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भाजपा के हिन्दुत्व को ठिकाने लगाने में लगे कांग्रेसी, राहुल को बताया असली ब्राह्मण एवं शिवभक्त

इधर पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस पार्टी के लोगों को हिन्दुत्व खुब रास आने लगा  हैं। पूर्व में कहीं अल्पसंख्यक न बिदक जाये, तुष्टिकरण को ही सब कुछ मानकर चलनेवाली, कांग्रेस को आजकल ब्राह्मण बहुत प्रिय लगने लगे हैं, उनके दिलों में गोभक्ति भी उड़ेल मार रही हैं और रही बात कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की कैलाश मानसरोवर यात्रा की,

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सभी के दिलों पर राज करनेवाले भाजपा कार्यकर्ता गामा सिंह सभी को छोड़कर चल दिये

आज रांची का एक-एक भाजपा कार्यकर्ता दुखी हैं, भाजपा कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि वे लोग भी दुखी हैं, जो गामा सिंह को जानते थे। गामा सिंह भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता थे, चाहे वे महत्वपूर्ण पद पर रहे या न रहे, दोनों अवस्थाओं में पार्टी के लिए व पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए समर्पित रहनेवाले व्यक्तित्व का नाम था – गामा सिंह।

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क्या झारखण्ड इसीलिए बना था कि आदिवासी महिलाएं किसी के पैरों पर गिरकर आंसू बहांयेगी?

साहेब चीन गये हैं। वहां जाकर शंघाई टावर देखेंगे और रांची में वैसा ही टावर आकर बनवायेंगे, जिसके बनते ही सारा समस्या छू मंतर हो जायेगा। इधर झारखण्ड के अखबारों व अन्य मीडिया को लंद-फंद न्यूज चलाने/छापने से फुर्सत नहीं हैं, ऐसे में इन्हें फुर्सत कहां कि वे गोड्डा के माली गंगटी गांवों के आदिवासियों के दर्द को अपने चैनल या अखबारों में जगह दे पाये।

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रांची को रहनेलायक नहीं छोड़ा, और जनाब शंघाई टावर के तर्ज पर टावर बनायेंगे?

एक लोकोक्ति हैं,  हसुआं के ब्याह में खुरपी के गीत। लोगों को जरुरत हैं मकान की, लोगों को जरुरत हैं सड़क जाम से मुक्ति की, लोगों को जरुरत हैं बिजली की, पानी की, लोगों को जरुरत हैं बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की, बेहतर शिक्षा की और जनाब ये सारा कुछ छोड़कर रांची में शंघाई टावर के तर्ज पर एक टावर बनाने की सोच रहे हैं?

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धनबादः पहले ट्रेनें छीनीं, अब बिजली-पानी भी छीन ली, जनता ने कहा, क्या हम जीना छोड़ दें?

जब सरकार बेशर्म होती हैं, तो लोग बिजली एवं पानी के लिए इसी तरह तरसते हैं। पूरा कोयलाचंल बिजली और पानी के लिए छटपटा रहा हैं, पर रघुवर सरकार को शायद इनकी व्यथा सुनाई नहीं दे रही। जनता और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर गये, पर राज्य सरकार को इसकी कोई सुध नहीं, भाजपा और उनके स्थानीय नेता-कार्यकर्ता घरों में दुबके हैं,

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रांची रेलवे कॉलोनी की सड़कें बदहाल, रेलवे के वरीय अधिकारियों को इससे कोई मतलब नहीं

रांची जंक्शन के दक्षिण में हैं रेलवे कॉलोनी, जहां बड़ी संख्या में रेलवे में कार्य करनेवाले टीटीई, स्टेशन मास्टर, गार्ड, व फोर्थ ग्रेड के रेलवे कर्मचारियों का परिवार रहता हैं, पर सच्चाई यह है कि ये सारे रेलवे कर्मचारियों के परिवारों की जिन्दगी नरकमय बनी हुई हैं, उनकी ओर देखने की फुर्सत किसी को भी नहीं।

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पत्रकार या नमूना, ईटीवी भारत के प्रवीण बागी ने एक हत्या को प्राकृतिक न्याय बता दिया

जब नमूना ‘पत्रकार’ बनता है, तो ऐसे ही विचार आते हैं। कल उत्तर बिहार में एक बहुत बड़ी घटना घट गई। सीतामढ़ी कोर्ट में एक कुख्यात अपराधी संतोष झा की, कुछ अपराधियों ने मिलकर हत्या कर दी। इस हत्या का समाचार सुनते ही समाज के कई वर्गों ने राहत की सांस ली। बताया जाता है कि संतोष झा उत्तर बिहार में आतंक का पर्याय बन चुका था।

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एक कैंसर पीड़ित पत्रकार के साथ विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका ने किया घोर अन्याय

हाँ तो हम बात कर रहे थे, न्यायालय और न्याय प्रक्रिया की, जिसके अधिष्ठाता जज होते हैं। उनके कार्य की कोई आलोचना नहीं की जा सकती, लेकिन ये तो बताया जा सकता है कि कार्य उन्होंने क्या किया? कि ये भी बताया नहीं जा सकता। 23/24 अप्रैल 2012 को रांची शहर के राजमार्ग पर सहजानंद चौक के पास एक उम्रदराज गरीब आदिवासी महिला के साथ सरे शाम दुष्कर्म हुआ

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जब न्यायालय गलत करें, तो ‘गांधी’ और ‘तिलक’ की तरह उसका विरोध करें, सच दिखाएं

जमाने बाद मालूम हुआ आज, एडिटर्स गिल्ड जिन्दा है। उसने मुजफ्फरपुर मास-रेप की रिपोर्टिंग पर पटना हाई कोर्ट के प्रतिबन्ध की आलोचना की है। होना तो ये चाहिए कि भारत में न्यायपालिका और न्यायाधीशों को मिले विशेषाधिकारों की रिव्यू हो। अगर न्यायाधीश गलती करे तो आप उसके खिलाफ कुछ नहीं बोल सकते, भला क्यों? सवाल है अगर गलती करे तो?

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सच हो रही पीएम मोदी की बात, नाले की गैस से चाय बनानेवालों की संख्या बढ़ रही हैं…

याद करिये, कोई ज्यादा दिनों की बात नहीं, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व  जैव-ईंधन दिवस के दिन एक अपना संस्मरण सुनाया था, कि कैसे एक नाले के निकट बैठनेवाला चाय दुकानदार, नाले से निकलनेवाली गैस के माध्यम से अपना चुल्हा जलाता और चाय बनाकर लोगों को देता था, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ये बातें कहीं, ठीक उनके कहने के बाद ही, जैसा कि भारत में होता हैं,

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