अपनी बात

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कभी पटना से रांची के बीच सुपर एक्सप्रेस चला करती थी, जो यात्रियों को सुकुन देती थी, पर अब…

कभी सुपर एक्सप्रेस के नाम से जानी जानेवाली, बाद में पटना-हटिया एक्सप्रेस के नाम से जानी जानेवाली ट्रेन आज से पूर्णिया कोर्ट-हटिया एक्सप्रेस के नाम से जानी जाने लगी है। बीते कुछ सालों से यह ट्रेन पटना-हटिया तक 18625/18626 नंबर से जानी जाती थी, बाद में इसी ट्रेन को पटना पहुंचते ही, पटना से कभी सहरसा तो कभी मुरलीगंज तो कभी पूर्णिया कोर्ट तक कोशी एक्सप्रेस 18697/18698 के नाम से चलाया जाता था,

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पानी के लिए धनबाद में दो लोगों ने किया आत्मदाह का प्रयास, पुलिस ने किया गिरफ्तार

“हमलोग अपनी समस्याओं को लेकर, आवेदन लेकर, नगर निगम के नगर आयुक्त के पास जाते हैं तो उसका बॉडीगार्ड भगा देता हैं। हमें कहा जाता है कि जाओ, जनता दरबार में जाकर सीएम रघुवर दास से मिलो। क्या करें, ये नगर निगम, न शान से जीने देता है, न शान से मरने देता है। हमारे यहां न चापाकल है, न कुआं हैं, पहाड़ी क्षेत्र हैं, अब मरने के सिवा कोई चारा नहीं है, क्या करें, इसलिए नगर निगम के सामने हम आत्मदाह करने चले आये हैं।

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हमको माला पहनने के लिए बहुत समय हैं, पर प्रेस क्लब आने और इसके उत्थान के लिए समय नहीं

हमारे पास समय नहीं हैं, हम इतना समय प्रेस क्लब को नहीं दे सकते, केवल महत्वपूर्ण समयों पर जब हमें चीफ गेस्ट बनायेंगे तो चेहरा दिखाने के लिए आ जायेंगे, ये सोच हैं रांची प्रेस क्लब में पदाधिकारी बने कुछ नवनिर्वाचित साहबों का। ये पत्रकारों के वोट से पदाधिकारी बने, पर अब इन्हें पत्रकारों और रांची प्रेस क्लब को कैसे सम्मान दिलाएं, इसके लिए इनके पास समय नहीं हैं।

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प्रियंका अब दुनिया में नहीं, पर उसने शाकद्वीपियों से सवाल पूछे हैं, जिसका जवाब किसी के पास नहीं

भास्कर दिल्ली की ओर से हमें 6 जून को सूचना मिली कि प्रियंका अब दुनिया में नहीं है। जैसे ही यह सूचना प्रसारित हुई, हम जैसे सैकड़ों लोग जो प्रियंका से कुछ महीने से भावनात्मक रुप से जुड़े हुए थे, जो ईश्वर से दिन-रात प्रार्थना कर रहे थे, कि वो जल्द ठीक हो जाये, फिर से अपने जीवन को गति दे सकें, उन्हें ऐसा लगा कि किसी ने उनके दिल पर बहुत बड़ा आघात किया हो।

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प्रणब मुखर्जी के संघ मुख्यालय में दिये भाषण को लेकर कांग्रेसियों का एक बहुत बड़ा वर्ग कन्फ्यूज्ड

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय में जाने और वहां स्वयंसेवकों को संबोधित करने के मामले में कांग्रेस का स्टैंड क्लियर नहीं दीख रहा। कुछ कांग्रेसी नेता प्रणब मुखर्जी के भाषण की प्रशंसा करते हुए यह कह रहे हैं, कि प्रणब मुखर्जी ने संघ को सच का आईना दिखा दिया, वहीं कई कांग्रेसी नेता अभी भी प्रणब मुखर्जी पर सवालों के गोले दागे जा रहे हैं, जिससे आम जनता भी कन्फ्यूज्ड है

