एसिड अटैक की शिकार प्रियंका को बचाने के लिए उठे सैकड़ों शाकद्वीपीयों के हाथ

23 दिसम्बर 2017, गया का शेरघाटी। 22 वर्षीया प्रियंका मिश्रा को उसी के पति राजन मिश्रा ने एसिड डालकर उसकी हत्या करने की कोशिश की है। प्रियंका लगभग पूरी तरह से जल चुकी है। फिलहाल प्रियंका का इलाज सफदरगंज अस्पताल, नई दिल्ली में चल रहा हैं, और उसे बचाने के लिए पूरा शाकद्वीपीय समाज हृदय से लग चुका है।

23 दिसम्बर 2017, गया का शेरघाटी। 22 वर्षीया प्रियंका मिश्रा को उसी के पति राजन मिश्रा ने एसिड डालकर उसकी हत्या करने की कोशिश की है। प्रियंका लगभग पूरी तरह से जल चुकी है। फिलहाल प्रियंका का इलाज सफदरगंज अस्पताल, नई दिल्ली में चल रहा हैं, और उसे बचाने के लिए पूरा शाकद्वीपीय समाज हृदय से लग चुका है। अभी सभी की प्राथमिकता प्रियंका बचाने की हैं, उसके बाद उसे न्याय दिलाने तथा दोषियों को उसके किये की सजा दिलाने की है।

29 जनवरी को औरंगाबाद के वरिष्ठ पत्रकार धीरज पांडेय ने इस हृदय विदारक समाचार को शाकद्वीपीय बंधुओं के बीच रखा था। धीरज पांडेय ने बताया था कि प्रियंका की दो साल की बच्ची भी एसिड एटैक की शिकार हुई है, वह दो साल की बच्ची भी लापता है। प्रियंका के पिता  अशोक कुमार मिश्र को जब इस बात की जानकारी मिली तो वे बेसुध हो उठे, क्या करें और क्या न करें?  इसी सोच में वे पड़ गये। अपने दामाद के इस कुकृत्य तथा दी गई धमकी के डर से अशोक कुमार मिश्र ने प्राथमिकी भी दर्ज नहीं कराई। इधर एक महीने बाद शेरघाटी थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई हैं, पुलिस ने अनुसंधान शुरु कर दी है।

इधर जैसे ही इस घटना की जानकारी मगवाणी से प्रसारित हुई। इस समाचार को शाकद्वीपीय सहायतार्थ केन्द्र से जुड़े रामकृष्ण मिश्र ने सुना और वे फिर प्रियंका की सहायता के लिए उनका हृदय हिलोरे मारने लगा। उन्होंने तुरंत दिल्ली की भास्कर संस्था के प्रवक्ता विवेकानन्द मिश्र से संपर्क किया और पूरी स्थिति की जानकारी दी। रामकृष्ण मिश्र ने ही विवेकानन्द मिश्र को बताया था कि प्रियंका को तत्काल तीन यूनिट ब्लड की आवश्यकता है और जैसे ही विवेकानन्द मिश्र प्रियंका से मिलने पहुंचे, स्थिति बदल गई, सैकड़ों सेवा और सहयोग की हाथ एक शक्ति बनकर प्रियंका को बचाने में लग गये।

भास्कर संस्था से जुड़े प्रणव मिश्र ने शीघ्र एक एकाउंट और पेटीएम नंबर जारी किया और फिर शुरु हुआ, प्रियंका को आर्थिक सहयोग देने का सिलसिला। यह एकाउंट नंबर था 6580000100003652, पंजाब नेशनल बैंक, रोहिणी सेक्टर 11 ब्रांच आइएफएस कोड PUN0658000 और पेटीएम नंबर था – 8860603232.

विवेकानन्द मिश्र जब पहली बार प्रियंका से मिले थे तब प्रियंका ने विवेकानन्द को हाथ पकड़ लिया था और दो शब्द कहे थे – “आप मत जाइये यहां से। बहुत दर्द हो रहा है। बचा लीजिये अंकल।” खुशी इस बात की है कि इस सेवा के पूर्व एनजीओ से जुड़े एक मानवाधिकार संगठन चला रहे भास्कर अग्रवाल की भूमिका की भी सराहना करनी होगी, जो बिना किसी स्वार्थ के प्रियंका को बचाने के लिए आगे निकल पड़े थे तथा प्रियंका की इलाज के लिए हर संभव प्रयास किया है।

प्रियंका के पिता अशोक कुमार मिश्र ने बताया है कि उनकी बेटी मौत से जुझ रही हैं, पर शाकद्वीपीय समाज द्वारा उसे बचाने के लिए जिन लोगों ने मुक्तरुप से सेवा और सहयोग देना प्रारंभ किया है, वह अद्भुत है। इधर भास्कर दिल्ली की ओर से प्रियंका के परिवार को बीस हजार रुपये तथा सार्वभौम शाकद्वीपीय ब्राह्मण महासभा झारखण्ड की ओर से पांच हजार रुपये दिये गये हैं। दूसरी ओर देश के विभिन्न कोनों से प्रियंका को बचाने के लिए दुआ/प्रार्थनाओं का दौर जारी है। कई लोगों ने गुप्त रुप से आर्थिक मदद की है, जबकि कई ने विभिन्न प्रकार से आर्थिक मदद दी है, जो अभी तक जारी है।

रविवार यानी 4 फरवरी को देव में मग महोत्सव कमेटी की ओर से देव स्थित सूर्य मंदिर में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित होगा, जिसमें प्रियंका को बचाने के लिए विशेष प्रार्थना की जायेगी। इस बात की जानकारी धीरज पांडेय ने दी है। उन्होंने यह भी कहा है कि जब तक वे दोषियों को सजा नहीं दिला देते, वे चैन से नहीं बैठेंगे।

2017-18 में दो घटनाएं ऐसी घटी है, जिससे शाकद्वीपीय समाज के अंदर व्याप्त करुणा और सहयोग की भावना देखी जा रही हैं। एक रांची के शैलेन्द्र पांडेय के बेटे को बचाने की घटना और दूसरी प्रियंका को बचाने के लिए शाकद्वीपीय समाज द्वारा चलाये जा रहे यह विशेष अभियान। लोगों का कहना है कि जिस समाज में करुणा, सेवा और दया है, भला उस समाज में गलत लोग कैसे रह सकते है? देखियेगा जिस किसी ने प्रियंका के साथ गलत किया है, वे जल्द ही समाज के कोपभाजन बनेंगे और उन्हें कानून दंडित करेगा। फिलहाल नई दिल्ली की भास्कर संस्था को सलाम, सलाम उन सभी को, जिन्होंने प्रियंका को बचाने के लिए अपनी सारी शक्ति लगा दी है।

Krishna Bihari Mishra

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