यहां पे सब जाम-जाम हैं, झारखण्ड के सीएम हैरान हैं, रांची की सड़क जाम-जाम हैं

जब घर में लगी आग, तो चलो आग बुझाने के लिए कुएँ खोदे। पूरी राजधानी की जनता सड़क जाम से तबाह है। सड़क जाम से मुक्ति पाने के लिए, प्रतिदिन नये-नये तरीके ईजाद हो रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही। जब से मुख्यमंत्री स्वयं रोड जाम में फंसने लगे हैं, तो उनके अंदर दिव्यज्ञान का प्रार्दुभाव हुआ। प्रतिदिन सड़क जाम को लेकर बैठकों का जो दौर प्रारंभ हुआ।

जब घर में लगी आग, तो चलो आग बुझाने के लिए कुएँ खोदे। पूरी राजधानी की जनता सड़क जाम से तबाह है। सड़क जाम से मुक्ति पाने के लिए, प्रतिदिन नये-नये तरीके ईजाद हो रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही। जब से मुख्यमंत्री स्वयं रोड जाम में फंसने लगे हैं, तो उनके अंदर दिव्यज्ञान का प्रार्दुभाव हुआ। प्रतिदिन सड़क जाम को लेकर बैठकों का जो दौर प्रारंभ हुआ। वह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। आज मुख्यमंत्री रघुवर दास, अपने लाव लश्कर के साथ रांची नगर निगम पहुंच गये। वहां जाकर उन्होंने प्रवचन देना प्रारंभ किया। प्रवचन क्या है? आप स्वयं देख और पढ़ लीजिये। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने सोशल साइट पर क्या बयान दिया है –

दिल्ली, मुंबई बढ़ रहा, पर रांची नहीं

उन्होंने रांची शहर को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम के अंतर्गत योजनाओं, विकास कार्यों, साफ-सफाई और यातायात की समीक्षा बैठक की। सीएम का कहना है कि देश के सभी शहरों में आप यातायात देखते होंगे,  लेकिन वे शहर अनुशासन में रहते हैं। रांची में ऐसा नहीं दिखता। मुख्यमंत्री रघुवर दास यह भी कहते हैं कि इस साल जनवरी से सितंबर के दौरान 2215  घटनाएं हुईं। हम घटना होने के बाद व्यवस्था सुधारने की क्यों सोचते हैं?  हमें पहले से दुर्घटनाएं रोकने की व्यवस्था करनी चाहिए। इस सिस्टम में रोड और नालियां बनती रहेंगी,  हम रहें ना रहें। कागज में सब कुछ होता है, जमीन पर नहीं दिखता। दुनिया के साथ अगर हम नहीं बढ़ेंगे तो पिछड़ जाएंगे। दिल्ली, मुंबई बढ़ रहा है लेकिन रांची नहीं।

नेता वहीं जो निर्णय लेने की क्षमता रखें

अधिकारी ऐसा काम करें कि लोग उन्हें याद रखें, चाहे आपका पद रहे न रहे। हर चीज नगर निगम की जिम्मेदारी नहीं है। आप लोग दौरे पर जाते हैं,  जो वहां से सीखते हैं उसे अपने यहां लागू करें। कोई भी स्थायी नहीं हैं,  न आप,  न वार्ड और न ही मुख्यमंत्री,  इसलिए पद की चिंता मत करिए। आपको-हमें मिलकर काम करना है। आप कुछ नया करेंगे तो कुछ लोग विरोध करेंगे, यह मानव स्वभाव है। नेता वही है जो निर्णय लेने की क्षमता रखता हो, आप नहीं लेंगे तो बाहर हो जाएंगे।

सीएम ने यह भी कहा है कि पढ़े-लिखे लोग भी कानून तोड़ते हैं। फोन करवाते हैं, ये रांची में नहीं चलेगा। ऐसा ही हाल रहा तो रांची की हालत बदतर हो जाएगी। सोच बदलें। हमें सुरक्षित,  स्वस्थ और अनुशासित रांची बनाना है। सर्वे करवाएं कि कौन आपके आस-पास गरीब है। गरीब को रोजगार चाहिए,  वे ईमानदार होते हैं। एक साल के अन्दर जो भी बीपीएल  हैं,  उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकें तो यह हमारे लिए गर्व की बात होगी।

और इन्हीं के सोशल साइट पर आम जनता की क्या प्रतिक्रिया है, वह भी देख लीजिये –

सतीश कुमार –  ये बाते आप किसको बता रहे हैं मुख्यमंत्री महोदय। सत्ता में आप हैं तो जिम्मेदारी भी आपकी ही है। दुर्घटना रोकने के लिए अच्छी सड़कें,  नालियां,  ट्रैफिक रेगुलेशन,  कड़ा कानून,  ये सब क्या हम जनता आप नेताओ को बना के देंगे क्या? फेसबुक पोस्ट कम और काम ज्यादा कीजिये। अगर जमीन पर काम होगा तो जनता को खुद पता चल जायेगा,  facebook पर पोस्ट या बड़े बड़े पोस्टर लगाने की जरूरत नही पड़ेगी। सत्ता में हैं , पॉवर में हैं इसका use कीजिये। वरना 2019 में सफाया तय है।

