रांची प्रेस क्लब में कैंटीन आउटसोर्सिंग के माध्यम से, विरोध के स्वर बुलंद

आउटसोर्सिंग की आम तौर पर विरोध करनेवाला पत्रकार वर्ग, कैसे आउटसोर्सिंग पर दोहरा मापदंड अपनाता है, उसका सबसे सुंदर उदाहरण है, रांची प्रेस क्लब। जहां आज प्रेस क्लब में चलनेवाली कैंटीन को आउटसोर्सिंग के हवाले कर देने के मुद्दे पर मतदान हुआ, जिसमें ज्यादातर लोगों ने आउटसोर्सिंग के पक्ष में मतदान किया, यानी 14 मतदाताओं में दस ने आउटसोर्सिंग के पक्ष में मतदान किया,

आउटसोर्सिंग की आम तौर पर विरोध करनेवाला पत्रकार वर्ग, कैसे आउटसोर्सिंग पर दोहरा मापदंड अपनाता है, उसका सबसे सुंदर उदाहरण है, रांची प्रेस क्लब। जहां आज प्रेस क्लब में चलनेवाली कैंटीन को आउटसोर्सिंग के हवाले कर देने के मुद्दे पर मतदान हुआ, जिसमें ज्यादातर लोगों ने आउटसोर्सिंग के पक्ष में मतदान किया, यानी 14 मतदाताओं में दस ने आउटसोर्सिंग के पक्ष में मतदान किया, जबकि चार लोगों ने आउटसोर्सिंग के विरोध में मतदान किया। बताया जाता है कि आउटसोर्सिंग के विरोध में वोट करनेवालों में संजय रंजन, सोहन सिंह, प्रदीप सिंह और गिरिजा शंकर ओझा के नाम प्रमुख रहे।

सूत्र बताते है कि पिछले कई दिनों से चल रहे प्रेस क्लब की कैंटींन को लेकर किसी ने शिकायत दर्ज नहीं कराई, सभी ने इसकी प्रशंसा की, तथा कई पत्रकारों के परिवारों के सदस्यों ने इस कैंटीन का भरपूर लाभ उठाया, कुछ लोगों द्वारा कैंटीन की प्रशंसा फेसबुक पर कर दिये जाने से भी इस कैंटीन का चौतरफा सम्मान हुआ, पर किस कारण से इसे आउटसोर्सिंग को देने पर रांची प्रेस क्लब के नवनिर्वाचित अध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव समेत कार्यकारिणी के कई सदस्यों ने हामी भर दी, किसी को समझ नहीं आ रहा।

आम तौर पर आउटसोर्सिंग की बात तभी आती है, यदि जिसे कोई चीज चलाने को दिया गया, पर उसने ईमानदारी से उसे नहीं चलाया तथा उसी संस्थान से कोई दूसरा चलाने को तैयार नहीं हो, पर यहां तो ऐसा भी नहीं हैं, अभी रांची प्रेस क्लब के गठन हुए, जूम्मे-जूम्मे सात महीने भी ठीक से नहीं हुए, पर लोगों ने अपने-अपने जलवे दिखाने शुरु कर दिये, कई तो ऐसे लोग हैं, जो कभी प्रेस क्लब आते नहीं, निर्वाचित हो गये, पद प्राप्त हो गया और लगे देह ऐठने, घर में बैठने और किसी-किसी कार्यक्रम में बैठकर गुलदस्ते प्राप्त करने, कि वे प्रेस क्लब के फलां हैं।

भाई आपको पत्रकारों ने इसलिए तो आपको उक्त स्थान पर नहीं बिठाया, आपको तो रांची प्रेस क्लब का सम्मान बढ़ाना था, पर आप कर क्या रहे हैं, आप तो निर्णय ऐसे ले रहे है कि रांची प्रेस क्लब को किसी ने आपको निबंधित कर दिया है कि जो चाहे आप करें, आप ये न भूले आपको रांची प्रेस क्लब चलाने के लिए दिया गया है, उसको जैसे-तैसे ले चलने के लिए नहीं, आम तौर पर अगर घर का ही कोई सदस्य बेहतर ढंग से कोई चीज चला रहा हैं, तो उसका मनोबल बढ़ाइये।

न कि आप अपने चहेतों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से रांची प्रेस क्लब में आमंत्रित कर दीजिये, ऐसे भी हम आपको बता दें कि विद्रोही 24.कॉम को आपके रांची प्रेस क्लब से कोई मतलब भी नहीं, क्योंकि  हमने पूर्व में ही संकल्प कर लिया कि मुझे रांची प्रेस क्लब में पांव तक नहीं रखना और न ही इसके किसी सदस्य से संबंध रखना है और न ही कोई मतलब रखना है, क्योंकि मैं जानता हूं कि…

सबै सहायक सबल को, निर्बल को न सहाय।

पवन जगावत अनल को, दीपहि देत बुझाय।।

इसी बीच रांची प्रेस क्लब के कार्यसमिति सदस्य सोहन सिंह ने विद्रोही 24.कॉम को बताया कि वे किसी भी हालत में निजी हाथों में प्रेस क्लब के कैंटीन को जाने नहीं देंगे, वे इसका विरोध करते रहेंगे, कुछ लोगों ने अपने निजी स्वार्थ को लेकर, इसे निजी हाथों में देने का फैसला ले लिया हैं, जिसे किसी भी प्रकार से सही नहीं ठहराया जा सकता।

Krishna Bihari Mishra

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