“2019 में आर या पार, कभी न दिखे मोदी सरकार”

जैसा कि हर बार होता है, जिस दिन केन्द्र और राज्य सरकार बजट पेश करती है, ठीक उसके दूसरे दिन देश के गिने-चुने अखबारों को छोड़कर ज्यादातर अखबारें, उसके अंदर काम करनेवाले लोग और उनके समर्थक बजट के पक्ष में जय-जयकार करते नजर आते हैं, इस बार भी नजर आये।

आज जैसे ही सुबह उठा, अखबारों पर नजर पड़ी, जैसा कि हर बार होता है, जिस दिन केन्द्र और राज्य सरकार बजट पेश करती है, ठीक उसके दूसरे दिन देश के गिने-चुने अखबारों को छोड़कर ज्यादातर अखबारें, उसके अंदर काम करनेवाले लोग और उनके समर्थक बजट के पक्ष में जय-जयकार करते नजर आते हैं, इस बार भी नजर आये।

उन्हें ये भी नहीं पता होता कि एक सामान्य आदमी बजट से क्या-क्या आशाएं रखा था? या बजट पेश कर रही सरकार ने एक सामान्य व्यक्ति से कौन-कौन से वायदे किये थे? बस वह सिर्फ यहीं जानता है कि बजट की जय-जयकार करनी है, क्योंकि पानी में रहकर कोई मगर से वैर कैसे कर सकता है? भला सरकार से लड़ने की हिम्मत किस अखबार के मालिक में हैं? आखिर उन्हें भी अपने गैर-कानूनी धंधों को मूर्त्तरुप देना हैं या नहीं, अथवा सरकार से फायदा लेना है या नहीं, राज्यसभा का मुंह देखना हैं या नहीं।

जरा देखिये, केन्द्र सरकार के बजट को, वह किन-किन लोगों का ख्याल रखी है, वह हमारे माननीय राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपालों, जिनकी वेतन बहुत ही कम थी, बेचारों की हालत खराब थी, घर नहीं चल रहा था, उन पर इस बजट पर कृपा बरसायी हैं, क्या आपको पहले मालूम था कि बजट में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों की भी खोज-खबर ली जाती है, आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कृपा से देश के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सारे देशवासियों को बताया, उस अरुण जेटली ने जिसे जनता ने 2014 के लोकसभा के चुनाव में संसद में भेजने से मना कर दिया था।

यहीं नहीं देश की संसद में बैठनेवाले हमारे गरीब सांसदों, जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय थी, उन पर भी अरुण जेटली ने कृपा बरसायी है और उनकी वेतन में वृद्धि कराई है, साथ ही हर पांच साल पर महंगाई के अनुसार स्वतः वेतन वृद्धि की भी अनुशंसा कर दी है, यानी हमारी सरकार कितनी अच्छी है, जो देश की 125 करोड़ की आबादी में से मुट्ठी भर लोगों की आर्थिक समृद्धि की चिंता करती है। अभिनन्दन करिये, ऐसे प्रधानमंत्री और ऐसे वित्तमंत्री का और ऐसी भाजपा सरकार का, जो महिलाकर्मियों की पीएफ में 12 प्रतिशत कटौती होती थी, उसे घटाकर 8 प्रतिशत कर दिया, अब जब कल उक्त महिलाकर्मी अवकाश प्राप्त करेगी तो उसके हिस्से में क्या आयेगा? आप समझते रहिये।

देश में हर साल एक करोड़ 70 लाख लोगों को नौकरियां चाहिए, पर सरकार मात्र 70 लाख लोगों को नौकरियां देगी, ये खुद सरकार कह रही है, जरा सोचिये, इस सरकार ने 2014 में चुनाव के समय क्या वायदे किये थे? देश की आबादी 125 करोड़ और उनमें से मात्र 1000 युवाओं को बीटेक करने के लिए पीएम फैलोशिप दी जायेगी, अगर कोई युवा अपना रोजगार शुरु करना चाहता है तो उसके लिए मात्र तीन लाख रुपये की फंड! पेट्रोल पर जितना ड्यूटी घटाई, उतना सेस बढ़ा दिया, यानी यह सरकार यहां की जनता को महालोल समझती है।

इस सरकार ने होम लोन तक की चर्चा नहीं की, यहीं नहीं इसने मध्यम वर्गीय परिवारों को ठेंगे पर रखा, शायद मोदी सरकार मानती है कि मध्यमवर्गीय परिवारों की औकात क्या? वोट तो उन्हें बड़े-बड़े कारोबारियों की कृपा से प्राप्त होते हैं, इसलिए मध्यमवर्गीय परिवारों को बुखार छुड़ाओं और नेताओं-पुंजीपतियों की जय-जयकार कराओं और लगे हाथों 2019 की लोकसभा चुनाव पर विजय पा लो, पर मोदी को नहीं पता कि इस बार मध्यमवर्गीय परिवारों ने संकल्प कर लिया है कि “2019 में आर या पार, कभी न दिखे मोदी सरकार”।

Krishna Bihari Mishra

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