रघुवर दास को महिलाओं के सम्मान/सुरक्षा को लेकर बिहार सरकार से सीख लेनी चाहिए

पिछले दिनों, मैं पटना के दौरे पर था, इसी दौरान हमने पटना के सचिवालय स्थित विकास भवन का भी दौरा किया। जहां विभिन्न मंत्रालयों के विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव तथा उनके मातहत कार्य करनेवाले विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों का समूह अपने कायों को गति दे रहा था। हमनें इस दौरान पाया कि हर विभाग के समीप एक पोस्टर लगी थी, जो हमें बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रही थी।

पिछले दिनों, मैं पटना के दौरे पर था, इसी दौरान हमने पटना के सचिवालय स्थित विकास भवन का भी दौरा किया। जहां विभिन्न मंत्रालयों के विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव तथा उनके मातहत कार्य करनेवाले विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों का समूह अपने कायों को गति दे रहा था। हमनें इस दौरान पाया कि हर विभाग के समीप एक पोस्टर लगी थी, जो हमें बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रही थी।

वो पोस्टर, बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग और महिला विकास निगम की ओर से लगाई गई थी। पोस्टर कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (निवारण, निषेध एवं प्रतिशोध) अधिनियम को लेकर था, जिसमें साफ लिखा था – क्या आपके विभाग/कार्यालय/संस्थान में ‘आंतरिक परिवाद समिति’ का गठन हुआ है?

यह पोस्टर बता रहा था कि बिहार सरकार नारियों के सम्मान के प्रति कितना सजग है, अपने कार्यस्थल पर कार्यरत महिलाकर्मियों की सुरक्षा के प्रति कितना सजग है, पर यहीं बात क्या झारखण्ड में दिखाई पड़ती है? उत्तर होगा – नहीं। जिस झारखण्ड में मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत महिलाएं सुरक्षित नहीं, वहां अन्य विभागों के क्या हाल होते होंगे, समझा जा सकता है। सच्चाई यह भी है कि झारखण्ड के 99 प्रतिशत विभागों में आतंरिक परिवार समिति का गठन ही नहीं हुआ है और न ही यहॉं का समाज कल्याण विभाग इस ओर प्रयत्नशील है।

बहुत पहले जब इस राज्य में मुख्यमंत्री के प्रधानसचिव संजय कुमार थे, तब उन्होंने अपने सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में इस प्रकार की समिति का गठन किया था, पर अन्य विभागों में ऐसा है, इसका दावा कोई नहीं कर सकता, जबकि यह बहुत ही जरुरी है।

आश्चर्य इस बात की है कि जब मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत महिलाओं ने अपने उपर हो रही ज्यादती की शिकायत प्रधानमंत्री को की थी, तब मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में कार्यरत महिलाओं की शिकायत पर, एक जांच कमेटी भी बनी थी, जिस जांच कमेटी ने स्वीकारा, कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र में गड़बड़ियां चल रही है, फिर भी मुख्यमंत्री जनसंवाद केन्द्र चलानेवालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, क्योंकि जिन्हें कार्रवाई करना है, और जिन पर कार्रवाई होनी है, दोनों मुख्यमंत्री के चहेते है। अब आप इसी से समझिये कि इस राज्य की सरकार महिलाओं के सम्मान के प्रति कितना सजग है, या महिलाओं के सम्मान और उनकी सुरक्षा के प्रति उनका रवैया क्या है?

Krishna Bihari Mishra

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