अपराध

खूंटी दुष्कर्म कांड में फादर की भूमिका संदिग्ध, दुष्कर्मियों में से एक का फोटो जारी

अब किस पर विश्वास करें, और किस पर विश्वास नहीं करें, जब जंगलों में आदिवासियों के बीच, जब हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं तो समझ लों, अब कहीं कोई सुरक्षित नहीं। पूर्व में ऐसी समाचार कभी सुनने व देखने को यहां नहीं मिली, पर जिस प्रकार की घटना खूंटी के अड़की में देखने व सुनने को मिली, वह भयावह है, शर्मनाक है, कलंक है और शायद ही ये कलंक कभी धूल पाएं, मुख्यमंत्री रघुवर दास को चाहिए कि कसूर किसी का भी हो, उसे इसके किये की सजा जरुर मिले, यह सुनिश्चित होना चाहिए, नहीं तो अगर ये भी कांड बूटी मोड़ कांड के जैसा हो गया, तो ये सरकार के लिए डूब मरनेवाली बात होगी। क्या कसूर था, इन बेटियों का, सिर्फ यही न कि ये मानव तस्करी के खिलाफ जागरुकता अभियान चलाने अड़की के कोचांग गांव, अपनी टीम के साथ गई थी और इसका खामियाजा उन्हें ऐसा भुगतना पड़ा कि वह ठीक से जी भी नहीं पायेगी।

आखिर घटना क्या है?

बताया जाता है कि खूंटी के अड़की के कोचांग गांव में गत 19 जून को एक स्वयंसेवी संस्था से जुड़े सदस्यों की एक टीम पहुंची। इस टीम में ग्यारह सदस्य थे, जिसमें नुक्कड़ नाटक के छह, संस्था से जुड़ी दो सिस्टर, दो बच्चियां और एक ड्राइवर शामिल था। ये लोग मानव तस्करी के खिलाफ जागरुकता अभियान चलाने के तहत नुक्कड़ नाटक करने उक्त गांव पहुंचे थे।

बताया जाता है कि नुक्कड़ नाटक करने के बाद टीम के सभी सदस्य मिशन स्कूल में नाटक करने चले गये, जहां दो मोटरसाइकिल में सवार करीब पांचः-छः की संख्या में आये अपराधकर्मियों ने कट्टे के बल पर जबरन महिलाओं को संस्था के ही वाहन से लोबोदा जंगल ले गये, जहां पांच महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया, उसके वीडियो बनाये और इस बात की धमकी भी दी कि अगर किसी को बताया तो वे इस वीडियो को वायरल कर देंगे। पुलिस की मानें तो प्रथम दृष्टया ये काम पत्थलगड़ी समर्थकों द्वारा अंजाम दिया गया प्रतीत होता है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने लिया संज्ञान

इसी बीच इस कांड से संबंधित अड़की और महिला थाना में अलग-अलग दो प्राथमिकी दर्ज किये गये हैं। जिसमें महिला थाना में 323, 341, 342, 376डी, 354बी, 363, 365,120बी, आइपीसी 67, 67 ए(आइटी एक्ट) धारा के तहत, जबकि अड़की थाना में 341, 342, 323, 363, 365, 328, 506, 201 और 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसी बीच अनुसंधान के क्रम में 5-6 लोगों से पूछताछ की गई है, जिनमें दो शिक्षक और दो सिस्टर शामिल है। फादर अल्फांसो आइन्द की भूमिका संदिग्ध मानते हुए स्थानीय पुलिस ने उसे पीआर बांड भराकर फिलहाल छोड़ दिया है। पुलिस ने एक दुष्कर्म के आरोपी की तस्वीर भी जारी की है।

सके बारे में सूचना देनेवालों को पचास हजार रुपये के इनाम की भी घोषणा की है। इसी बीच पुलिस ने जांच के लिए तीन टीमें बनाई है, जो जांच में जुट चुकी है। फिलहाल अभी तक किसी की इस दुष्कर्म मामले में गिरफ्तारी नहीं हुई है। दुसरी ओर इस कांड की जानकारी मिलते ही उधर राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लिया है, तथा राज्य के पुलिस महानिदेशक से इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भेजने को कहा है, राष्ट्रीय महिला आयोग ने अपनी ओर से इस मामले की जांच के लिए एक त्रिसदस्यीय टीम का भी गठन किया है।

