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जो स्वयं को तोप समझते थे, उन्हें रांची प्रेस क्लब के मतदाताओं ने धूल चटाया

जो खुद को तोप मानते थे, जिनको गर्व था कि झारखण्ड का मतलब ही प्रभात खबर होता है, जो समझते थे कि जो प्रभात खबर चाह लेगा, वहीं होगा, जो इसी चाहत में प्रभात खबर के साथ सट कर एक टीम का गठन कर चुके थे तथा वोटों के गणित में स्वयं को सुरक्षित मान चुके थे, उनके लिए रांची प्रेस क्लब का चुनाव परिणाम एक सबक है। सबक उनके लिए भी जो अपने से छोटे को पत्रकार ही नहीं मानते थे और जब जहां देखा, उसे बेइज्जत करने से नहीं चूकते थे।

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उधर CM तीन साल की मस्ती में डूबे थे, इधर सांसद-मंत्री हो रही गड़बड़ियों से परेशान थे

क्या कोई भी व्यक्ति या संस्थान जिसने राज्य सरकार के साथ एमओयू किया हैं, क्या एमओयू करने के बाद उसे सरकारी लोगो तथा प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री या विभागीय मंत्री के फोटो को अपने विज्ञापन में प्रयोग में लाने का अधिकार मिल जाता हैं? भाजपा के ही सांसद महेश पोद्दार को, अपने ही सरकार के नगर विकास विभाग से पत्र लिखकर पुछने की यह आवश्यकता क्यों पड़ गई कि उन्हें आमंत्रण नहीं था, फिर भी उनका नाम विज्ञापन में कैसे आ गया?

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जोश में होश मत खोइये, प्रेस क्लब की सम्मान की रक्षा के लिए सजग रहिये

आज रांची प्रेस क्लब के लिए मतदान संपन्न हो गया। जैसा की संभावना व्यक्त किया गया था कि भारी मतदान होगा, वैसा ही दिखा भी। बताया जाता है कि 884 मतदाताओं में 804 लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया। आपसी प्रेम, भाईचारे व उत्साह के साथ संपन्न हुआ यह मतदान काफी दिनों तक याद किया जायेगा। इस चुनाव में सभी खड़े प्रत्याशियों के चेहरे पर गजब का उत्साह दिखा, सभी बिना किसी द्वेष के पंक्तिबद्ध मतदाताओं से मिलते रहे।

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रांची प्रेस क्लब का पहला आम चुनाव, पत्रकार मतदाता परीक्षा देने को तैयार

कल परीक्षा उन पत्रकार मतदाताओं की भी हैं, जो पत्रकारिता में सुधार के लिए लंबा-लंबा फेकते हैं, क्योंकि कल के ही मतदान से पता चल जायेगा कि रांची प्रेस क्लब का भविष्य क्या है?  क्योंकि अभी तक की जो स्थिति थी, वह हमने देख ही लिया, आगे देखना बाकी है। जब से चुनाव प्रक्रिया प्रारम्भ हुई है, तब से मैं देख रहा हूं कि रांची प्रेस क्लब के महत्वपूर्ण पदों पर काबिज करने के लिए रांची के विभिन्न संस्थानों के लोग लग गये।

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क्या आप ऐसे लोगों को वोट देंगे, जिन्होंने कभी आपको पत्रकार ही नहीं माना

रांची प्रेस क्लब का चुनाव हो रहा हैं। इसमें ऐसे-ऐसे घाघ लोग चुनाव लड़ रहे हैं, जिनके जीतने पर रांची प्रेस क्लब के सम्मान को ही खतरा हैं, क्योंकि जिसके पास जो चीजें रहती हैं, वहीं वह बांटता हैं। खुशी इस बात की है कि इस चुनाव में कुछ अच्छे चेहरे भी दिखाई पड़ रहे हैं, ये सारे के सारे नवोदित व युवा पत्रकार है, जिन्होंने अभी-अभी पत्रकारिता में अपने पांव बढाये हैं, जिनके चेहरे को देख कर लगता है कि ये कुछ करेंगे, क्योंकि इनमें करने की ताकत हैं।

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क्या आप जानते हैं, जेल जाते हुए नेता यह क्यों कहता हैं कि हमें अदालत पर भरोसा है

जब किसी नेता पर कोई अपराधिक आरोप लगाता है, और उसे न्यायालय के जब चक्कर लगाने पड़ते हैं या नीचली अदालत उसे दोषी करार देती है, तो ध्यान दीजियेगा, नीचली अदालत की फैसला आने के बाद, दोषी करार दिया गया नेता का बयान क्या होता है?  सभी का बयान एक ही रहता है कि मुझे न्यायालय पर भरोसा है। आप जानते है, वह ऐसा क्यों कहता है

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CM साहेब, क्षमा मांगने से कोई छोटा नहीं हो जाता, थोड़ा बड़प्पन दिखाइये

CM साहेब, याद रखिये, दुनिया का कोई भी व्यक्ति, अगर किसी से, किसी बात को लेकर क्षमा मांगता हैं, तो वह इस कारण से, छोटा नहीं हो जाता, बल्कि वह और उसका व्यक्तित्व और निखरता हैं। शायद यहीं कारण रहा होगा कि सुसिद्ध कवि रामधारी सिंह दिनकर ने लिखा –क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो, उसको क्या जो दंतहीन, विषरहित, विनीत, सरल हो।

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जनसमस्याएं यथावत, CM रघुवर के मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र पर अब उठ रहे सवाल

ढाई साल पहले, खुब हो-हल्ला कर, ढोल बजाकर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र खोला। जनता को बताया गया कि इसके द्वारा उनकी समस्या देखते-देखते समाप्त हो जायेगी, पर सच्चाई यह है कि जनता की समस्या तो दूर नहीं हो रही, इस केन्द्र को चलानेवाले लोग मालामाल जरुर हो गये। आज भी जनता अपनी समस्या को हल कराने के लिए दर-दर भटक रही हैं, पर जनसमस्याएं हल होने का नाम नहीं ले रही।

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लीजिये हाथी उड़ानेवाले CM रघुवर अब झारखण्ड में भगवा बल्ब जलायेंगे

लीजिये अब तक आपने सुना था हरित क्रांति, श्वेत क्रांति, नीली क्रांति और अब सुनिये भगवा क्रांति। भगवा क्रांति नया – नया ईजाद हुआ है और इसे ईजाद करने का श्रेय जाता हैं, इस देश के सर्वाधिक बुद्धिमान मुख्यमंत्री रघुवर दास को। ये देश के एकमात्र बुद्धिमान मुख्यमंत्री हैं, जिसे भारत के प्रधानमंत्री ने झारखण्ड राज्य की जनता के लिए चुना और यहां की जनता के माथे बिठा दिया।

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जिस राज्य में संतोषी भूख से दम तोड़ती हैं, वहीं का CM बैलून उड़ाने में 2 लाख उड़ा देता है

सीएम रघुवर दास के शासनकाल में झारखण्ड ऐसा बदला कि यहां का सीएम मात्र दो दिन में ही एक करोड़ 76 लाख रुपये अपने खाने पर उड़ा देता है। यहीं नहीं बैलून उड़ाने का इतना शौक उसे हो जाता है कि वह दो लाख रुपये बैलून उड़ाने में फूंक देता हैं। बिना यात्री के वह चार्टर्ड विमान उड़ा देता हैं। बजट परिचर्चा कराने को गढ़वा जाता हैं और वहां एक समुदाय को आपत्तिजनक शब्द बोलकर चल देता हैं, वह सदन में अपने विरोधियों को भी गाली से नवाजता हैं

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