प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केवल ये बता दें कि क्या झारखण्ड भारत में नहीं है?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केवल ये बता दें कि क्या झारखण्ड भारत में नहीं है? यह सवाल इसलिए कि अगर झारखण्ड भारत में होता तो कम से कम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न तो कल ट्वीट करते और न ही आज फुल पेज के विज्ञापन के माध्यम से अपना पीठ थपथपाते हुए ये कह रहे होते कि उन्होंने भारत के प्रत्येक गांव में बिजली पहुंचाने का वादा पूरा कर दिया, सच्चाई यह है कि झारखण्ड के अभी सैकड़ों गांव ऐसे है, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी केवल ये बता दें कि क्या झारखण्ड भारत में नहीं है? यह सवाल इसलिए कि अगर झारखण्ड भारत में होता तो कम से कम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी न तो कल ट्वीट करते और न ही आज फुल पेज के विज्ञापन के माध्यम से अपना पीठ थपथपाते हुए ये कह रहे होते कि उन्होंने भारत के प्रत्येक गांव में बिजली पहुंचाने का वादा पूरा कर दिया, सच्चाई यह है कि झारखण्ड के अभी सैकड़ों गांव ऐसे है, जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है और न ही राज्य सरकार ही दावा कर सकती है कि उसने झारखण्ड के प्रत्येक गांव में बिजली पहुंचा दी है।

आश्चर्य यह है कि प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी सच्चाई को जानते हुए भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस बयान का खंडन नहीं कर रही, बल्कि बचाव की मुद्रा में बयान दे रही है, जबकि विद्रोही 24. कॉम शुरु से ही इस बात का विरोध कर रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस बयान में तनिक भी सच्चाई नहीं है कि उन्होंने देश के सभी गांवों में बिजली पहुंचा दी। स्वयं झारखण्ड के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने भी कुछ दिन पहले केन्द्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री आर के सिंह से मिलकर, कहा था कि दावा करने के पहले झारखण्ड के जनप्रतिनिधियों से पूछ लिजियेगा कि क्या उनके इलाके के सभी गांवों-टोलों में बिजली पहुंच गई? सरयू राय का यह सवाल बताने के लिए काफी था कि झारखण्ड में हर गांव में बिजली पहुंचाने की स्थिति ठीक नहीं चल रही और झारखण्ड के कई गांव आज भी बिजली से वंचित है।

झारखण्ड में सर्वाधिक खराब स्थिति रांची से सटे खूंटी जिले की है। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके करिया मुंडा के पंचायत बारुदी समेत तिलमा, बिरहू जैसे करीब 250 से भी अधिक गांवों में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। यहीं हाल गोड्डा के कई गांवों का है, जहां बिजली के तार और खंभे मौजूद है, पर बिजली नहीं है। पाकुड़ के लिट्टीपाड़ा और अमड़ापाड़ा प्रखंड के कई गावों जो पहाड़िया बहुल है, वहां भी बिजली नहीं पहुंची है।

सरायकेला खरसांवा के करीब 14 गांवों में अभी तक बिजली नहीं पहुंची है। देवघर में एक हजार से अधिक टोले जबकि पूर्वी सिंहभूम के 1200 से भी अधिक टोलों में बिजली नहीं पहुंची है। साहिबगंज जिले के 40 गांवों में भी बिजली का यहीं हाल है, यानी बिजली नहीं पहुंची है। सिमडेगा जिले के करीब 400 टोलों में अभी बिजली पहुंचाने का काम बाकी है। नक्सल प्रभावित इलाके चतरा के पांच सौ से भी अधिक गांवों में बिजली नहीं है।आश्चर्य इस बात की है यहां बिजली पहुंचाने के लिए खंभे ही नहीं है। यहीं हाल लातेहार व डालटनगंज का हैं, जहां करीब ढाई हजार से अधिक टोलों में बिजली नहीं पहुंच पाई है। हजारीबाग में करीब ज्यादातर गांवों में बिजली पहुंच गये हैं, पर यहां भी शत प्रतिशत गांवों में बिजली पहुंच गई, इसका दावा न तो राज्य सरकार कर सकती है और न ही विद्युत विभाग।

ज्ञातव्य है कि ऊर्जा विभाग, राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास के जिम्मे ही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब ऊर्जा विभाग स्वयं मुख्यमंत्रीके पास है और तब राज्य के गांवों में बिजली पहुंचाने की स्थिति यह है, यानी दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना का ये हाल है, तो अन्य मंत्रियों के विभागों की क्या  हाल होगी? अंदाजा लगाया जा सकता है,  हालांकि मुख्यमंत्री रघुवर दास, 2018 के अंत-अंत तक राज्य के सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का बयान देते रहे है, ऐसे भी इस साल के चार महीने बीत चुके है, आठ महीने शेष है, देखिये ये शेष गांवों-टोलों तक कब तक बिजली पहुंचाते है, फिलहाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस बयान, कि उन्होंने पूरा किया गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने का वादा, पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ब्रेक जरुर लगा दिया है।

Krishna Bihari Mishra

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