CM रघुवर का विभाग IPRD, जहां एक सही पत्रकार को अधिमान्यता के लिए नाक रगड़ने पड़ते हैं

जब कोई पत्रकार सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के द्वारा बनाये गये नियमों का सम्मान करते हुए, उसके नियमों का पालन करता है, तो फिर ऐसे में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अधिकारियों को उसे अधिमान्यता प्रदान करने में क्यों दिक्कत होती हैं? ये समझ से परे हैं। चलिये ये भी मान लिया कि आपको उक्त पत्रकार को अधिमान्यता देने में दिक्कत आ रही हैं, या उससे आप घृणा करते हैं,

जब कोई पत्रकार सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के द्वारा बनाये गये नियमों का सम्मान करते हुए, उसके नियमों का पालन करता है, तो फिर ऐसे में सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के अधिकारियों को उसे अधिमान्यता प्रदान करने में क्यों दिक्कत होती हैं? ये समझ से परे हैं। चलिये ये भी मान लिया कि आपको उक्त पत्रकार को अधिमान्यता देने में दिक्कत आ रही हैं, या उससे आप घृणा करते हैं, या ये भी मान लिया कि आपने संकल्प ही कर लिया कि आप जब तक अपने पद पर रहेंगे, आप उसे अधिमान्यता न देंगे और न दिलवायेंगे, तो ऐसे में आप अपने वेबसाइट पर यह कहकर क्यों लटका कर रखे हैं, मामला डायरेक्टर के पास लंबित है, आखिर ये लंबित हुए मामले को कब तक सुलझाने का समय हैं? यह उक्त पत्रकार को क्यों नहीं मालूम होना चाहिए?

सच्चाई यह है कि जैसे हर विभाग में भ्रष्टाचार महाराज और सिफारिश महारानी की चलती है, ठीक उसी प्रकार झारखण्ड के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में भ्रष्टाचार महाराज और सिफारिश महारानी की चलती है। अगर आपके पास सिफारिश है, अगर आपके पास भ्रष्टाचार में आकंठ डूबने तक की कला है तो आपको अधिमान्यता तुरंत मिल जायेगी, और अगर आप इन दोनों में से पारंगत नहीं हैं तो नाक रगड़ते रह जाइयेगा, आपको प्राप्त नहीं होगा।

यहां अधिमान्यता दिलाने के लिए एक समिति भी है, उस समिति में भी गड़बड़झाला है, जो पत्रकार नहीं है, जिन्हें स्वयं दूरदर्शन के आला अधिकारी ही पत्रकार नहीं मानते हैं, उन्हें अधिमान्यता समिति का सदस्य बना दिया जाता है, यहीं नही, वह व्यक्ति अधिमान्यता भी प्राप्त कर लेता है, और उसका फायदा भी उठाता है, पर जो सही मायनों में पत्रकार है, वह चप्पल घिसता रह जाता है, पर उसे अधिमान्यता नहीं मिलती। ऐसे उदाहरण कई हैं पर हमें लगता है कि एक ही उदाहरण काफी है, ये बताने के लिए, कि यहां क्या गड़बड़झाला है?

एक हैं मुकेश भारतीय, बेचारे वेबसाइट चलाते है, पत्रकार है, उन्होंने अधिमान्यता के लिए आवेदन दिया, पर उनका आवेदन पिछले छः महीने से अधिमान्यता के लिए डायरेक्टर के पास लंबित है, जब ये जनाब डायरेक्टर से बात करते है, तब डायरेक्टर का कहना है कि उनके पास कोई ऐसा मामला लंबित नहीं है, लेकिन सच्चाई सब के सामने है। आज भी, आप सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के साइट पर जाइये और POR1197 लिखिये, आपको सच्चाई का पता चल जायेगा।

हाल ही में एक स्वतंत्र महिला पत्रकार ने अधिमान्यता के लिए आवेदन दिया, और वे सारे नियमों को फुलफिल कर रही है, पर उन्हें अधिमान्यता नहीं दी गई, जबकि एक ऐसे पत्रकार को अधिमान्यता दे दी गई, जो सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के नियमों को फुलफिल करता ही नहीं। अब ऐसे में क्या किया जाये, जब इस विभाग के मंत्री ही मुख्यमंत्री रघुवर दास और सचिव सुनील बर्णवाल हो, तो फिर तो यहां ये सब होना सामान्य बात हैं, चलिए हम सब मिलकर एक नारा बोले – भ्रष्टाचार बढ़े, झारखण्ड बढ़े। हम सब ने ठाना है, भ्रष्टाचार बढ़ाना है। कैसे बढ़ेगा झारखण्ड, भ्रष्टाचार से ही बढ़ेगा झारखण्ड। …और, अंत में एक और नारा जो बहुत ही जरुरी है। सब मिलकर बोलिये – जो सदाचार अपनायेगा, उलटा लटकाया जायेगा।

Krishna Bihari Mishra

2 thoughts on “CM रघुवर का विभाग IPRD, जहां एक सही पत्रकार को अधिमान्यता के लिए नाक रगड़ने पड़ते हैं

  1. चोट्टों का राज ही ..चलता रहेगा।।
    हमने भी कोशिश की कि गमार बन जाए,पर 05 साल में भी नही बना,,वो पत्रकार समिति हमें पहचानती ही नही जो कभी ग्राउंड पर ही नहीं दिखे..अन्हरा आगे रोई, अपनो दीदा खोई,
    अतः हमने इस विभाग से अपना सम्बन्ध जोड़ने की इक्षा ही त्याग दी।।

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