जिन्होंने देश की सीमा की रक्षा कर रहे जवानों की सुख-चैन छीन ली, वे ‘पराक्रम पर्व’ मनाने को कह रहे हैं

लीजिये, अब ‘पराक्रम पर्व’ मनाइये, क्योंकि दिल्ली सत्तापीठाधीश्वर, देश के एकमात्र ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, देशभक्त, भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया है। हमारे देश के इस एकमात्र देशभक्त प्रधानमंत्री को कल दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ है, जैसा कि प्राचीन काल में हमारे मणीषियों को हुआ करता था, उन्हें पता चला है कि दो साल पूर्व में जो इनके शासनकाल में सर्जिकल स्ट्राइक हुआ था, उससे एक संदेश पूरे विश्व के देशों को गया है।

लीजिये, अब पराक्रम पर्व मनाइये, क्योंकि दिल्ली सत्तापीठाधीश्वर, देश के एकमात्र ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ, देशभक्त, भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया है। हमारे देश के इस एकमात्र देशभक्त प्रधानमंत्री को कल दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ है, जैसा कि प्राचीन काल में हमारे मणीषियों को हुआ करता था, उन्हें पता चला है कि दो साल पूर्व में जो इनके शासनकाल में सर्जिकल स्ट्राइक हुआ था, उससे एक संदेश पूरे विश्व के देशों को गया है कि भारत निडर और सक्षम राष्ट्र है, पहले ऐसा संदेश नहीं गया था।

ये महाशय, आज स्वयं एक अपनी ओर से विज्ञापन निकलवाये है, जिस विज्ञापन में लिखा है, शूरवीरों को सलाम। दो साल पहले आज ही के दिन भारतीय सेना ने दुश्मन पर अप्रत्याशित तरीके से सर्जिकल स्ट्राइक करके, सारी दुनिया को एक कड़ा संदेश दिया था, वह संदेश था कि हम निडर और सक्षम राष्ट्र है।

पराक्रम पर्व, 28-30 सितम्बर तक मनाया जायेगा। दिल्ली में पराक्रम पर्व राजपथ लॉन, मानसिंह रोड, इंडिया गेट के करीब, मनाया जायेगा। जिसमें सैन्य बलों की प्रदर्शनी, सुखविंदर सिंह और आकाशवाणी के कलाकारों की संगीतमय प्रस्तुति, कैलाश खेर और आकाशवाणी के कलाकारों की संगीतमय प्रस्तुति भी होगी। अपने दिल्ली सत्तापीठाधीश्वर, अपने आका प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिव्य ज्ञान से प्रभावित होकर, झारखण्ड के अब तक के एकमात्र महान मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी विज्ञापन प्रकाशित करवाये है। जनाब, ये भी रक्षा प्रदर्शनी का उद्घाटन करने जा रहे हैं, जो रांची के आड्रे हाउस में आयोजित है।

हद हो गई, जैसे-जैसे लोकसभा के चुनाव के नजदीक आते जा रहे है, अपनी आसन्न हार को जीत में बदलने के लिए, दिल्ली सत्तापीठाधीश्वर नरेन्द्र मोदी, अपने तरकस से एक-एक कर तीर निकाले जा रहे हैं, पर अफसोस कि एक भी तीर उनके निशाने पर नहीं लग रहा, क्योंकि जनता उनके सारे ढपोरशंखी वायदों को जानकर, निर्णय ले चुकी है, कल तक जिनकी सभा में भीड़ खुद ब खुद आती थी, उनकी सभा में भीड़ जिला के उपायुक्तों व अन्य अधिकारियों द्वारा ढो-ढोकर मंगवाये जा रहे हैं, जब उनसे भी कुर्सियां नहीं भर रही, तो अधिकारियों और कर्मचारियों को बिठाकर, कुर्सियों को भरवाये जा रहे हैं।

ऐसा नहीं कि इस देश में भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक कर पहली बार अपना पराक्रम दिखाया है, और ऐसा भी नहीं कि भारत की जनता अपनी सेना पर बलिहारी नहीं जाती, पर इतना तो तय है कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह या झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के खानदान में कोई भी व्यक्ति सेना में अब तक बहाल नहीं हुआ होगा, या ये तीनों नेता अपने परिवार के सदस्यों को सेना में बहाल होने के लिए कभी कहते होंगे, क्योंकि ये तो वे लोग हैं, जो स्वीकार करते है कि सेना में तो लोग मरने के लिए ही जाते है, याद करिये बिहार के जदयू का वह नेता, जो इसी प्रकार का बयान दिया था, जिसकी आलोचना खुद दिल्ली सत्तापीठाधीश्वर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पटना की एक सभा में की थी, और फिर उसी जदयू के नेता को इसी भाजपा ने अपनी पार्टी में समाहित भी कर लिया। कितनी पवित्र सोच है, इन महान नेताओं की।

