Author: Krishna Bihari Mishra

राजनीति

देशद्रोह के झूठे मुकदमें में फंसे 20 लोगों के समर्थन में रांची में निकला प्रतिरोध मार्च

झारखण्ड के संभ्रांत साहित्यकारों, पत्रकारों एवं समाजसेवियों के खिलाफ थोपे गये देशद्रोह के मुकदमे को वापस लेने की मांग को लेकर, आज बड़ी संख्या में संघर्ष वाहिनी मंच के बैनर तले लोगों ने मोराबादी स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से लेकर राजभवन तक प्रतिरोध मार्च निकाला।

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राजनीति

झामुमो पहुंचा माली गंगटी गांव, डीसी से मिलकर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने को कहा

राजमहल के झामुमो सांसद विजय हांसदा, कल गोड्डा के माली गंगटी गांव पहुंचे, जहां अडानी पावर के लोगों द्वारा आदिवासियों द्वारा लगाई गई धान की फसल को जमीन अधिग्रहण के क्रम में पिछले दिनों रौंद डाला गया था, जब अपनी धान की फसल को रौंदता हुआ देख, अपनी मेहनत को बर्बाद होता देख, वहां की आदिवासी महिलाओं ने इन अडानी पावर के लोगों के पैरों पर सर रखकर, ऐसा न करने को कहा, फिर भी किसी का दिल नहीं पसीजा,

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राजनीति

6 सितम्बर को SC-ST एक्ट के विरोध में भारत बंद कराने सड़कों पर उतरेगा सवर्ण समाज

कल एससी-एसटी एक्ट के विरोध में सवर्णों ने भारत बंद का ऐलान कर दिया हैं, सर्वाधिक गुस्सा मध्य प्रदेश में दिख रहा हैं, जहां आनेवाले समय में विधानसभा चुनाव होनेवाले हैं, सवर्णों ने साफ कह दिया है कि एससी-एसटी एक्ट के विरोध में इस बार किसी दलों को वे वोट नहीं देंगे, क्योंकि सभी दलों ने एससी-एसटी एक्ट का समर्थन कर दिया हैं, जिसे किसी भी सूरत में सहीं नहीं ठहराया जा सकता।

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अपनी बात

सभी के दिलों पर राज करनेवाले भाजपा कार्यकर्ता गामा सिंह सभी को छोड़कर चल दिये

आज रांची का एक-एक भाजपा कार्यकर्ता दुखी हैं, भाजपा कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि वे लोग भी दुखी हैं, जो गामा सिंह को जानते थे। गामा सिंह भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता थे, चाहे वे महत्वपूर्ण पद पर रहे या न रहे, दोनों अवस्थाओं में पार्टी के लिए व पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए समर्पित रहनेवाले व्यक्तित्व का नाम था – गामा सिंह।

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अपराध

बालू चोरों को छुड़ाने के लिए कृषि मंत्री ने की पैरवी, अधिकारी ने नहीं मानी बात, किया केस, वसूले पेनाल्टी

सारठ विधानसभा यानी कृषि मंत्री रणधीर कुमार सिंह के इलाके से खबर हैं। जिला खनन पदाधिकारी ने स्थानीय थाने की मदद से बालू से लदे 9 ट्रेक्टरों को जब्त किया तथा थाने में इस संबंध में केस दर्ज कराने पहुंच गये, तभी कृषि मंत्री रणधीर कुमार सिंह का फोन जिला खनन पदाधिकारी के पास पहुंचा और उन्होंने बालू चोरों को छुड़ाने के लिए पैरवी करनी शुरु कर दी।

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अपनी बात

क्या झारखण्ड इसीलिए बना था कि आदिवासी महिलाएं किसी के पैरों पर गिरकर आंसू बहांयेगी?

साहेब चीन गये हैं। वहां जाकर शंघाई टावर देखेंगे और रांची में वैसा ही टावर आकर बनवायेंगे, जिसके बनते ही सारा समस्या छू मंतर हो जायेगा। इधर झारखण्ड के अखबारों व अन्य मीडिया को लंद-फंद न्यूज चलाने/छापने से फुर्सत नहीं हैं, ऐसे में इन्हें फुर्सत कहां कि वे गोड्डा के माली गंगटी गांवों के आदिवासियों के दर्द को अपने चैनल या अखबारों में जगह दे पाये।

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धर्म

एकमात्र श्रीकृष्ण को जानिये और स्वयं को ब्रह्मानन्द में समाहित कर लीजिये

जन्माष्टमी अर्थात् श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का महान पर्व, श्रीकृष्ण को हर बार, बार-बार, प्रतिवर्ष नये ढंग से समझने का पर्व। जो श्रीकृष्ण को समझ लिया, जान लिया, पा लिया, उसकी जय हो गई, उसका जीना सफल हो गया और जो नहीं जाना, वो काल की परिधि में पीसता चला गया। भारतीय वांग्मय कहता है –  यतो कृष्णः ततो धर्मः यतो धर्मः ततो जयः अर्थात् जहां श्रीकृष्ण हैं वहीं धर्म हैं और जहां धर्म है, जय उसी का होना हैं।

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अपनी बात

रांची को रहनेलायक नहीं छोड़ा, और जनाब शंघाई टावर के तर्ज पर टावर बनायेंगे?

एक लोकोक्ति हैं,  हसुआं के ब्याह में खुरपी के गीत। लोगों को जरुरत हैं मकान की, लोगों को जरुरत हैं सड़क जाम से मुक्ति की, लोगों को जरुरत हैं बिजली की, पानी की, लोगों को जरुरत हैं बेहतर स्वास्थ्य सुविधा की, बेहतर शिक्षा की और जनाब ये सारा कुछ छोड़कर रांची में शंघाई टावर के तर्ज पर एक टावर बनाने की सोच रहे हैं?

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अपनी बात

धनबादः पहले ट्रेनें छीनीं, अब बिजली-पानी भी छीन ली, जनता ने कहा, क्या हम जीना छोड़ दें?

जब सरकार बेशर्म होती हैं, तो लोग बिजली एवं पानी के लिए इसी तरह तरसते हैं। पूरा कोयलाचंल बिजली और पानी के लिए छटपटा रहा हैं, पर रघुवर सरकार को शायद इनकी व्यथा सुनाई नहीं दे रही। जनता और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर गये, पर राज्य सरकार को इसकी कोई सुध नहीं, भाजपा और उनके स्थानीय नेता-कार्यकर्ता घरों में दुबके हैं,

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अपराध

शर्मनाकः झूठा विज्ञापन छापनेवाला अखबार ही चोर-चोर चिल्ला रहा है

पहले पैसे की लालच में आकर खुद झूठे विज्ञापन छापो और जब आपके अखबार में छपे विज्ञापन को सच मानकर (वो इसलिए क्योंकि आप खुद को अखबार नहीं मानते, आप तो खुद को ‘अखबार नहीं आंदोलन’ कहते हैं), यहां के बेरोजगार युवक अपनी जमा पूंजी लूटा दें, तो फिर अपने ही अखबार में ठगी के मामले का समाचार छापो, और वह भी तब,

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