अरे गोविन्द पहलवान ‘शत् शत् नमन’ के योग्य नहीं हैं, ‘अच्छा हुआ मर गया ससुरा’ बोलने के लायक है
सत्तर वर्षीय गोविन्द पहलवान की मौत की खबर जैसे ही राघोपुर के लोगों के कानों तक पहुंची, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। गोविन्द पहलवान के आतंक से त्रस्त ग्रामीणों को लगा कि जैसे उन्हें बरसो पुरानी मन की मुराद मिल गई हो। गोविन्द पहलवान के मरने की खुशी में सभी ने अपने-अपने कुलदेवता की विशेष पूजा की, गांव के प्रधान देवता को भी लोगों ने चुपके से मिठाइयां चढ़ा दी,
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