हेमन्त सोरेन की झारखण्ड संघर्ष यात्रा में उमड़ रहे जनसैलाब ने भाजपाइयों की उड़ाई नींद

नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन को भी अनुमान नहीं होगा, कि उनकी इस झारखण्ड संघर्ष यात्रा में आम जनता इस कदर भाग लेगी, अपना समर्थन देगी, आशीर्वाद देगी और कदम से कदम मिलाकर चलेगी भी। दरअसल राज्य में जो सरकार चल रही है, उसने अपना विश्वास खो दिया है, और जब आप जनता का विश्वास खोयेंगे तो सच्चाई यह भी है कि जनता को जिस पर विश्वास होगा, उस ओर वह मुड़ने का प्रयास करेगी और उस पर विश्वास जतायेगी।

नेता प्रतिपक्ष हेमन्त सोरेन को भी अनुमान नहीं होगा, कि उनकी इस झारखण्ड संघर्ष यात्रा में आम जनता इस कदर भाग लेगी, अपना समर्थन देगी, आशीर्वाद देगी और कदम से कदम मिलाकर चलेगी भी। दरअसल राज्य में जो सरकार चल रही है, उसने अपना विश्वास खो दिया है, और जब आप जनता का विश्वास खोयेंगे तो सच्चाई यह भी है कि जनता को जिस पर विश्वास होगा, उस ओर वह मुड़ने का प्रयास करेगी और उस पर विश्वास जतायेगी।

जिस प्रकार से रघुवर दास के शासनकाल में, झारखण्ड में झूठ ने अपने पांव फैलाये है, उस झूठ का गुब्बारा अब फटने लगा है, लोगों को लग रहा है कि इस सरकार ने झूठ के महल खड़े किये है, जिस महल को ढाना आवश्यक हो गया है, यहीं कारण है कि हेमन्त सोरेन की झारखण्ड संघर्ष यात्रा जैसे-जैसे आगे की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे लोगों की भीड़ भी बढ़ती जा रही है तथा झामुमो कार्यकर्ताओं में गजब का उत्साह भी देखने को मिल रहा है।

जमशेदपुर में कार्यरत कई पत्रकारों ने बताया कि आज के समय में हेमन्त को नजरन्दाज करना किसी के बूते की बात नहीं, पर जिस प्रकार से राजधानी रांची से प्रकाशित अखबारों व चैनलों में झारखण्ड संघर्ष यात्रा को स्थान नहीं मिल रही है, वह बताता है कि राज्य सरकार का दबाव इन अखबारों व चैनलों पर हैं, वे नहीं चाहते कि रघुवर दास नाराज हो, और उनका कोपभाजन अखबार या चैनल बने और उस पर मिल रहे विज्ञापन पर प्रतिबंध लग जाये।

राज्य सरकार तो, यहां अपना चेहरा चमकाने के चक्कर में ऐसे-ऐसे अखबारों पर भी नजराना लूटा रही है, जो रांची क्या झारखण्ड के किसी भी शहर में दिखाई नहीं देते, फिर भी उनके तथाकथित संपादकों की कनफूंकवों के साथ हुई साझेदारी-मित्रता ने गजब ढाया है, ऐसे अखबारों के चिरकूट संपादक, करोड़ों में खेल रहे हैं, इनका काम सिर्फ यहीं है, रघुवर दास की जय-जय करना। ठीक इसके उलट इन सबसे बेखबर हेमन्त सोरेन ने एक बहुत ही सुंदर प्लान पर काम किया और उसका परिणाम देखने को भी मिल रहा है, झारखण्ड संघर्ष यात्रा जिस ओर से निकल रही है, सड़क के दोनों किनारे खड़ी जनता अपने नेता का अभिवादन करने, उनकी बात सुनने के लिए अपने घरों से निकल रही है।

संघर्ष यात्रा में शामिल एक युवा रणधीर साफ बताता है कि यह यात्रा आनेवाले समय में मील का पत्थर साबित होगा, क्योंकि जो समर्थन कोल्हान में झामुमो को मिल रहा है, ऐसा ही समर्थन हर प्रमंडल में मिलने की उम्मीद है, क्योंकि राज्य के आदिवासी हो या मूलवासी या झारखण्ड में रहनेवाले सामान्य लोग सभी ने हेमन्त सोरेन को अब अपना नेता मानना शुरु किया है, जो पूर्व में ऐसा देखने को नहीं मिलता था।

संघर्ष यात्रा के नायक हेमन्त सोरेन की बात करें तो वे गदगद है, सोनुआ पहुंचने पर जिस प्रकार जनता ने उत्साह के साथ स्वागत किया और उनके संघर्ष को आशीर्वाद दिया, वह देखनेलायक रहा। यहीं नहीं किरिबूरु हो या छोटा नागरा या मनोहरपुर सभी जगहों में जनता द्वारा मिल रहा प्यार बता रहा है कि आनेवाला समय किसका है। मनोहरपुर में वे जनता द्वारा मिले समर्थन से गदगद हो कहते है कि झारखण्ड और झारखण्ड का विरोध करनेवाले चाहे कितने भी दल क्यों न हो, वे जो समझ रहे है कि वे अपराजेय हैं, शायद उन्हें झारखण्ड के इतिहास की जानकारी नहीं, वे झारखण्ड के इतिहास को पढ़ लें, संघर्ष यात्रा में उमड़ रही भीड़ बता रही है, आनेवाला समय किसका है? भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों को हराना है, नया झारखण्ड बनाना है, जिसमें सभी के सम्मान सुरक्षित हो, जिसमें सभी को सम्मान के साथ जीने का अधिकार हो, कोई बड़ा या छोटा का भेदभाव नहीं हो, महिलाओं का सम्मान, अपनी बेटियों को उसका हक, अपने ग्रामीण भाइयों के जल-जंगल-जमीन सुरक्षित हो।

इधर विद्रोही 24.कॉम ने देखा कि जगन्नाथपुर में संघर्ष यात्रा पहुंच रही है, हेमन्त को सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हैं, हेमन्त उन्हीं की भाषा में लोगों से बात करते है, लोग मुस्कुराते है, और हाथ उठाकर उनका अभिवादन स्वीकार करते है, बड़ी संख्या में तीर-धनुष और परंपरागत हथियार से लैस ग्रामीण एवं युवा हेमन्त सोरेन और झामुमो जिन्दाबाद का नारा लगाते है।

वे जहां-जहां जा रहे है, लोगों को बता रहे है कि भाजपा ने कैसे झारखणड के बर्बाद किया है, वे बताते है कि अगर ये सिलसिला चलता रहा तो झारखण्ड रहेगा, पर झारखण्डी ही नहीं रहेंगे, इसलिए लोग चेते, 2019 याद रखे, तीर-धनुष याद रखे, किसी पचड़े में नहीं पड़े, इस झारखण्ड को बनाने के लिए लोग बाहर से नहीं आयेंगे, हमसब को झारखण्ड बनाना पड़ेगा, लोग जय झारखण्ड कहकर समर्थन देते हैं, इधर झारखण्ड संघर्ष यात्रा को मिल रहे अपार समर्थन से बुद्धिजीवियों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो भाजपा, झारखण्ड से कबर जायेगी, क्योंकि झारखण्ड में हेमन्त के टक्कर का फिलहाल भाजपा में कोई नेता नहीं है, ले-देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी है, वे भी अब अपनी विश्वसनीयता खो चुके है, इसलिए राज्य में हेमन्त सोरेन लोकप्रियता में सभी दलों से आगे हैं।

Krishna Bihari Mishra

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