अभी भी वक्त है संभलिये, इन बच्चियों के दर्द को महसूस करिये, नहीं तो कल किसने देखा
झारखण्ड इसी लिए बना था कि यहां की बेटियां दिल्ली या महानगरों में ले जायी जायेंगी और वहां उनके साथ यौन शोषण होगा, और वे दो जून की रोटी के लिए जिंदगी भर तरसती रहेगी, वह काम भी करेगी और उसके महीने के पैसे, दलाल ले जाया करेंगे, वह जिंदा भी रहेगी या नहीं, उसकी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं होगा। आखिर राज्य सरकार बताएं और उनके आइएएस बताएं कि ये जो अपने राज्य में आदिवासी बालक-बालिकाओं के लिए मनोहारि योजनाएं, बराबर बनती रहती हैं,
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