EC द्वारा मतदाताओं को जागरुक करने के उद्देश्य से चलाये गये अभियान पर पत्रकारों का कब्जा

बहुत सारे पत्रकार, उनके परिवार और इसे पेशे से जुड़े लोग प्रथम मतदाता का सर्टिफिकेट लेकर इतरा रहे हैं, और उसके साथ फोटो खींचाकर फेसबुक पर डाल रहे हैं, शायद वे नहीं जान रहे कि उन्होंने मतदाताओं का हक छीना है। इस बार पहली बार, राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं में जागरुकता लाने के लिए यह सुंदर प्रयास प्रारंभ किया था, ताकि वह आम मतदाता, जो अपने वोट देने के अधिकार को, उसके महत्व को नहीं समझता,

बहुत सारे पत्रकार, उनके परिवार और इसे पेशे से जुड़े लोग प्रथम मतदाता का सर्टिफिकेट लेकर इतरा रहे हैं, और उसके साथ फोटो खींचाकर फेसबुक पर डाल रहे हैं, शायद वे नहीं जान रहे कि उन्होंने मतदाताओं का हक छीना है। इस बार पहली बार, राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं में जागरुकता लाने के लिए यह सुंदर प्रयास प्रारंभ किया था, ताकि वह आम मतदाता, जो अपने वोट देने के अधिकार को, उसके महत्व को नहीं समझता, उसमें इसको लेकर जागरुकता आये, तथा इस सर्टिफिकेट को प्राप्त करने के लिए ही कम से कम मतदान केन्द्र तक पहुंचे, वोट गिराये।

पर ये क्या? आम मतदाता तो अखबार उतना पढ़ता नहीं, चैनल देखता नहीं, उसे क्या मालूम? कि राज्य निर्वाचन आयोग ने उनके लिए इस बार क्या विशेष व्यवस्था की है? पर इसकी जानकारी विभिन्न संवाददाता-सम्मेलन में जानेवाले उन सारे अखबारों व चैनलों के पत्रकारों को थी, जो इस पेशे से जुड़े हैं, उन्होंने खूब इसका फायदा उठाया और लीजिये सर्टिफिकेट लेते ही, कोई खुद अपनी सेल्फी खींचा रहा है, कोई अपनी पत्नी के साथ अपना फोटो सर्टिफिकेट के साथ सेल्फी खीचवा रहा हैं, कोई सिर्फ अपनी पत्नी का ही फोटो लेकर फेसबुक पर डाले जा रहा हैं, पर उसे यह नहीं मालूम कि उसने उन मतदाताओं का हक छीन लिया, जिनके लिए ये कार्यक्रम आयोजित था।

अरे आप तो जागरुक हो ही, आपको सर्टिफिकेट मिले या न मिले, क्या फर्क पड़ता है? ऐसे भी ये सर्टिफिकेट मिल जायेगा तो आप क्या कर लोगे? पर सामान्य मतदाता को ये प्राप्त होता तो उसका असर होता, और इस असर को समझने की जरुरत हैं, ये कहना कि क्या पत्रकार मतदाता नहीं होता, ये आपके अंदर छुपी अपराधिक मनोवृत्ति को दर्शाता है, ऐसे में क्या पत्रकार पॉलिटिशयन नहीं होता, क्या पत्रकार डाक्टर नहीं हो सकता, क्या पत्रकार शिक्षक नहीं हो सकता, ऐसे ही हर बात में हो नहीं सकता, कह-कहकर हर जगह अपनी मठाधीशी दिखलायेंगे तो आप ऐसे ही सब के नजर से गिरते जा रहे है, बड़ी जल्दी ही उन सामान्य जनता की नजरों से भी गिर जायेंगे, जिनके नजरों में आप अभी भी इन्सान के रुप में देखे जा रहे हैं।

कई मित्र हमारे, जो पत्रकार है, उन्होंने सामान्य सी टिप्पणी कर दी कि क्या पत्रकार मतदाता नहीं होता, अरे भाई पत्रकार मतदाता क्यों नही होता, वह बहुत कुछ होता है, पर किसी का हक नहीं छीनता, कोई कार्यक्रम जागरुकता के लिए चलाया जा रहा है तो जिसके लिए ये कार्यक्रम चल रहा है, उस तक ये बात पहुंचाने के लिए पत्रकार खड़ा होता है, न कि उसका लाभ स्वयं ले लेता है, अगर आप लाभ लेनेवाले पत्रकार हो, तो भाई आपको सलाम, क्योंकि आपसे न तो देश का भला होगा और न ही समाज का, अरे आप तो अपने परिवार का भी भला नहीं कर सकते।

आप एक सामाजिक बोझ हो, जो जब तक जिंदा रहेगा, केवल मैं-मैं करता रहेगा, और अंत में टें बोल देगा। मैं तो अभी भी कहता हूं कि समझना है तो समझिये, नहीं समझना है तो हम आपको समझाने के लिए ठेका भी नहीं ले रखे हैं, पर इतना जरुर हैं कि आप गलत करेंगे, तो हम आपको आइना जरुर दिखायेंगे। फिलहाल, ऐसे पत्रकारों के बहुत सारे फोटो हमारे पास मौजूद हैं, जिन्होंने फेसबुक पर बड़े शान से अपने फोटो डाल रखे है, पर उनके सम्मान प्रभावित नहीं हो, हम उनके फोटो यहां नहीं डाल रहे हैं, क्योंकि हमारी मनसा किसी के इज्जत से खेलने की नहीं, बल्कि उन तक अपनी सच्ची बातें पहुंचाने की हैं, ताकि उनमे सुधार हो।

Krishna Bihari Mishra

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