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रांची प्रेस क्लब में कैंटीन आउटसोर्सिंग के माध्यम से, विरोध के स्वर बुलंद

आउटसोर्सिंग की आम तौर पर विरोध करनेवाला पत्रकार वर्ग, कैसे आउटसोर्सिंग पर दोहरा मापदंड अपनाता है, उसका सबसे सुंदर उदाहरण है, रांची प्रेस क्लब। जहां आज प्रेस क्लब में चलनेवाली कैंटीन को आउटसोर्सिंग के हवाले कर देने के मुद्दे पर मतदान हुआ, जिसमें ज्यादातर लोगों ने आउटसोर्सिंग के पक्ष में मतदान किया, यानी 14 मतदाताओं में दस ने आउटसोर्सिंग के पक्ष में मतदान किया,

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सत्ता, सरकार और कार्यकर्ता लगे अमित की भक्ति मेें, ट्रैफिक नियमों की उड़ी धज्जियां

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अपने एकदिवसीय प्रवास पर रांची आ चुके हैं, इस एक दिन की यात्रा पर वे बहुत सारा काम करना प्रारम्भ कर चुके हैं, भाजपा को मजबूती प्रदान करने के लिए भाजपा समर्थित आदिवासियों से बातचीत, अपने मीडिया और आइटी सेल के लोगों को गुढ़ मंत्रों और उनके रहस्यों से वे साक्षात्कार कराने की भी योजना बना रहे हैं,

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गत 20 दिनों से गंगा की रक्षा के लिए आमरण अनशन पर बैठा है हरिद्वार में एक संत

आइआइटी कानपुर के पूर्व प्राध्यापक, सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद् प्रो. गुरुदास अग्रवाल जो संन्यास लेने के बाद स्वामी ज्ञानस्वरुप सानन्द जी के नाम से विख्यात है, फिलहाल गंगा सफाई की मांग को लेकर मातृ सदन आश्रम हरिद्वार में पिछले 22 जून से आमरण अनशन पर बैठे हैं, उन्होंने संकल्प कर रखा है कि वे गंगा की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति दे देंगे,

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अमित शाह के बाइक जुलूस में शामिल भाजपा कार्यकर्ताओं का बीमा हुआ है या नहीं?

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एक बार फिर कल रांची पधार रहे हैं। उनके रांची पधारने को लेकर, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं में खूब जोश देखने को मिल रहा हैं। बताया जा रहा है कि शाही अंदाज में इस बार अमित शाह का स्वागत होगा। करीब 2000 मोटरसाइकिल सवार भाजपा कार्यकर्ता, अपने नेता को शाही अंदाज में अगुवाई करेंगे।

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रघुवर भक्ति में डूबे अखबारों-चैनलों ने दबाया विपक्ष और जनता की आवाज

मैं दावे करता हूं कि जो भी रिपोर्टर, चाहे वे किसी अखबार या चैनल के हो, उन्होंने जो कल महाबंद के दौरान देखा होगा, वे सही-सही रिपोर्ट अपने-अपने अखबारों व चैनलों में जरुर किये होंगे, पर अखबारों-चैनलों के मालिकों और संपादकों ने सरकारी विज्ञापनों और मुख्यमंत्री रघुवर दास के साथ पीआर बनाने के चक्कर में उन रिपोर्टरों के द्वारा दिये गये समाचारों के साथ अन्याय करते हुए,

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भाजपा प्रवक्ता की तरह पेश आए, झारखण्ड के DGP, खुलकर की CM की प्रशंसा

जरा सोचिये, किसी राज्य के पुलिस महानिदेशक पद पर बैठा व्यक्ति, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या किसी राजनीतिक दल या सत्तारुढ़ दल के प्रवक्ता के रुप में खुद को पेश करें, तो आपको कैसा लगेगा? आप सोचेंगे कि कहीं ये लोकसभा या राज्यसभा जाने की तैयारी तो नहीं कर रहा, या उसकी इससे भी बड़ी कोई महत्वाकांक्षा तो नहीं,

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हमें खुशी हैं कि इंसानियत आज भी जिंदा है, प्रकाश सहाय जी आपका जवाब नहीं

प्रकाश सहाय, एक खांटी प्राध्यापक, खांटी पत्रकार और सबसे बड़ा खांटी इन्सान हैं, एक अच्छे इन्सान, जिनका दिल भारतीय संस्कृति और इन्सानियत के लिए सदैव धड़कता रहता है। आज अहले सुबह इन्होंने अपने फेसबुक सोशल साइट पर एक पोस्ट डाला है, जो हृदय विदारक है, मार्मिक है, हृदयस्पर्शी है। हो सकता है, किसी के लिए ये घटना छोटी हो सकती है,

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पांच जुलाई को झारखण्ड महाबंद यानी सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच मूंछ की लड़ाई

जिस प्रकार से मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने मातहत कार्य कर रहे अधिकारियों के एक बड़े वर्ग को हांकने में लगे हैं और इस बंद को विफल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दिये हैं, तथा जिस प्रकार संपूर्ण विपक्ष अपने इस महाबंद को सफल बनाने के लिए गांव-गांव, शहर-शहर, विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं से सहयोग लेने का प्रयास कर रहा हैं,

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पांच जुलाई के झारखण्ड बंद ने CM रघुवर ही नहीं, बल्कि पूरे महकमें का नींद उड़ाया

पांच जुलाई को संपूर्ण विपक्ष के झारखण्ड बंद ने रघुवर सरकार के हाथ-पांव फुला दिये हैं, सीएम रघुवर दास पांच जुलाई के बंद से इतने भयभीत है कि वे अपने मातहत कार्य कर रहे सभी अधिकारियों को हिदायत दे दी है कि वे किसी भी कीमत पर इस झारखण्ड बंद को सफल नहीं होने दें, स्थिति ऐसी है कि भाजपा ही नहीं, पूरा जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन इस बंद को विफल कराने में ऐड़ी-चोटी एक किये हुए हैं,

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अपना के हइये ना, जगतर्र के दानी, यानी गोड्डा से बांगलादेश को बिजली देने की तैयारी

आपने वो लोकोक्ति जरुर सुनी होगी, अपना के हइये ना, जगतर्र के दानी, यानी खुद खाने को नहीं और दूसरे को खिलाने का दंभ भरते हैं। पूरे राज्य में बिजली का अभूतपूर्व संकट है, धनबाद, बोकारो, गोड्डा, रांची, डालटनगंज, गढ़वा, झारखण्ड के कितने शहर का हम नाम गिनाएं, जहां के लोग बिजली के लिए तरस रहे हैं, स्थिति तो ऐसी है कि एक बार बिजली गई तो कब आयेगी, कहना मुश्किल हैं।

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