CM बताएं कि वह कौन है, जो राज्य के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है, आखिर उसे कब दंडित किया जायेगा?

झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को राज्य की जनता को यह बताना चाहिए कि वह कौन है, जो राज्य के बच्चों के भविष्य के साथ खेल रहा है, जो नैतिक कविता के नाम पर बच्चों को अनैतिक बनाने पर तूला है, जो बच्चों के हाथों में भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को उलटा थमा देता है, जो जम्मू-कश्मीर को तीन टूकड़ों में बंटा हुआ दिखा देता है, आखिर इतनी बड़ी गलती कैसे हो जा रही है?

झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को राज्य की जनता को यह बताना चाहिए कि वह कौन है, जो राज्य के बच्चों के भविष्य के साथ खेल रहा है, जो नैतिक कविता के नाम पर बच्चों को अनैतिक बनाने पर तूला है, जो बच्चों के हाथों में भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को उलटा थमा देता है, जो जम्मू-कश्मीर को तीन टूकड़ों में बंटा हुआ दिखा देता है, आखिर इतनी बड़ी गलती कैसे हो जा रही है?

क्या ऐसे लोगों को दंडित नहीं किया जाना चाहिए, कि इसे भी भाजपा और जातिवाद के नाम पर क्षमा करने का विचार है, अगर ऐसा है तो इससे बड़ा दुर्भाग्य इस राज्य के लिए  दुसरा कुछ हो ही नहीं हो सकता।

इन दिनों पूरे राज्य में एक फोटो वायरल हो रहा है, यह फोटो राज्य के शिक्षा विभाग के अधिकारियों की पोल खोलकर रख दे रहा है, बताया जाता है कि राज्य सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा पंख योजना के तहत छपनेवाली मासिक पत्रिका के पेज नंबर 32 पर देश हमारा नामक कविता छपी है, जिसमें तीन बच्चों को तिरंगा को उलटा पकड़े हुए दिखाया गया है, जिसमें हरा रंग उपर, सफेद बीच में तथा भगवा रंग नीचे दिख रहा है।

यही नहीं इसी पृष्ठ पर जो भारत का नक्शा दिया गया है, उसमें सभी राज्यों को तो ठीक दिखाया गया है, पर जम्मू-कश्मीर को तीन भागों में बंटा हुआ दिखाया गया है, ऐसा क्यों किया गया? ये तो प्रकाशक एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दल ही बता  पायेगा या सरकार बतायेगी?

आश्चर्य इस बात की है कि तिरंगे को लेकर और जम्मू-कश्मीर को लेकर पूरे देश में उहापोह की स्थिति है, जम्मू-कश्मीर में प्रतिदिन हमारे जवान आतंकियों व पाकिस्तानी सेना से लोहा ले रहे है, कभी-कभी वीरगति को भी प्राप्त हो रहे हैं, पर जरा अपने राज्य में देखिये कि यहां की सरकार कैसे जम्मू-कश्मीर को तीन भागों में बंटा हुआ दिखा देती है?

यही नहीं एक अखबार हिन्दुस्तान ने तो 17 सितम्बर के अंक में, अपने संपादकीय पृष्ठ पर जम्मू-कश्मीर के पाक अधिकृत कश्मीर को पाकिस्तान में मिला हुआ दिखा दिया था और इस कुकर्म पर न तो हिन्दुस्तान ने भारतीय पाठकों से माफी मांगी और न ही सरकार के किसी व्यक्ति ने अखबार की क्लास ली, अगर यहीं पाकिस्तान रहता और वहां ऐसी हरकत हो गई होती तो क्या होता? समझा जा सकता है।

पर चूंकि भारत एक ऐसा देश हैं कि आप तिरंगा को उलटा लटका दिजिये, या तिरंगे के रंगों में उलट-फेर कर दिजिये, जैसे भगवा को नीचे और हरा रंग को उपर कर दिजिये, कश्मीर को पाकिस्तान में दिखा दिजिये या जम्मू-कश्मीर को तीन भागों में बंटा हुआ दिखा दिजिये, आपको यहां की सरकार कुछ नहीं करेगी, उलटे आपको सम्मानित भी करेगी।

पर जहां सरकार को आइना दिखाने की कोशिश आप किये तो आपको ऐसा सबक सिखायेगी कि पूछिये मत, यानी देश के तिरंगे व देश के सम्मान से भी बड़ा सम्मान, यहां की सरकार का है, आप भले ही देश के सम्मान के साथ खेल जाइये, पर सरकार और सरकार में शामिल नेताओं से उलझने की कोशिश भी मत कीजिये, चाहे आप सत्यनिष्ठ ही क्यों न हो?

Krishna Bihari Mishra

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हे ईश्वर, झारखण्ड के CM को सदबुद्धि प्रदान करें, नहीं तो झारखण्ड तबाह हो जायेगा, बर्बाद हो जायेगा

Thu Oct 4 , 2018
सचमुच, ये झारखण्ड बर्बाद हो जायेगा। जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दो से तीन घंटे के कार्यक्रम के लिए करोड़ों फूंक दिये जाते हो। जहां पांच मिनट का गाना लिखने के लिए राज्य का कला संस्कृति सचिव मनीष रंजन तीन करोड़ रुपये की भुगतान की बात करने के लिए वित्त विभाग को फाइल बढ़ा देता हो। जहां संघ की एक आनुषांगिक संगठन प्रज्ञा प्रवाह (जिसे सीएम रघुवर दास की पॉकेटी संस्था भी कहा जाता है) उसके कार्यक्रम के लिए विज्ञापन पर करोड़ों बहा दिये जाते हो तथा कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए चार करोड़ रुपये अलग से मुकर्रर किये जाते हो।

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