अपनी बात

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रक्षाबंधन के मर्म को समझिये, केवल इसे भाई-बहन तक सीमित मत रखिये

रक्षाबंधन प्रतिवर्ष आकर कुछ कहता हैं, पर हमारे देश के लोग आज तक कभी नहीं समझ पाये कि वह कहता क्या है? सच्चाई तो यह भी है कि विश्व में एकमात्र देश भारत ही है, जहां के 98 प्रतिशत लोग अपने देश से प्यार ही नहीं करते, अगर सही मायनों में वे देश से प्यार करते, तो आज देश की यह दुर्दशा ही नहीं होती, किसी भी देश को संवरनें या संवारने के लिए 70 वर्ष कम नहीं होते,

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अब डाक्टरों के सम्मान का भी ठेका अखबारों ने लिया, रांची में गलत परम्परा की शुूरुआत

अगर सम्मान की बात करें तो हमें कबीर की पंक्ति याद करनी होगी, जिन्होंने सम्मान की परिभाषा बहुत ही खुबसूरत ढंग से अपनी दो पंक्तियों में कह दी। वो पंक्तियां थी – ‘कबीरा हम पैदा हुए, हम रोए जग हंसे, ऐसी करनी कर चलो, कि हम हंसे जग रोए’ अर्थात् स्पष्ट हैं कि व्यक्ति का सम्मान उसके कर्मों से होता हैं, वह कर्म जनहित में हो, तभी वह सम्मान का हकदार होता हैं।

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नागरिक अभिनन्दन नहीं, अखबारी अभिनन्दन में सम्मानित हुए उप-सभापति हरिवंश

दो दिन पहले से रांची का अखबार प्रभात खबर एक विज्ञापन निकाल रहा था। विज्ञापन में लिखा था – नागरिक अभिनन्दन, हरिवंश, उप-सभापति, राज्यसभा, दिनांक – 24 अगस्त 2018, समय – अपराह्न 3.45 बजे से, स्थान – आर्यभट्ट सभागार, मोरहाबादी, रांची। आप सभी आमंत्रित हैं। निवेदक – प्रभात खबर, एवं पत्रकारिता विभाग, रांची विश्वविद्यालय, रांची

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‘बच्चा हुआ नहीं और सोहर गाना शुरु’, केरल को दिये जानेवाले मदद पर UAE का खुलासा

‘बच्चा हुआ नहीं और सोहर गाना शुरु’ हमारे देश में एक से एक नेता हैं, और उनके समर्थक तथा देश के पत्रकारों का तो क्या कहना, उधर नेता बोला नहीं, इधर नेताओं के समर्थक सड़कों पर उतरे नहीं, कि पत्रकारों का दल ढोंगी साधुओं की तरह प्रवचन देना शुरु कर दिये। यह मैं इसलिए कह रहा हूं कि कल ही यूएई के राजदूत अहमद अलबन्ना ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट कर दिया

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अटलजी की श्रद्धाजंलि सभा में भाजपा नेताओं की हंसी-ठिठोली देख, जनता हैरान

देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 16 अगस्त को अपनी अटल अनन्त यात्रा पर चल दिये, जिस दिन अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हुआ, उस दिन पूरा देश उनके लिए रोया, दलों की सारी सीमाएं टूट गई, क्योंकि वे सर्वमान्य नेता थे, सभी के दिलों पर राज करते थे, पर जिस प्रकार से उनके निधन के बाद, उनकी श्रद्धांजलि सभा एवं अस्थि विसर्जन यात्रा में भाजपाइयों का चरित्र उजागर हो रहा हैं, उससे पूरा देश हैरान हैं।

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SC-ST झूठे केस में फंसे दुर्ग को मिला बेल, राजस्थान के पत्रकारों-बुद्धिजीवियों में हर्ष

राजस्थान के पत्रकारों के लिये और वहां के बुद्धिजीवियों के लिए आज का दिन बहुत खास हैं। बाड़मेर के पत्रकार दुर्ग सिंह राजपुरोहित को आज न्यायालय से जमानत मिल गई है, फिलहाल वे बिहार और राजस्थान पुलिस की कृपा से एससी-एसटी मामले के एक झूठे केस में जेल में बंद थे। आश्चर्य यह है कि इस इन्सान पर आरोप है कि उसने किसी बिहार के राकेश पासवान से काम कराए

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दुनिया में सर्वाधिक बुद्धिमान हैं न्यूज 18 में कार्यरत संवाददाता, बाकी सब…

दुनिया में सर्वाधिक बुद्धिमान अगर कोई संवाददाता है, तो वह हैं न्यूज 18 में कार्यरत संवाददाता, इनके जैसा बुद्धिमान संवाददाता, पूरे विश्व में नहीं हैं, ये कुछ भी लिखे, इनकी बातों पर विश्वास कर लीजिये, क्योंकि ये गलत लिख ही नहीं सकते, अगर ये कहते हैं कि 18 पुराणों में ‘शंख पुराण’ और ‘कर्म पुराण’ भी हैं तो बिना किसी संशय के स्वीकार कर लीजिये,

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वाह री भाजपा, बेटा यूपी का मंत्री और पिता बिहार का गवर्नर, क्या ये परिवारवाद नहीं

बधाई दीजिये लालजी टंडन को, वे बिहार के नये राज्यपाल बनाये गये हैं। 83 वर्षीय लाल जी टंडन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के विश्वासपात्र रहे हैं। कभी वे लखनऊ संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत कर, सांसद भी बने हैं और अब बिहार के राज्यपाल की भूमिका में नजर आयेंगे।

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शर्मनाकः जो देश के लिए लड़ा, 18 मेडल जीते, उसे SC-ST एक्ट के झूठे केस में फंसा दिया

नोएडा में एससी-एसटी के नाम पर एक अवकाश प्राप्त सैन्य अधिकारी के खिलाफ झूठा केस दर्ज करने का समाचार सामने आया है, यहीं नहीं उक्त रिटायर्ड कर्नल के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठा केस दर्ज कर, उन्हें आनन-फानन में जेल भी भेज दिया गया तथा इसी दरम्यान पुलिसकर्मियों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया,

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ये नये युग के संघ के प्रान्त प्रचारक हैं, विलासी जिंदगी जीने में रखते हैं दिलचस्पी

जिन्होंने श्रीश देव पुजारी, रामचन्द्र सहस्रभोजनी, राजाभाऊ, मधुसूदन देव, हरिश्चन्द्र भारद्वाज जैसे संत सदृश प्रान्त प्रचारकों को देखा हैं, वे पुराने स्वयंसेवक जब आजकल के प्रान्त प्रचारकों और उनकी शानो-शौकत जिंदगी बिताने के तरीके और दिलचस्पी को देख रहे हैं तो वे अवाक् हो जा रहे हैं। हम आपको बता दें कि झारखण्ड बनने के पहले, झारखण्ड का यह इलाका दक्षिण बिहार के नाम से जाना जाता था।

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