सतीश कुमार – भाषण कम दे, और काम करें। रोजगार, विकास, सुशासन, सड़क, बिजली, पानी, इंफ्रास्ट्रक्चर, गरीबी उन्मूलन, इन सब मुद्दों में गंभीर होकर सोचें, प्लान बनाये और काम करें। काम की मॉनिटरिंग करें। timeline decide  करें और काम पूरा करें। फेसबुक पर रोज भाषण झारने और बड़े बड़े पोस्टर में add  देने से विकास नही होगा। 17 साल हो गये, झारखण्ड बने हुए,  लेकिन जमीन पर कुछ खास विकास नही दिखाई देता। खनिज संपदा से संपन्न राज्य में सिर्फ नेताओ का विकास हुआ है,  जनता का कुछ भी विकास नही हुआ है। इस बारे में गंभीरता से सोचें वरना 2019  में सफाया तय है।

रवि रंजन –  रांची से आगे बढ़े आप, आप एमपी, एमएलए नहीं, पूरे रांची के सीएम है। रांची आगे जायेगा, तब जब कंपनी लायेंगे, यहां सड़क की नहीं, मेट्रो चलाने की जरुरत है, यहां तो छोटे-छोटे डिप्लोमा कोर्स करने के लिए बच्चे उड़ीसा जा रहे हैं।

दिलनवाज खान – रांची में सड़कों का चौड़ीकरण कराएं, भाषण बाद में दें, ट्रैफिक सिस्टम तभी सहीं होगा, जब सड़कें चौड़ी होगी, जाम से छुटकारा तभी मिलेगा। फालतू की मीटिंग नाटकबाजी बंद करें।

और अब सड़क जाम की बात, पूरी राजधानी इन दिनों सड़क जाम से हलकान है। कमाल की बात है कि दुर्गापूजा, दीपावली, छठ, ईद, रैली, उत्सव आदि के अवसरों पर भी राजधानी इतनी तबाह नहीं हुई थी, मुख्यमंत्री का काफिला नहीं फंसा था, पर इन दिनों मुख्यमंत्री का काफिला फंस जा रहा है, आखिर क्या बात हो गई, क्या अचानक चारपहियों और दोपहियों वाहनों की संख्या राजधानी में बढ़ गई या कुछ और बात है।

मुख्यमंत्री से आग्रह खुद भी सुधरिये और दूसरों को भी सुधारिये

सच्चाई यह है कि रांची के लोग यातायात व्यवस्था के अंतर्गत आनेवाले नियमों की खुलकर अवहेलना करते है, सरकार को चाहिए कि इस पर कड़ी कार्रवाई करें, जो लोग यातायात नियमों का अवहेलना करते हैं, पर इससे भी ज्यादा जरुरी है कि सीएम स्वयं यातायात नियमों का पालन करें, क्योंकि हाल ही में देखा गया कि सीएम स्वयं यातायात नियमों को तोड़ते हुए बिना हेलमेट के दुपहियेवाहन चला दिये, इससे सरकार के इमेज पर खतरा पड़ता है, और उसके बाद जब आप बोलते है, तो जनता पर उसका असर नहीं दीखता, इसलिए पहले आप सुधरिये, उसके बाद लोगों को सुधारने का काम कीजिये।

यहां हर पर्व-त्यौहार तथा नमाज सड़क पर पढ़ने का प्रचलन बढ़ने लगा है, इस पर गंभीरता से रोक लगाइये, नहीं तो जब लोगों की धीरे-धीरे ये आदत बन जायेगी तो समस्याएं बढ़ेगी, सड़क को सड़क ही रहने दे, इसे मंदिर, मस्जिद या गिरिजाघर न बनने दें।

सड़कों पर किसी भी प्रकार की दुकानों को लगने नहीं दे, कानून को सख्त बनाये, फिर देखिये, रांची की रंगत बदल जायेगी, और इधर जो आपने छोटे-छोटे मार्गों को बंद करने का जो खेल शुरु किया है, वह आनेवाले समय में देखियेगा, भयानक संकट खड़ा करेगा, आप जिसे निदान समझ रहे हैं, वह भयंकर सड़क जाम का परिणाम बनकर आयेगा, इसलिए जरुरत हैं, सिर्फ कानून का पालन करिये और कराइये, समस्या ही नहीं रहेगी, जिन शहरों की बात आप कर रहे हैं, वहां पर भी कानून का शासन ही ऐसा कराती है, जिससे जाम नहीं होता, पर यहां वैसी बात नहीं। साथ ही नगर – निगम को योजना बनाने को कहिये कि भविष्य में रांची की जनसंख्या कैसी होगी, उसे सहूलियत प्रदान करने के लिए अभी से योजना बनाने को कहिये, क्योंकि ये लोग भविष्य को देखकर योजना नहीं बनाते और बेवजह के कामों में ज्यादा समय लगाते हैं, जिससे दिक्कतें आ रही हैं।

Krishna Bihari Mishra

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