अपनी बात

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लोकतंत्र की खुबसूरती विपक्ष से है, विपक्ष को नजरंदाज करने का खामियाजा जनता को ही भुगतना पड़ेगा

पूरी दुनिया में जो भी देश लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाये हुए हैं, उन देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था वहीं मजबूत हुई, जहां विपक्ष मजबूत हैं, नहीं तो सत्तापक्ष के मनमानेपन रवैये से लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही गहरा आघात लगता है, चूंकि भारत में एक नई प्रकार की लोकतांत्रिक व्यवस्था है, यहां की जनता किसी पर भरोसा करती हैं, तो उसे छप्पड़ फाड़ कर दे देती हैं, और जिससे नाराज होती है, तो उसे धूल चटा देती है।

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सुख क्या है? सुख कहां होता है? कोई कल PM मोदी की मां से पूछता तो वो उसका सही उत्तर बता देती

कल हमें दुनिया की सबसे सुंदर तस्वीर देखने को मिली, एक मां जो बहुत ही सामान्य ढंग से अपना जीवन व्यतीत करती हैं, वह अपने बेटे को दुबारा भारत का प्रधानमंत्री बनता हुआ देख रही थी, उसका बेटा प्रधानमंत्री पद का शपथ ले रहा था, इसके पहले वह अपने बेटे को तीन-तीन बार गुजरात का मुख्यमंत्री बनते हुए देख चुकी थी, सचमुच ऐसा सौभाग्य बहुत कम मां को मिलता हैं, निश्चित ही नरेन्द्र मोदी की मां का प्रारब्ध बहुत ही सुंदर हैं, जो ऐसा देखने में वो सफल हुई।

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हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर उन सारे पत्रकारों को बधाई, जो निरन्तर हिन्दी पत्रकारिता की साख को गिराने में लगे हैं

भाई, मैं तो धन्य हूं कि उस समय भी पत्रकारिता कर रहा हूं, जब पत्रकारिता अपने चाटुकारिता के स्वर्णिम युग में हैं। मैं आज हिन्दी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर उन सारे हिन्दी पत्रकारों को धन्यवाद देता हूं, दिल से बधाई देता हूं कि उन्होंने बड़ी मेहनत करके इस चाटुकारिता को एक धर्म का रुप प्रदान कर, स्वयं तो इसमें स्नान किया ही, और लोगों को भी इसमें स्नान करने को प्रेरित किया और जो इस पेश को अपनाना चाहते हैं,

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गांधी-वाजपेयी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने से अच्छा है कि उनके विचारधारा को आत्मसात् किया जाय

जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब उन्होंने पं. जवाहर लाल नेहरु से संबंधित एक वाकया लोकसभा में सुनाया। उन्होंने बताया कि साउथ ब्लॉक में पं. नेहरु की एक चित्र लगी हुई रहती थी, जब वे उधर से गुजरते थे, तो बराबर देखा करते थे। सदन में नेहरु जी के साथ उनकी एक बार नहीं, कई बार नोक-झोंक हुआ करती थी, कभी –कभी तो उन्हें बोलने के लिए सदन से वॉक आउट भी करना पड़ता था,

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हम भारत के लोगों को देश से ज्यादा अपनी जाति और धर्म प्यारी है, वोट किसे देना है, हमें कोई नहीं बताएं

53 साल का हो गया हूं, भारत की जनता को नजदीक से देखा हूं, गजब है, इसके दिलों के राज को जान लेना सबके वश की बात नहीं हैं, ये क्या कहेगी और क्या कर देगी? आप अंदाजा नहीं लगा सकते। जरा देखिये, पहले हम आपको ज्यादा दूर नहीं ले चलेंगे, झारखण्ड की ही बात करेंगे, जिस चतरा और पलामू के लोगों ने जमकर भाजपा कैडिंडेट को लताड़ा, उसका खुलकर विरोध किया,