जरा सोचिये। एक मुख्यमंत्री है रघुवर दास, जो 23 सितम्बर को रांची की एक सभा में पीएम नरेन्द्र मोदी को बता रहे थे कि उन्होंने राज्य के एक किसानों का दल इजराइल भेजा है, ताकि वे वहां के किसानों की उन्नत खेती देखकर आये और अपने यहां पैदावार बढ़ाये, पर ये नहीं कहा कि हम खुद वहां जाकर यह देखना चाहते है कि इजराइल के नेता, कैसे अपने बेटों को देश के लिए मर-मिटने के लिए अपने देश की सेना में भर्ती कराने के लिए लालायित रहते है?

कमाल है पराक्रम पर्व मनानेवालों से पूछिये कि यह कैसा पराक्रम है कि राफेल जिसे बनाना चाहिए, उसे न देकर एक उदयोगपति को दे दिया जाता है। यह कैसा पराक्रम है कि इसी भाजपा का एक प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, जो अपने लिए और अपने जैसे नेताओं के लिए पेंशन की पुरानी व्यवस्था को कायम रखता है, उसका लाभ लेता है, और सीमा की सुरक्षा में लगे, जवानों वो चाहे सीमा सुरक्षा बल के जवान हो या सशस्त्र सीमा बल या भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस, असम राइफल्स या जम्मू कश्मीर में आंतकियों से लड़कर वीरगति प्राप्त हो रहे, सीआरपीएफ के जवान हो, उनसे पेंशन तक छीन लिया गया, यहीं नहीं उसे ये शहीद तक का दर्जा नहीं देते और ये पराक्रम पर्व मनाने की बात कर रहे हैं।

सच्चाई यह है कि इस देश के जवानों का सर्वाधिक नुकसान, चाहे वह सम्मान की बात हो या उनके हक की बात हो, इसी भाजपा ने पहुंचाया और अब सर्जिकल स्ट्राइक के नाम पर यह राजनीतिक माइलेज लेने की कोशिश कर रहा है, ये खुद को इस प्रकार शो कर रहा है, जैसे लगता है कि इसने पाकिस्तान या चीन पर जीत हासिल कर ली हो, जबकि सच्चाई यह है कि इसी पार्टी के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में, संसद पर आतंकियों ने हमला बोला। इसी पार्टी के अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में सेना, सीमा से बिना युद्ध किये लौट आई। इसी पार्टी के अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में पांच सौ से भी ज्यादा जवान कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। इसी पार्टी के अटल बिहारी वाजपेयी के शासनकाल में ताबूत घोटाला हुआ।

हद हो गई, चलनी बन कर सूप को बार-बार जलील करनेवाले, अपने छेद को नहीं देख रहे, और चल दिये पराक्रम पर्व मनाने। जो कल तक कहे थे कि भ्रष्टाचारियों को जेल भेजेंगे। वे भ्रष्टाचारी कोर्ट से सदाचारी बनकर मुक्त हो रहे हैं, कॉमनवेल्थ घोटाला उसका सबूत है। जिन राबर्ट वाड्रा, राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर ये जमकर बरसते थे, आज इनकी हिम्मत नहीं कि ये उन्हें जेल भेजवा दे, जबकि इनके शासनकाल के मात्र अब कुछ ही महीने शेष है।

राजस्थान, मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ जैसे राज्यों में तो इनकी विदाई की सारी तैयारियां जनता ने कर ली है, फिर भी ये अपनी आसन्न हार को लेकर, पराक्रम पर्व के माध्यम से वोट की भीख मांगने की तैयारी कर ली है, पर क्या जनता इतनी मूर्ख है, कि वह इनके झांसों में आयेगी, या सबक सिखायेगी, वक्त का इंतजार करिये, जो होगा, ठीक ही होगा। फिलहाल दिल्ली और रांची सत्तापीठाधीश्वर के पराक्रम पर्व के विज्ञापनों का आनन्द लीजिये।

Krishna Bihari Mishra

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