Author: Krishna Bihari Mishra

अपनी बात

राहुल के मंदिर दौरे से घबराई भाजपा और संघ ने राममंदिर आंदोलन को दी हवा, भाजपाइयों ने निकाले पुराने फोटो

उधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी ने बयान दिया, और इधर भाजपाइयों ने 1992 के वे पुराने फोटो निकालने शुरु किये, जो अयोध्या आंदोलन से जुड़े थे। भैय्या जी जोशी ने आज बयान दिया है कि राम मंदिर पर सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी से हिन्दू स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे हैं, उनका कहना था कि संघ ने कभी भी न्यायालय के निर्णयों की उपेक्षा नहीं की,

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राजनीति

JMM विधायक कुणाल षाड़ंगी अमेरिका के स्टेट ऑफ ऑरकॉनसॉस के गुडविल एबेंसडर

बहरागोड़ा के झारखण्ड मुक्ति मोर्चा विधायक कुणाल षाड़ंगी अमेरिका के स्टेट ऑफ ऑरकॉनसॉस के गुडविल एबेंसडर चुने गये है, हम आपको बताते चले कि स्टेट ऑफ ऑरकॉनसॉस अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिटंन का गृह राज्य है। झामुमो विधायक कुणाल षाड़ंगी को यहां एक छोटे से समारोह में यह सर्टिफिकेट एवं अवार्ड से विभूषित कर दिया गया।

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अपनी बात

सीखिये पाक सुप्रीम कोर्ट से, पाकिस्तान में आसिया के पक्ष में फैसला सुनाना इतना भी आसां नहीं था

पूरा पाकिस्तान जल रहा है, पाकिस्तान की सरकार देश में फैले कट्टरपंथियों के जमात द्वारा फैलायी गयी कट्टरपंथी जनाक्रोश को झेलने को मजबूर है। देश के अंदर फैली इस कट्टरपंथी आग से पाकिस्तान को पूरे विश्व में जलालत झेलनी पड़ रही है, आसिया बीबी सुप्रीम कोर्ट से मिली न्याय से खुश है, पर खुद और उसका परिवार देश में फैले उसके खिलाफ जनाक्रोश से डरा हुआ है, और पाकिस्तान छोड़कर किसी दूसरे देश में बस जाना चाहता है,

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राजनीति

सुप्रीम कोर्ट द्वारा आसिया को बरी किये जाने के खिलाफ कट्टरपंथियों का 2 नवम्बर को पाकिस्तान बंद

पूरा पाकिस्तान सुलग उठा है। पाकिस्तानियों को आसिया बीबी को हर कीमत पर फांसी चाहिए। आसिया बीबी पर आरोप है कि उसने ईशनिंदा की है, जबकि आसिया बीबी अपने उपर लगे आरोपों को झूठा एवं बेबुनियाद बताती है। बताया जाता है कि आसिया बीबी एक ईसाई महिला है, जो सन् 2009 के जून महीने में कुछ मुस्लिम महिलाओं के साथ काम कर रही थी, तभी उसे खूब जोरों से प्यास लगी, उसने पास के कुएं में रखे एक ग्लास से पानी पी लिया, फिर क्या था?

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राजनीति

हमेशा सत्ता से चिपके रहे सुदेश को लगातार मिल रही हार से सत्ता के विकेन्द्रीकरण की आई याद

आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो इन दिनों स्वराज स्वाभिमान यात्रा पर है। कल ही उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान एक जगह कहा कि सिर्फ सीएम और डीएम (डीसी) से राज्य नहीं चल सकता। सत्ता का विकेन्द्रीकरण ईमानदारी से करना होगा और उपर से नीचे तक जिम्मेदारी तय करनी होगी, ताकि गांवों के आम लोग सत्ता के हकदार बनें। झारखण्ड में सचिवालय और जिला मुख्यालय यहीं शासन के केन्द्र बिन्दु बने हैं,

