अपनी बात

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अपने जमीर को बेचियेगा और कहियेगा कि हमारा शहर गंदा है, यह ठीक नहीं

आप युवा है न। मतदाता है न। …और जब मतदान का समय आयेगा, या किसी दल के लिए आपको पोलिंग एजेंट बनने की बात आयेगी या उसके प्रचार-प्रसार में उतरने की बात आयेगी, तो आप उक्त दल या प्रत्याशी से खुलकर एक दिन के हिसाब से दो हजार रुपये का डिमांड करेंगे, बिना दो हजार का नोट लिये आप टस से मस नहीं होंगे और चुनाव संपन्न हो जाने के बाद, जब उक्त दल या प्रत्याशी जीत जायेगा

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सतुआनी यानी बचपन में “टुइयां” खरीदने और  “नाच बगइचां” जाने की जिद करने का दिन

पटना से 12 किलोमीटर की दूरी पर है – दानापुर कैंट। दानापुर कैंट से करीब तीन से चार किलोमीटर दूर पर है – नासिरीगंज। ऐसे यह नासिरीगंज, दानापुर कैंट और गांधी मैदान पटना मार्ग पर पड़ता हैं। इसी नासिरीगंज इलाके करीब 40 वर्ष पूर्व तक एक बहुत बड़ा खुला खेत हुआ करता था, जिसे लोग “नाच बगइचां” कहा करते थे। ये “नाच बगइचां” कैसे नाम पड़ा? मैं नहीं जानता और न ही किसी बाग-बगइचां को नाचते देखा, पर चूंकि नाम था – “नाच बगइचां”

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एक ब्राह्मण ने जमशेदपुर साकची में स्थित अम्बेदकर प्रतिमा को अपने हाथों से साफ किया

आम तौर पर विभिन्न दलित तथा विभिन्न तथाकथित स्वयंसेवी संगठनों, पिछड़ों तथा अतिपिछड़ों के नाम पर राजनीति करनेवाले विभिन्न संगठनों और उनके नेताओं की ये धारणा रहती है कि ब्राह्मण वर्ग दलितों को सम्मान नहीं देता अथवा उनके महापुरुषों को सम्मान नहीं करता, पर सच्चाई देखा जाय, तो इस तरह का भेदभाव अब आधुनिक समाज में नहीं देखने को मिलता।

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घोर आश्चर्य? जिसे उपवास का मतलब नहीं मालूम, वो उपवास पर लेक्चर दिये जा रहा है

आजकल दो उपवासों का चर्चा पूरे भारतीय समाज में खूब उछाला जा रहा हैं। एक कांग्रेस का दलितों के नाम पर कुछ दिन पहले हुआ उपवास और दूसरा संसद नहीं चलने देने को लेकर भाजपा का उपवास। आश्चर्य इस बात की है, जिन्हें उपवास का अर्थ नहीं मालूम, वे भी आजकल धर्माचार्य बनकर खूब दिये जा रहे है, फेसबुक, व्हाट्सएप तो ऐसे धर्माचार्यों से भरे पड़े है। पूरा समाज जिनको धर्म की एबीसीडी नहीं मालूम,

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घायल “प्रेम” मदद की गुहार लगाता रहा और लोग उसे देखते और चल देते, तभी…

दिनांक – 11 अप्रैल 2018, रात्रि 11.30 बजे, स्थान – एसएसपी आवास के आसपास। प्रेम कराह रहा था, प्रेम मदद मांग रहा था, लोग उसे देखते और आगे बढ़ जाते। कई गाड़ियां रुकी, पर किसी ने उसकी मदद करने के लिए हाथ नहीं बढ़ाया। प्रेम कराह रहा था, प्रेम दुर्घटना का शिकार था। किसी ने उसकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी थी. जिसके कारण उसके दोनों पांव टूट चुके थे।

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जानिये समस्तीपुर के डा. अशोक को, जिन्होंने दंगाइयों से 20 मुस्लिम बच्चों की जान बचाई

जब तक बिहार में डा. अशोक मिश्र जैसे इन्सान जीवित है, दुनिया की कोई ताकत मानवता की बुनियाद को हिला नहीं सकती। बिहार ऐसे ही लोगों के कारण जाना जाता है। बिहार में सांप्रदायिक सद्भाव की जड़े इतनी गहरी है कि कोई इसे हिला नही सकता, बस जरुरत है, ऐसे लोगों के मनोबल, और उनके उत्साह को बढ़ाने की सम्मान देने की।

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पूरे देश से जुटे शाकद्वीपीय बंधु, गया में मग मिलन महोत्सव का हुआ आगाज

गया में आज से दो दिवसीय मग मिलन महोत्सव का आगाज हुआ। इसका उद्घाटन स्वामी शैलेन्द्रानन्द सरस्वती ने किया। इस मग मिलन महोत्सव में राजस्थान, असम, बिहार, झारखण्ड समेत बंगाल आदि में रह रहे शाकद्वीपीय बंधुओं ने हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए स्वामी शैलेन्द्रानन्द सरस्वती ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख हैं, कि आज दूसरा समाज अपने हक की लड़ाई के लिए एकताबद्ध होकर संघर्ष कर रहा हैं,

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बाबा बनिये, नेता को धकियाइये और फिर राज्य मंत्री का सत्ता सुख प्राप्त करिये…

ये माडर्न बाबा हैं, इन्हें मोक्ष से ज्यादा मंत्री पद चाहिए, क्योंकि शायद उन्हें इसी से सद्गति मिलेगी। आज के बाबाओं को सत्ता सुख चाहिए। आज के बाबाओं को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के साथ सेल्फी चाहिए, साथ ही आज के बाबाओं को उद्योगपति भी बनना है, इसलिए उन्हें कौड़ी के भाव सरकारी जमीन भी चाहिए, ताकि वे भारत और विश्व के उद्योगपतियों को उनकी औकात बता सकें।

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पुनर्विचार याचिका पर तुंरत सुनवाई से इनकार कर सुप्रीम कोर्ट ने बताया हमारे लिए देश महत्वपूर्ण

आइये एक कहानी सुनाते है, एक गांव था। उस गांव में एक बहुत बड़ा गुंडा रहा करता था। उसके गुंडई से पूरे गांव के लोग और महिलाएं परेशान थी। उस गुंडे के आतंक से बचने के लिए, गांव के लोगों और महिलाओं ने अपने ही गांव में पनप रहे एक नये गुंडे को मजबूत करना शुरु किया, ताकि वे वर्तमान गुंडे से बच सकें, फिर क्या था नये वाले गुंडे की भाव बढ़नी शुरु हुई, नये गुंडे ने जल्द ही पुराने गुंडे का सफाया कर दिया।

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मोतिहारी में समाचार संकलन कर रहे एक पत्रकार को बंद समर्थक गुंडों ने बनाया अपना निशाना

बिहार में भारत बंद का सर्वाधिक विकृत चेहरा अगर कहीं नजर आया तो वह मोतिहारी का इलाका रहा, जहां सबेरे से ही बंद समर्थकों ने जमकर गुंडागर्दी की, तथा स्थानीय नागरिकों को अपना निशाना बनाया, बेचारे स्थानीय नागरिक क्या करते, अपनी जान-माल बचाने के लिए उन्हें भी बंद समर्थकों से मजबूरन दो-दो हाथ करना पड़ा।

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