हमको माला पहनने के लिए बहुत समय हैं, पर प्रेस क्लब आने और इसके उत्थान के लिए समय नहीं
हमारे पास समय नहीं हैं, हम इतना समय प्रेस क्लब को नहीं दे सकते, केवल महत्वपूर्ण समयों पर जब हमें चीफ गेस्ट बनायेंगे तो चेहरा दिखाने के लिए आ जायेंगे, ये सोच हैं रांची प्रेस क्लब में पदाधिकारी बने कुछ नवनिर्वाचित साहबों का। ये पत्रकारों के वोट से पदाधिकारी बने, पर अब इन्हें पत्रकारों और रांची प्रेस क्लब को कैसे सम्मान दिलाएं, इसके लिए इनके पास समय नहीं हैं।
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