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प्रणब मुखर्जी ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में दिये अपने भाषण से संपूर्ण देशवासियों का दिल जीता

आज संपूर्ण विश्व की नजर, संघ मुख्यालय नागपुर की ओर था। इसका मूल कारण था, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का आज के दिन संघ मुख्यालय नागपुर में होना। संघ मुख्यालय की ओर से आज के दिन उन्हें उदबोधन के लिए आमंत्रित किया गया था। जिस आमंत्रण को स्वयं पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सहर्ष स्वीकार किया था,  हालांकि उनके आमंत्रण स्वीकार करने के बाद, जितने मुंह उतनी ही बातें सुनने को मिली।

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पूरे झारखण्ड में सिस्टम फेल, मानदेय नहीं मिलने से पारा टीचर हकीमुद्दीन की बेटी की मौत

धनबाद के बरियो निवासी पारा शिक्षक हकीमुद्दीन अंसारी जिसकी बेटी नुजहत जहां नाज की शादी ईद के बाद होनेवाली थी, उसकी शादी तो नहीं, पर दो दिन पहले उसका जनाजा जरुर निकल गया। हकीमुद्दीन अंसारी और उसकी पत्नी आयशा खातून का रो-रोकर बुरा हाल है, आर्थिक तंगी और घर के हालात कुछ इस प्रकार है कि वह अपनी बेटी का ठीक से इलाज भी नहीं करा पाया।

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CM रघुवर का विभाग IPRD, जहां एक सही पत्रकार को अधिमान्यता के लिए नाक रगड़ने पड़ते हैं

जब कोई पत्रकार सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के द्वारा बनाये गये नियमों का सम्मान करते हुए, उसके नियमों का पालन करता है, तो फिर ऐसे में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अधिकारियों को उसे अधिमान्यता प्रदान करने में क्यों दिक्कत होती हैं? ये समझ से परे हैं। चलिये ये भी मान लिया कि आपको उक्त पत्रकार को अधिमान्यता देने में दिक्कत आ रही हैं, या उससे आप घृणा करते हैं,

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“शिकारी आयेगा जाल बिछायेगा” वाली कहानी के तर्ज पर कल रांची में संपन्न हुआ पर्यावरण दिवस

कल पूरे रांची में विश्व पर्यावरण दिवस की धूम थी। अखबारवालों, राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास और कई स्वयंसेवी संगठनों को कल पर्यावरण को लेकर बड़ी चिन्ता थी, वे प्लास्टिक के बने फ्लैक्स, होर्डिंग्स, बैनर, थैलों को लेकर विभिन्न स्थानों पर जुटे थे, खूब चिल्ला रहे थे – हमें पर्यावरण को बचाना है, जलाशयों को बचाना है, अगर जलाशय नहीं बचेंगे तो हमारी जिंदगी प्रभावित हो जायेगी, इस प्रकार चिल्लाते-चिल्लाते ये पोज भी दे रहे थे,

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बेटी वहीं ब्याहेंगे, जिस घर में शौचालय पायेंगे, पर CM के अधिकारी शौचालय में ताला लटकवायेंगे

सोशल साइट फेसबुक पर सर्वप्रथम पं. बजरंगी पांडेय ने इस मुद्दे को उठाया है, जिसका सभी ने समर्थन किया है। देवजीत देवगढ़िया कहते है कि वे इस मुद्दे को वहां के विधायक के संज्ञान में लाने का वे प्रयास कर रहे हैं। ललित मुर्मू ने कहा कि यह बहुत घटिया रवैया है, तुरंत ताला खुलना चाहिए। अमित शांडिल्य कहते है कि नरेन्द्र मोदी तो मंदिर से ज्यादा शौचालय को महत्व देते है, और यहां ऐसी दुर्दशा।

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