हो गया आयुष्मान भारत का बंटाधार, लालपरी आयुष्मान कार्ड लेकर रिम्स में पन्द्रह दिनों से भटक रही, पर कोई सुन नहीं रहा

बेरमो चंद्रपुरा की लालपरी देवी परेशान है, उसका पति रिम्स में भर्ती है, पर उस गरीब लाचार की न तो कोई डाक्टर सुन रहा है और न ही नर्स। लालपरी देवी के पास लाल कार्ड भी है और आयुष्मान कार्ड भी, जिस कार्ड पर किसी भी मरीज का पांच लाख तक का इलाज मुफ्त हो सकता है, वह लाल कार्ड और आयुष्मान कार्ड लेकर मारी-मारी फिर रही है, पर डाक्टरों और यहां कार्यरत नर्स उसकी सुन नहीं रहा,

बेरमो चंद्रपुरा की लालपरी देवी परेशान है, उसका पति रिम्स में भर्ती है, पर उस गरीब लाचार की न तो कोई डाक्टर सुन रहा है और न ही नर्स। लालपरी देवी के पास लाल कार्ड भी है और आयुष्मान कार्ड भी, जिस कार्ड पर किसी भी मरीज का पांच लाख तक का इलाज मुफ्त हो सकता है, वह लाल कार्ड और आयुष्मान कार्ड लेकर मारी-मारी फिर रही है, पर डाक्टरों और यहां कार्यरत नर्स उसकी सुन नहीं रहा, वह जहां जाती है, उसके कागज को लोग लेकर फेंक देते है, वह बताती है कि कोई कहता है कि नहीं पढ़ी-लिखी तो जाओ बर्तन मांजो, यहां क्यों आ गई?

भ्रष्टाचार उन्मूलन संघ के लोगों को जब इस बात की जानकारी होती है, तो वे लालपरी देवी से बात करते है और उसके दर्दभरी दास्तान का विडियो बनाकर फेसबुक पर शेयर करते है, जिस बातचीत में लालपरी बताती है कि वह 18 सितम्बर को यहां रिम्स में आई, पर उसके दर्द को कोई सुन नहीं रहा, वह एक बच्चे को लेकर अपने पति के इलाज के लिए दर-दर भटक रही है, वह रिम्स आई तो उसे बताया गया कि उसके आयुष्मान कार्ड में बैलेंस नहीं है, इसलिए उसका मुफ्त इलाज नहीं हो सकता।

जब वह इलाज का खर्च डाक्टर से पूछी तो डाक्टर ने एक आदमी से उसे मिलने को कहा, डाक्टर के आदमी ने उसे कहा कि पचास हजार रुपये लगेंगे, अब वह पचास हजार कहां से लाये, खून की डिमांड थी तो वह चार हजार रुपये देकर खून भी खरीदी पर उसे खून खरीदने का रसीद भी नहीं दिया गया। वह क्या करें, समझ में नहीं आ रहा।

इसी बीच चन्द्रपुरा की जिला पार्षद नीतू सिंह के कहने पर डोरंडा निवासी रवि कुमार सिंह लालपरी देवी की मदद करने के लिए पहुंचे, और डाक्टर ने जिस आदमी से बात करने को लालपरी देवी को कहा था, उससे बातचीत की, तब पहले डाक्टर के उस आदमी ने, रवि कुमार सिंह से बातचीत की, जिसका ऑडियो टेप रवि कुमार सिंह के पास मौजूद है, पर दोबारा मोबाइल लगाने पर पता चला कि उसने अपनी मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया।

अब सवाल उठता है कि ऐसी योजना चलाने का क्या मतलब? जब लोगों को उसका लाभ ही नहीं मिले और दलालों तथा डाक्टरों के कारोबार पर उसका कोई असर ही न दिखे, जब सामान्य गरीब आदमी आयुष्मान भारत योजना लागू होने के बाद भी इसी तरह भटक रहा है, तो इसका मतलब है कि आयुष्मान योजना भी अन्य योजना की तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई, जिसका अंदाजा सभी ने पूर्व में ही लगा लिया था।

Krishna Bihari Mishra

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