शर्मनाक, एक पत्रकार, बिहारियों पर ऐसा दाग लगाया कि ये दाग कभी धूलनेवाला नहीं
जब से मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित कहानी नमक का दारोगा के अलोपीदीन ज्ञानचक्षु खुलने के बाद, ईमानदार वंशीधर के घर जाना छोड़ दिये, तभी से हमारे समाज में ब्रजेश ठाकुर जैसे दैत्यों का बोलबाला और उनका जाल इस कदर फैला कि वह दैत्य हाथों में हथकड़ी पहनने तथा जेल जाने के बाद भी न तो उसने अपना मुंह छुपाया, बल्कि अट्टहास करता हुआ, फोटो खिंचवाते हुए जेल की ओर चल पड़ा।
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