सच हो रही पीएम मोदी की बात, नाले की गैस से चाय बनानेवालों की संख्या बढ़ रही हैं…

याद करिये, कोई ज्यादा दिनों की बात नहीं, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व  जैव-ईंधन दिवस के दिन एक अपना संस्मरण सुनाया था, कि कैसे एक नाले के निकट बैठनेवाला चाय दुकानदार, नाले से निकलनेवाली गैस के माध्यम से अपना चुल्हा जलाता और चाय बनाकर लोगों को देता था, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ये बातें कहीं, ठीक उनके कहने के बाद ही, जैसा कि भारत में होता हैं,

याद करिये, कोई ज्यादा दिनों की बात नहीं, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व  जैव-ईंधन दिवस के दिन एक अपना संस्मरण सुनाया था, कि कैसे एक नाले के निकट बैठनेवाला चाय दुकानदार, नाले से निकलनेवाली गैस के माध्यम से अपना चुल्हा जलाता और चाय बनाकर लोगों को देता था, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ये बातें कहीं, ठीक उनके कहने के बाद ही, जैसा कि भारत में होता हैं, कि हर बात की, चाहे वह अच्छी हो या बुरी, दो पक्ष मिल जाते हैं और शुरु हो जाती हैं, बातों की बतंगड़ करने की कलाबाजी।

उस समय यानी 10 अगस्त को विश्व जैव-ईंधन दिवस के दिन भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण के बाद, उनके भाषण का ऑपरेशन होना शुरु हुआ, दो गुट हो गये, और शुरु हो गई प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान की खिंचाई, एक वर्ग जो पीएम नरेन्द्र मोदी के पक्ष में था, वह थोड़ा शांत था, पर विरोधी गुट तो ऐसा छीछालेदर किया, कि पूछिये मत, पर अब जो धीरे-धीरे एक से बढ़कर एक इस संबंध में जो समाचार आ रहे हैं, वह पीएम नरेन्द्र मोदी की बातों को सहीं ठहरा रहे हैं और अगर यहीं हाल रहा तो कहीं ऐसा नही कि पूरे देश में बजबजाती नालियों से ही घरों के चुल्हे न जलने लगे।

ताजा समाचार यह है कि गाजियाबाद के इन्द्रप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज के पास एक रामू चायवाले की दुकान हैं, जिसकी चाय दुकान पास के ही बहनेवाले नाले से चल रही हैं। वह अपना चुल्हा इसी नाले से निकलनेवाली गैस से जलाता है और उसकी दुकान बहुत अच्छी तरह चल रही हैं, पहले तो लोगों ने उसकी चाय को स्वीकार नहीं किया, पर बाद में उसकी रफ्तार पकड़ में आ गयी।

बताया जाता है कि इसी कॉलेज के छात्र अभिषेक वर्मा और अभिनेन्द्र पटेल ने पीएम नरेन्द्र मोदी के भाषण से प्रभावित होकर इस प्रोजेक्ट पर काम करना प्रारम्भ किया, जिसका लाभ उसने उठाया। छात्र बताते है कि इस नाले से वे मिथेन गैस को एक पात्र में इकट्ठे करते हैं और फिर उसके बाद एक पाइप के द्वारा चुल्हे तक, इस गैस को ले जाते हैं।

अगर अभिषेक व अभिनेन्द्र की बातों को माने तो उसने यह प्रोजेक्ट 2013 में तैयार कर लिया था, पर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने इसकी अनुमति नहीं दी, पर पीएम नरेन्द्र मोदी के मुख से नाले की गैस से चाय बेचने की कहानी सुनी तो फिर उसने इस प्रोजेक्ट को नये सिरे से शुरु करने का फैसला लिया और उसमें कामयाबी भी मिली, अब तो गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने भी इसमें रुचि दिखा दी।

जिस प्रकार से बजबजाती-दुर्गंध फैलाती नालियों से गैस निकालने का फार्मूला प्रारंभ हुआ हैं, कहीं ऐसा नहीं कि आनेवाले दिनों में ज्यादातर घरों में इसी प्रकार की व्यवस्था दिखाई देने लगे और लोग अपने आस पास की बजबजाती-दुर्गंध फैलाते नालों से उत्पन्न मिथेन गैस से अपने घरों का काम निबटाने लगे, ऐसे भी पीएम नरेन्द्र मोदी के भाषण के बाद, निरंतर हो रही इसमें प्रगति और लोगों के रुझान भारत के लिए शुभ संकेत दे रहे हैं, क्योंकि भारत में गंदगियों और नालों की कोई कमी भी नहीं।

Krishna Bihari Mishra

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