कहीं ये किसी षड्यंत्र का कोई हिस्सा तो नहीं

राज्य के वरीय पुलिस पदाधिकारी मानते है कि इस दुष्कर्म मामले में एक चर्च के फादर की भूमिका को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। जांच बड़े पैमाने पर चल रही है, किसी को वो छोड़ने नहीं जा रहे है। मामला गंभीर है। कई लोगों के आचरण में संदिग्धता नजर आ रही है, एक बड़ा षड्यंत्र रचा गया है, जल्दी ही इस पर से पर्दा उठ जायेगा। वरीय पुलिस पदाधिकारी को आशंका है कि ये संस्था मानव तस्करी और डायन प्रथा आदि को लेकर जन-जागरुकता चलाने का काम करती थी, इसी दौरान जिला प्रशासन का भी पंपलेट बांटा जाता था, कि नाटक के दौरान पत्थलगड़ी के विरोध में जागरुकता लाने की भी बात कहीं जाती थी, पुलिस को शक है कि कहीं इसी बात को लेकर, तो इस घटना को अंजाम नहीं दे दिया गया, पुलिस को उग्रवादी संगठनों पर भी शक है।

पुलिस सक्रिय, कसूरवारों को सजा दिलाने में जुटी

इसी बीच अच्छी खबर ये है कि पूरा पुलिस प्रशासन ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार भी इस मामले को लेकर सक्रिय है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने सारे पुलिस पदाधिकारियों को हिदायत दे रखी है, साथ ही उनकी खुद भी कड़ी नजर है, उन्होंने कह रखा है कि वे किसी को छोड़ने नहीं जा रहे है। स्थानीय लोगों को भी चाहिए कि वे इस कार्य में पुलिस को मदद करें, क्योंकि बेटियों की सुरक्षा व सम्मान की सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन ही द्वारा नहीं हो सकती, सबका सहयोग चाहिए, अगर किसी ने भी किसी अपराधी को बचाने की कोशिश की या अपराधी बच पाने में सफल हो जाता है, तो समझ लीजिये, आपकी बेटियां सुरक्षित नहीं, पीड़ितों को न्याय दिलाने में सभी का योगदान आवश्यक होना चाहिए।

झारखण्ड जनसंस्कृति मंच ने की इस कांड की कड़ी भर्त्सना

झारखण्ड जनसंस्कृति मंच ने खूंटी के अड़की गांव में हुए इस घटना की कड़ी निंदा की तथा इसे समाज और राज्य के लिए कलंक बताया। मंच की महिला टीम प्रेरणा की संयोजिका सोनी, प्रतिभा, रीता, लाखिमुनी के अलावे जसमं के राष्ट्रीय सचिव मंडल सदस्य जेवियर कुजूर, वरिष्ठ साहित्यकार शम्भू बादल, प्रो. बलभद्र, कथाकार कालेश्वर तथा मंच के राज्य सचिव अनिल अंशुमन, सेंगेल टीम के गौतम सिंह मुंडा व गोर सिंह मुंडा, संताली टीम अन्जोम के जैबिर हांसदा व मानकी टुडू आदि संस्कृतिकर्मियों ने गहरा रोष प्रकट करते हुए तमाम दोषियों को अविलम्ब गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाने की मांग की।

मंच का कहना है कि ये कांड सुनियोजित साजिश का परिणाम है और इसने एक बार फिर अच्छे दिनों की सरकार के बेटी बचाव अभियान की असलियत सामने ला दी है, इसलिए सरकार और कतिपय राजनेता अपनी नाकामी छुपाने के लिए मामले को दूसरी ओर जोड़ रहे हैं, जनसंस्कृति मंच की मांग है कि फार्स्ट ट्रैक कोर्ट से सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाये, नहीं तो मंच राज्य के सभी सांस्कृतिक संगठनों और सांस्कृतिककर्मियों को लेकर इस मुद्दे पर राज्यव्यापी प्रतिवाद खड़ा करेगा।