रांची को रहनेलायक नहीं छोड़ा, और जनाब शंघाई टावर के तर्ज पर टावर बनायेंगे?
एक लोकोक्ति हैं, हसुआं के ब्याह में खुरपी के गीत। लोगों को जरुरत हैं मकान की, लोगों को जरुरत हैं सड़क जाम से मुक्ति की, लोगों को जरुरत हैं बिजली की, पानी की, लोगों को जरुरत हैं बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की, बेहतर शिक्षा की और जनाब ये सारा कुछ छोड़कर रांची में शंघाई टावर के तर्ज पर एक टावर बनाने की सोच रहे हैं?
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