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अपनी बात

गवर्नर फटकार लगावे, CM रघुवर मेला दिखावे, ‘झारखण्ड’ गेंदा फूल

भाई, सीएम रघुवर दास और डीजीपी डी के पांडेय के बीच कितना प्रेम हैं, कितना मुहब्बत है, वो देखने को मिला, जैप ग्राउंड में चल रहे इप्सोवा दीपावली मेले में जहां सीएम रघुवर दास ने डीजीपी डी के पांडेय के प्रति अपने दिल में बैठे प्रेम के गुब्बारे को इस प्रकार फोड़ा कि, वो गुब्बारे में सिमटे गुलाब की पंखुड़ियों के गाल सुर्ख लाल हो उठे।

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अपनी बात

सलाम दोस्त तुम्हारी बहादुरी को, सलाम उस मां को, जिसने तुम्हें जन्म दिया, तुमने तो चंद मिनटों में…

वे बंदूक की गोलियों से दहशत फैलाना चाहते हैं। वे बंदूक की गोलियों से दहशत फैलाकर सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं। उनके लोग अब गांवों से लेकर शहरों तक बसते हैं, और इन नक्सलियों को वैचारिक खुराक देते हैं, पर अच्यूतानन्द साहू की नक्सलियों द्वारा की गई नृशंस हत्या पर चुप्पी साधे हुए हैं। उनसे आप इसके अलावा कुछ दूसरे चीज की उम्मीद भी नहीं कर सकते, क्योंकि न तो उन्हें गांधीवाद पर भरोसा है और न ही भारतीय लोकतंत्र पर,

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अपनी बात

सरदार पटेल को आगे कर, इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को रबर से मिटाने का प्रयास

ये जो राजनीतिक विद्वेष के कारण एक महान नेतृ श्रीमती इन्दिरा गांधी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा हैं, यह देश के लिए दुर्भाग्य ही नहीं, बल्कि चिन्ताजनक है, राजनीतिज्ञों की आपसी कटुता से देश का भविष्य प्रभावित हो जाये, ये किसी भी प्रकार से सही नहीं, अगर किसी को सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती याद है, तो उसे श्रीमती इन्दिरा गांधी की पुण्यतिथि भी याद रहनी चाहिए।

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अपनी बात

जो कुछ नहीं करता वह मुर्तियां बनाने और खुद के प्रचार में लगा रहता हैं और जो देश बनाते हैं…

आज सरदार पटेल जिंदा होते, तो हम उनसे जरुर पूछते कि सरदार पटेल जी आपने अपनी जिंदगी में कितनी मूर्तियां बनाई और अपने प्रचार-प्रसार पर कितनी राशियां खर्च की? पर अफसोस वे अब इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए हमारे पास कभी नहीं आयेंगे, पर जहां तक हमें जानकारी है, कि उनके पास मूर्तियां बनाने और उसे स्थापित करने का समय ही कहां था, उनका तो ज्यादा समय किसानों की मदद करने, स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने,

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अपनी बात

जिस CM को, किससे कैसे पेश आना चाहिए, पता ही नहीं हो, उससे आप क्या उम्मीद लगा सकते हैं?

जिस राज्य में झारखण्ड हाइकोर्ट के निर्माण कार्य की लागत मात्र दो साल में ही 265 करोड़ से बढ़कर 699 करोड़ हो जाती है (ज्ञातव्य है कि जब 2016 में रामकृपाल कन्सट्रक्शन प्रा. लि. को टेंडर मिला था, उस समय इस योजना का प्राक्कलन राशि 265 करोड़ रुपये था), जिस राज्य में बिना किसी तरह की स्वीकृति लिये, ठेकेदार को बिना टेंडर के ही काम दे दिया जाता हो, जिस राज्य में, जिस योजना की तकनीकी अनुमोदन ही नहीं मिलना चाहिए

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