचालक के इस बिहार दौरे का राज्य व देशहित में फायदा उठाना चाहता है, यह दल बताना चाहता है कि झारखण्ड में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा, वह भी तब जबकि यहां भाजपा का शासन है।

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नीति आयोग के रिपोर्ट पर इतराने की जरुरत नहीं, राज्य में स्वास्थ्य सेवा अब भी खराब

ज्यादा दिनों की बात नहीं हैं। याद करिये 8 दिसम्बर 2017, नीति आयोग ने संसदीय समिति के सामने एक प्रजेंटेंशन दिया था, जिसमें नीति आयोग का कथन है कि झारखण्ड में स्वास्थ्य और प्राथमिक शिक्षा की बद से बदतर स्थिति है। झारखण्ड में पांच साल तक के 45.3 प्रतिशत बच्चे कुपोषण के शिकार है। पांच साल से कम उम्र के 47.8%  बच्चे अंडरवेट है।

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आखिर हमारे PM कब तक पं. नेहरु और इंदिरा को कोसते हुए अपनी गलती छिपाते रहेंगे

आखिर कब तक हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी गलतियों और गड़बड़ियों को छुपाने के लिए भारत के दिवंगत नेताओं का नाम संसद और संसद से बाहर उछालते रहेंगे? आखिर वे कब तक अपनी गलतियों व गड़बड़ियों को छुपाने के लिए कांग्रेस के 70 साल के शासन को कोसते रहेंगे। आखिर वे कब तक अपने भाषण में नेहरु परिवार को कटघरे में खड़े करते रहेंगे?

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और अब ‘पद्मावती’ के बाद ‘लक्ष्मीबाई’ के नाम पर देश को आग में झोंकने की कोशिश

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र किशोर ने सोशल साइट पर कुछ सवाल उठाये हैं, ये सवाल सामयिक है, और इस पर उन सब को ध्यान देना चाहिए, जो अपने इतिहास, महापुरुषों, विदुषी महिलाओं पर गर्व करते हैं, उनके लिए नहीं जो अपने ही महापुरुषों और देश की विदुषी महिलाओं में दोष ढुंढते हो।

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एसिड अटैक की शिकार प्रियंका को बचाने के लिए उठे सैकड़ों शाकद्वीपीयों के हाथ

23 दिसम्बर 2017, गया का शेरघाटी। 22 वर्षीया प्रियंका मिश्रा को उसी के पति राजन मिश्रा ने एसिड डालकर उसकी हत्या करने की कोशिश की है। प्रियंका लगभग पूरी तरह से जल चुकी है। फिलहाल प्रियंका का इलाज सफदरगंज अस्पताल, नई दिल्ली में चल रहा हैं, और उसे बचाने के लिए पूरा शाकद्वीपीय समाज हृदय से लग चुका है।

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नाम बिगाड़ने और सम्मान से खेलने में आगे हैं teamjharkhand एवं पीआरडी टीम

वाह रे, teamjharkhand तुम्हारा जवाब नहीं। ये झारखण्ड में नया विधायक राधा-श्रीकृष्ण किशोर कहां से आ गये/आ गयी? निधि खरे, निधि करें कब से हो गई? जरा देखिये ट्विटर पर टीम झारखण्ड ने क्या ट्विट किया है। चूंकि टीम झारखण्ड पर भी मुख्यमंत्री रघुवर दास की छाया स्पष्ट रुप से पड़ी है, जैसे रघुवर दास क्या निर्णय लेंगे और कब उस निर्णय को अपने ही हाथों से लीप-पोत कर बराबर कर देंगे, कुछ कहा नही जा सकता।

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“2019 में आर या पार, कभी न दिखे मोदी सरकार”

जैसा कि हर बार होता है, जिस दिन केन्द्र और राज्य सरकार बजट पेश करती है, ठीक उसके दूसरे दिन देश के गिने-चुने अखबारों को छोड़कर ज्यादातर अखबारें, उसके अंदर काम करनेवाले लोग और उनके समर्थक बजट के पक्ष में जय-जयकार करते नजर आते हैं, इस बार भी नजर आये।

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