अपनी बात

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सांसद परिमल नथवाणी के आदर्श ग्राम जरा टोली–बड़ाम गांव की हकीकत?

जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांसदों से एक-एक गांव गोद लेने की अपील की, तो झारखण्ड में भी बहुत सारे सांसदों ने एक-एक गांव गोद लेने की योजना बनाई। जिसमें सर्वाधिक रुचि ली राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने और इन्होंने देखते ही देखते कई गांव गोद लिये। बेचारे बहुत बड़े आदमी हैं, इनके पास समय नहीं होता, फिर भी सुना है कि ये कभी – कभी रांची आ जाते हैं

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कलक्टर बनने के लिए 100 और चपरासी बनने के लिए 500 रुपये का फार्म भरिये

‘भाइयों और बहनों, योग्यता के अनुरुप युवाओं को नौकरी मिलनी चाहिए या नहीं’, यह संवाद जैसे ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बिहार के विधानसभा चुनाव के दौरान बोलते हैं भीड़ से आवाज आती हैं – हां। ‘बेरोजगारों को नैसर्गिक न्याय मिलना चाहिए या नहीं, भीड़ से आवाज आती हैं’ – हां, पर जैसे ही नरेन्द्र मोदी सत्ता से चिपकते हैं, वे भूल जाते हैं कि उन्होंने बेरोजगार युवकों से कुछ वायदे भी किये थे।

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काश, भारत का युवा ‘मोदी-मोदी’ की जगह ‘देश-देश’ चिल्लाया होता

सचमुच अगर भारत का युवा ‘मोदी-मोदी’ की जगह ‘देश-देश’ चिल्लाया होता, तो देश की ऐसी नौबत नहीं होती, कोई नीरव मोदी, कोई विजय माल्या देश को धोखे में रखकर, अपना उल्लू सीधा कर, विदेश में जाकर नहीं बस जाता। हम भारतवासियों को किसी पर कुछ ज्यादा ही विश्वास हो जाता हैं, और यह विश्वास तब तक रहता है, जब तक वह हमें पूरी तरह से नंगा नहीं कर दें,

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ड्राइवर की सुझबूझ से धनबाद के पास तूफान एक्सप्रेस बर्निंग ट्रेन होने से बची

ड्राइवर विद्युत मंडल सह चालक अंकित कुमार की सुझबूझ के कारण धनबाद रेल मंडल में एक बहुत बड़ी दुर्घटना होते-होते बच गई। दरअसल हावड़ा-श्रीगंगानगर उद्यानआभा तूफान एक्सप्रेस की एसएलआर बॉगी में आग लग गई, जब वह थापरनगर केबिन से आगे की ओर निकली, चालक को जैसे ही आग लगने की सूचना मिली। उसने शीघ्रता से ट्रेन को रोककर, एसएलआर बॉगी को अलग किया और इस प्रकार तूफान एक्सप्रेस बर्निंग ट्रेन होने से बच गई

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कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के नाम पर कम से कम ईमानदारी बरतना जरुरी

अगर आज का प्रभात खबर आप देखें तो आपको प्रथम पृष्ठ देखते ही लगेगा कि प्रभात खबर ने क्रांति कर दी है, इस क्रांति में महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज्य की अवधारणा और डा. राम मनोहर लोहिया के अंतिम वंचित तबके को गांव में ही विकास की अवधारणा में परिभाषित करने के विचार को प्रवेश करा दिया गया हैं। बात सीएसआर इनिशिएटिव की हो रही है, सीएसआर इनिशिएटिव मतलब –

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प्रेस क्लब को जनसामान्य के बेटे-बेटियों की शादी के लिए भी अपना द्वार खोल देना चाहिए

जिन्हें भी अपने बेटे या बेटियों की शादी-विवाह समारोह संपन्न कराने के लिए स्थल की दिक्कतें आ रही हैं, वे रांची प्रेस क्लब में अपने बेटे या बेटियों की शादी संपन्न करा सकते हैं, शादी ही क्यों? मुंडन, चूड़ाकरण, बेटे-बेटी का इंगेजमेंट, डीजे का आनन्द या कोई पार्टी के लिए भी आप रांची प्रेस क्लब का इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि इसकी शुरुआत कल एक शादी समारोह से प्रारंभ हो चुकी हैं,

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अगर आप धनबाद जा रहे हैं, तो धनबाद जं. की बाहरी दिवारों पर नजर दौड़ाना मत भूलिये

धनबाद जंक्शन, जगमग कर रहा है। इसकी खुबसुरती इन दिनों बढ़ सी गई है, अगर आप धनबाद में हैं, तो धनबाद जंक्शन पर उकेरी गई, कलाकृतियों को देख, आप ये कहना नहीं भूलेंगे – अरे वाह धनबाद। धनबाद जंक्शन की इस खुबसुरती पर चार चांद लगा हैं, उसके बाहरी दीवारों पर की गई सोहराई पेंटिंग से और इस सोहराई पेंटिंग को मूर्त्तरुप दे रही हैं जयश्री इंदवार और उनकी टीम ने।

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सरकार और शिक्षकों के किये पाप, गरीब बच्चे भुगतेंगे, 9000 स्कूलों में लटकेगा ताला

एक समय था, सरकार स्कूल खोलती थी और आज सरकार स्कूल खोलती नहीं, बंद कराती हैं, क्योंकि देश में काफी बदलाव आया हैं। सरकार ने अब नई योजना बनाई हैं, जितना जल्द हो सके, स्कूलों को बंद करो, जो स्कूल बंद हो रहे हैं, वहां काम कर रहे लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट करो और स्कूलों में ताला लटका दो। ये कार्यक्रम जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां बड़ी तेजी से किया जा रहा हैं।

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काश मैं भी नीरव मोदी या विजय माल्या होता और इसका लाभ उठाता!

काश मैं भी नीरव मोदी या विजय माल्या होता, देश में ऐश करते हुए, अपने देश के लोगों को लूटता और फिर देश को चूना लगाकर विदेश में जाकर बसकर ऐश-मौज करता, पर क्या करुं, मेरे मां-बाप ने ऐसा करना नहीं सिखाया, इसमें मैं अपने मां-बाप को ही दोषी ठहराउंगा, आखिर उन्होंने ऐसा क्यों नहीं करना सिखाया? अगर सिखाया होता तो हम भी बम-बम हो गये होते।

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एक ही वर्ष में CM रघुवर दास के ‘मोमेंटम झारखण्ड’ की हवा निकल गई

17 फरवरी 2017, मुख्यमंत्री रघुवर दास का मोमेंटम झारखण्ड का अंतिम दिन। मुख्यमंत्री आह्लादित है, मुख्यमंत्री के हां में हां मिलानेवाले एक मंत्री को छोड़कर सारे मंत्री, अधिकारियों का दल, कनफूंकवों का समूह गद्गद हैं, उसे लग रहा है कि उन्होंने ऐसा काम कर दिया हैं, जो आज तक किसी ने किया ही नहीं, अब झारखण्ड में बेकारी, पलायन, भूखमरी, अशिक्षा, स्वास्थ्य की समस्या खत्म हो जायेगी।

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