राजनीति

देशद्रोह के झूठे मुकदमें में फंसे 20 लोगों के समर्थन में रांची में निकला प्रतिरोध मार्च

झारखण्ड के संभ्रांत साहित्यकारों, पत्रकारों एवं समाजसेवियों के खिलाफ थोपे गये देशद्रोह के मुकदमे को वापस लेने की मांग को लेकर, आज बड़ी संख्या में संघर्ष वाहिनी मंच के बैनर तले लोगों ने मोराबादी स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से लेकर राजभवन तक प्रतिरोध मार्च निकाला।

प्रतिरोध मार्च में शामिल लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बंद करो, देशभक्ति पर सरकार का एकाधिकार नहीं, हम सबसे है देश, हम सबमें हैं देश, हम सब है देश, हम सब किसी से भी कम देशभक्त नहीं, अभिव्यक्ति पर जो रोक लगाये, वह देश भक्ति फर्जी है, हमला चाहे जैसा होगा, हाथ हमारा नहीं उठेगा, कदम हमारा नहीं रुकेगा, आजाद आवाजें नहीं थमेंगी, निरंकुश सत्ता का अंधा मोह, असहमति को कहे देशद्रोह, आदि नारे लगा रहे थे।

प्रतिरोध मार्च में शामिल लोगों का कहना था कि सरकार में शामिल लोगों को जान लेना चाहिए कि सरकारपरस्ती देशभक्ति नहीं होती, सरकार का विरोध भी देशद्रोह नहीं है, उनका कहना था कि वाजिब वैचारिक विरोध तो लोकतंत्र और राष्ट्रनिर्माण की नींव है। प्रतिरोध मार्च में शामिल लोगों ने कहा सरकार में शामिल लोगों को पता ही नहीं कि लोकतंत्र का बुनियादी संदेश कहा छुपा हैं, उन्हें पता ही नहीं कि जनमन, गण में देश बसता हैं।

इधर जैसे-जैसे दिन बीत रहा हैं, जिन-जिन लोगों पर देशद्रोह या झूठे मुकदमे डालकर, उन्हें फंसाने का कार्यक्रम सरकार द्वारा चलाया जा रहा है, ऐसे लोगों के पक्ष में जनता गोलबंद होती दिख रही हैं तथा उन्हें जनता की सहानुभूति भी प्राप्त हो रही हैं, अगर ऐसा चलता रहा, तो इसमें कोई दो मत नहीं कि सरकार तो राज्य में होगी, पर सरकार को जनता का साथ नहीं होगा।