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मैं CM रघुवर हूं, PM मोदी की बात नहीं मानूंगा, मैं भी ममता बनर्जी की तरह, अपने विरोधियों को जेल भेजूंगा

एक बार फिर पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कथन पढ़िये, जो उन्होंने बंगाल की एक चुनावी सभा में 15 मई 2019 को कहा था, जब एक भाजपा कार्यकर्ता प्रियंका शर्मा को प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भद्दी तस्वीर बनाने के जूर्म में गिरफ्तार कर लिया गया था, जरा देखिये पीएम नरेन्द्र मोदी क्या बोल रहे हैं –

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सुनो, सुनो, सुनो, साढ़े चार साल तक हाथी उड़ानेवाले CM रघुवर, बचे पांच महीनों में गांवों की तस्वीर बदलेंगे

हमारे राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास कितने होनहार है, वे गांवों की कितनी चिन्ता करते हैं, उनके लोग तथा उनके चाहनेवाले, उनके आगे-पीछे करनेवाले तो बताते है कि बेचारे गांवों की चिन्ता के कारण ही कभी मोटा नहीं पायें, हमेशा दुबले होते चले गये, जरा देखिये न कल ही मुखिया संघ के प्रतिनिधियों की एक बैठक की और कह दिया कि गांवों की तस्वीर बदलेगी, जल्द ही वहां शहरों जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जायेगी,

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झारखण्ड में सर्वाधिक अशुद्ध झाविमो और सर्वाधिक परिष्कृत देसी गाय द्वारा निर्मित पंचगव्य तथा पंचामृत से शुद्ध की गई भाजपा

कल अचानक दो पत्र झाविमो से संबंधित वायरल किये गये। एक पत्र था जिसमें बाबू लाल मरांडी ने झाविमो के प्रधान महासचिव पद पर विराजमान विधायक प्रदीप यादव से इस्तीफा मांगा था और दुसरा पत्र था, जिसमें प्रदीप यादव ने बाबू लाल मरांडी को अपना त्याग पत्र सौंपा हैं। सबसे पहले देखे कि बाबू लाल मरांडी ने प्रदीप यादव को जो पत्र लिखा, उस पत्र में क्या है?

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मोदी जी, समझने की कोशिश कीजिये, आगे भी जनता आपकी बातों में आकर, आपको सत्ता सौंप ही देगी, इस भूल में न रहियेगा

ये कोई नई बात नहीं हैं, भाजपा का कोई भी नेता व कार्यकर्ता बहुत अच्छा भाषण देता है, नरेन्द्र मोदी तो प्रधानमंत्री ही हैं, ये अलग बात है कि झारखण्ड के मुख्यमंत्री रघुवर दास को न तो भाषण देने आता है और न ही जनता या सदन में अपनी बातें रखनी आती है, जिसके कारण वे खुद कई जगहों पर हंसी के पात्र बनते हैं और सोशल साइट पर लोग उन्हें रगड़ने से बाज नहीं आते।

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मायूस होना, इस्तीफे देना, एक-दूसरे को नंगा करना एवं विधवा प्रलाप छोड़े, समय कम है, विधानसभा चुनाव में इस हार का बदला लें

लोकसभा चुनाव क्या हार गये? महागठबंधन के सभी दलों में मुरदन्नी छा गई है, सभी शोकाकुल हैं, नीचे से लेकर उपर तक इस्तीफे का दौर चल पड़ा हैं, विधवा प्रलाप करने में लग गये हैं, कुछ लोग अभी भी अपनी नीचतई को छोड़े नहीं हैं, वे अभी भी एक-दूसरे को नंगा करने में लगे हैं, तथा इस हार का ठीकरा एक व्यक्ति पर फोड़े जा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि किसी भी संस्था या दल की हार या जीत का श्रेय एक व्यक्ति के मत्थे नहीं मढ़ा जा सकता,

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