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भारतीय नक्षत्र कह रहे हैं, झमाझम नहीं, टूकड़ों में बरसेंगे, सामान्य बरसेंगे…

ऐसे तो भारत का मौसम विभाग बारिश को लेकर अपना तर्क देता ही रहता हैं, पर हमारे भारतीय मणीषियों ने भी नक्षत्रों के आधार पर बारिश कैसा होगा? इसका पूर्वानुमान लगा लिया करते थे, तथा उसी अनुरुप कृषि क्षेत्र में लगे लोगों तथा व्यापारिक क्षेत्र में लगे लोग, अपनी आगे की योजना बना लिया करते, आश्चर्य यह भी है कि भारतीय मणीषियों का कथन व पूर्वानुमान सटीक भी बैठता था।

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रांची जं. की साफ-सफाई देखकर आश्चर्यचकित हो रहे रेलयात्री, कह रहे लव यू रांची

राजधानी एक्सप्रेस से अनुपमा अभी-अभी रांची जंक्शन उतरी है, वह प्लेटफार्म पर उतरते ही, आश्चर्य में डूब गई और अपनी मां से कहा – ओ मां, देखो तो ये स्टेशन कितना साफ-सुथड़ा हैं, इतनी साफ-सफाई तो नई दिल्ली जं. पर भी नहीं हैं, नई दिल्ली क्या? दिल्ली के किसी भी स्टेशन पर चाहे सब्जी मंडी हो, या ह. निजामुद्दीन, या सराय रोहिल्ला, या आनन्द विहार, कहीं भी इतनी साफ-सफाई नहीं,

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देश का पहला “कारीगर पंचायत” रांची में एक जुलाई से, जूटेंगे देश भर के कारीगर

भारत में अपनी तरह का पहला कारीगर पंचायत रांची में एक जुलाई से प्रारंभ होगा। जिसका उद्घाटन राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास करेंगे। इस कारीगर पंचायत में जनजातीय कल्याण मंत्री सुदर्शन भगत, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग भारत सरकार के अध्यक्ष विनय कुमार सक्सेना, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के सदस्य अशोक भगत प्रमुख रुप से भाग लेंगे।

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खूंटी में समाचार संकलन करने के लिए निकले पत्रकारों ने “भूत” के साथ सेल्फी ली

खूंटी में पिछले कई दिनों से समाचार संकलन करने के लिए रांची से गये पत्रकारों को खूंटी का एक गांव “भूत” बहुत रास आया। इन पत्रकारों ने खूब गांव के बोर्ड “भूत” के पास जाकर सेल्फी ली और इसे अपने-अपने सोशल साइट्स पर दे डाला। जिस पर रिएक्शन भी खूब आ रहे हैं। ऐसे भी झारखण्ड का हर इलाका खुबसूरत हैं,

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ले लोट्टा, यहां तो सांसद का फोन मुख्यमंत्री का प्रधान सचिव ही नहीं उठाता है

विपक्षी दल को छोड़िये भाई, कहने को तो सभी कहेंगे कि वे तो विपक्षी दल के लोग हैं, उनका काम ही हैं, सरकार की बखियां उधेड़ना, पर यहां तो हद हो गई, यहां भाजपा का कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि यहां तो भाजपा का सांसद भी अपनी किस्मत पर रोता हैं, क्योंकि उसका फोन मुख्यमंत्री का प्रधान सचिव तक नहीं उठाता हैं, क्या हाल हो गया बेचारे सांसद का।

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जरा सोचिये, अगर पत्थलगड़ी समर्थक कड़िया मुंडा को अगवा कर लेते तो क्या होता?

जो पत्थलगड़ी समर्थक भाजपा सांसद कड़िया मुंडा के तीन अंगरक्षकों को अगवा कर सकते हैं, क्या वे भाजपा सांसद एवं पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा को अगवा नहीं कर सकते थे, जो राज्य सरकार के समान्नांतर सत्ता चला रहे हैं, जो अपने इलाकों में किसी को भी प्रवेश करने नहीं देते, जहां पुलिस को जाने में जद्दोजहद करनी पड़ती है,

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रांची को लहकने से बचाने के लिए सीसीटीवी खंगालिये, कानून का राज स्थापित करिये

आप माने या न मानें, झारखण्ड में शासन नाम की कोई चीज ही नहीं, क्योंकि कहीं नक्सलियों ने, तो कही पत्थलगड़ी समर्थकों ने, तो कही असामाजिक तत्वों ने राज्य के विभिन्न शहरों व गांवों को अपने गिरफ्त में ले लिया हैं और ये जो चाहे वो कर रहे हैं और जनाब सीएम रघुवर दास को विकास, भ्रष्टाचार मुक्त, पारदर्शी शासन संबंधित बयानबाजी और विपक्षी दलों को गाली देने से उन्हें फुर्सत नहीं।

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झारखण्ड में अघोषित आपातकाल, CM के खिलाफ बोलना युवाओं को पड़ रहा महंगा

झारखण्ड (हालांकि ज्यादातर लोग पूरे देश में अघोषित आपातकाल होने की बात करते हैं।) में अघोषित आपातकाल चलानेवाले आज 25 जून 1975 के दिन श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा लागू किये गये आपातकाल की 43 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, वह भी व्यापक स्तर पर। हम आपको बता दे कि ये 25 जून कोई पहली बार नहीं आया है, हर साल आता हैं,

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PM नरेन्द्र मोदी जी, संभल के, कहीं आपातकाल के चक्कर में दांव उल्टा न पड़ जाये…

भारत सरकार के डीएवीपी ने आज एक विज्ञापन जारी किये हैं, जो आपातकाल से संबंधित हैं। इस विज्ञापन से केन्द्र सरकार ने कांग्रेस को निशाने पर लिया है,तथा इसके माध्यम से एक बार फिर कांग्रेस पार्टी को जनता की नजरों में नीचा दिखाने की कोशिश की है। ऐसा नहीं कि आपातकाल में सब कुछ गलत था, या आपातकाल से देश को नुकसान हो गया।

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विश्वनाथ प्रताप सिंह, पिछड़ों का मसीहा, जो न घर का रहा, न घाट का

कल पूर्व प्रधानमंत्री एवं पिछड़ों के मसीहा वी पी सिंह का जन्म दिन था। हमें लगा कि कल उनके चाहनेवाले, तथा उनके नाम पर कभी राजनीति करनेवाले, या उनके नेतृत्व को स्वीकार करनेवाले, उन्हें दिल से याद करेंगे, पर झारखण्ड ही नहीं, बल्कि देश के किसी भी भाग में, ऐसा कही भी देखने को नहीं मिला। बिहार की राजधानी पटना में सिर्फ एक कार्यक्रम आयोजित किया गया,

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